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पीजीआई 2.0 रिपोर्ट 2025-26: चंडीगढ़ शीर्ष पर, पर कोई राज्य सर्वोच्च तीन श्रेणियों में नहीं

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पीजीआई 2.0 रिपोर्ट 2025-26: चंडीगढ़ शीर्ष पर, पर कोई राज्य सर्वोच्च तीन श्रेणियों में नहीं

सारांश

पीजीआई 2.0 रिपोर्ट 2025-26 बताती है कि भारतीय स्कूली शिक्षा में सुधार हो रहा है, पर सर्वोच्च तीन श्रेणियाँ अभी भी खाली हैं। चंडीगढ़ अकेला 'उत्तम-3' में पहुँचा। 24.72 करोड़ छात्रों और 1.03 करोड़ शिक्षकों वाली इस विशाल व्यवस्था में NEP 2020 के लक्ष्य अभी दूर हैं।

मुख्य बातें

शिक्षा मंत्रालय ने 7 जुलाई 2025 को पीजीआई 2.0 की 2025-26 रिपोर्ट जारी की।
चंडीगढ़ देश का एकमात्र राज्य/केंद्रशासित प्रदेश जो 'उत्तम-3' ग्रेड में पहुँचा।
इस वर्ष भी कोई राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सर्वोच्च तीन श्रेणियों में स्थान नहीं बना सका।
देश में 14.67 लाख से अधिक स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 24.72 करोड़ विद्यार्थी।
पीजीआई 2.0 1000 अंकों और 70 संकेतकों पर आधारित; पीजीआई-डी जिला स्तर पर 600 अंकों पर।
दिल्ली, केरल, पंजाब सहित पाँच राज्य/केंद्रशासित प्रदेश 'प्रचेष्टा-1' श्रेणी में।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 की 2025-26 रिपोर्ट ने भारतीय स्कूली शिक्षा की मिश्रित तस्वीर पेश की है — सुधार के संकेत स्पष्ट हैं, लेकिन 7 जुलाई 2025 को जारी इस रिपोर्ट में एक बार फिर कोई भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सर्वोच्च तीन प्रदर्शन श्रेणियों में स्थान नहीं बना सका। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों की दिशा में यह रिपोर्ट राज्यों के लिए प्रगति का आईना है, जो उपलब्धियों के साथ-साथ शेष चुनौतियों को भी उजागर करती है।

चंडीगढ़ का शीर्ष प्रदर्शन

चंडीगढ़ इस वर्ष देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला केंद्रशासित प्रदेश बनकर उभरा है। सर्वोच्च अंकों के साथ यह 'उत्तम-3' ग्रेड में पहुँचने वाला देश का एकमात्र राज्य या केंद्रशासित प्रदेश है। शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता और आधारभूत सुविधाओं में चंडीगढ़ की यह उपलब्धि उल्लेखनीय मानी जा रही है।

चंडीगढ़ के बाद 'प्रचेष्टा-1' श्रेणी में दिल्ली, केरल, पंजाब तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव को स्थान मिला है। महाराष्ट्र, ओडिशा, गोवा, हिमाचल प्रदेश और लक्षद्वीप ने 'प्रचेष्टा-2' ग्रेड हासिल किया है। इसके अतिरिक्त, 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 'प्रचेष्टा-3' तथा 13 को 'आकांक्षी-1' श्रेणी में रखा गया है।

भारतीय शिक्षा तंत्र का विशाल आकार

रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 14.67 लाख से अधिक स्कूल हैं, जिनमें रिकॉर्ड 1.03 करोड़ शिक्षक कार्यरत हैं और लगभग 24.72 करोड़ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। आंकड़ों के अनुसार, यह दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इतने विशाल तंत्र की गुणवत्ता और प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए शिक्षा मंत्रालय प्रतिवर्ष पीजीआई रिपोर्ट जारी करता है।

पीजीआई 2.0 का मूल्यांकन ढाँचा

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विकसित पीजीआई 2.0 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शैक्षिक प्रदर्शन का व्यापक राष्ट्रीय मानक है। यह 1000 अंकों पर आधारित है और इसमें 70 संकेतक शामिल हैं, जिन्हें दो प्रमुख श्रेणियों — परिणाम तथा सुशासन एवं प्रबंधन — में बाँटा गया है।

इन संकेतकों के अंतर्गत छह क्षेत्रों का मूल्यांकन किया जाता है: सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, शिक्षा तक पहुँच, आधारभूत संरचना एवं सुविधाएँ, समानता एवं समावेशन, प्रशासनिक प्रक्रियाएँ, और शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण। इस मूल्यांकन के लिए यूडीआईएसई प्लस, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, पीएम पोषण पोर्टल, प्रबंध पोर्टल और विद्यांजलि पोर्टल के आँकड़ों का उपयोग किया गया है। गौरतलब है कि इस सूचकांक का उद्देश्य राज्यों की रैंकिंग नहीं, बल्कि उन्हें प्रदर्शन के आधार पर वर्गीकृत कर सुधार की दिशा स्पष्ट करना है।

जिला स्तर पर पीजीआई-डी का विस्तार

शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों के साथ-साथ जिलों के प्रदर्शन को मापने के लिए पीजीआई-डी भी तैयार किया है। 600 अंकों के अंतर्गत 70 संकेतकों पर आधारित यह ढाँचा 11 प्रमुख क्षेत्रों को समेटता है — जिनमें सीखने के परिणाम, कक्षा शिक्षण की प्रभावशीलता, डिजिटल शिक्षा, स्कूल सुरक्षा, शिक्षक उपलब्धता, स्कूल नेतृत्व विकास और धनराशि का प्रभावी उपयोग शामिल हैं। यह ढाँचा यह समझने में सहायक है कि शैक्षिक योजनाओं का वास्तविक प्रभाव ज़मीनी स्तर पर कितना दिखाई दे रहा है।

आगे की राह

रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि अधिकांश राज्यों ने पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है और कई ने अपनी श्रेणी में सुधार किया है — फिर भी सर्वोच्च श्रेणियाँ अभी भी अप्राप्य बनी हुई हैं। सीखने के परिणामों, बुनियादी सुविधाओं, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा प्रशासन में अभी व्यापक सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों की प्राप्ति में यह रिपोर्ट राज्यों और जिलों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज़ का काम करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन NEP 2020 के लागू होने के पाँच वर्ष बाद भी सर्वोच्च पायदान खाली रहना यह सवाल उठाता है कि क्या लक्ष्य-निर्धारण और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए पर्याप्त संसाधन और जवाबदेही तंत्र मौजूद हैं। चंडीगढ़ की सफलता एक छोटे, केंद्रशासित प्रदेश का मॉडल है — इसे बड़े, विविध राज्यों पर लागू करना कहीं अधिक जटिल चुनौती है जिस पर रिपोर्ट पर्याप्त रोशनी नहीं डालती।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीजीआई 2.0 रिपोर्ट 2025-26 क्या है?
यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट है जो देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्कूली शिक्षा प्रदर्शन का मूल्यांकन 1000 अंकों और 70 संकेतकों के आधार पर करती है। इसका उद्देश्य रैंकिंग नहीं, बल्कि ग्रेड-आधारित वर्गीकरण के ज़रिए सुधार की दिशा स्पष्ट करना है।
पीजीआई 2.0 में इस बार सबसे अच्छा प्रदर्शन किसने किया?
चंडीगढ़ ने इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 'उत्तम-3' ग्रेड हासिल करने वाला देश का एकमात्र राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बना। दिल्ली, केरल और पंजाब 'प्रचेष्टा-1' श्रेणी में रहे।
क्या कोई राज्य सर्वोच्च तीन श्रेणियों में पहुँचा?
नहीं। पीजीआई 2.0 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष भी कोई राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सर्वोच्च तीन प्रदर्शन श्रेणियों में स्थान नहीं बना सका, जो दर्शाता है कि शिक्षा की गुणवत्ता में अभी और व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
पीजीआई-डी क्या है और यह पीजीआई 2.0 से कैसे अलग है?
पीजीआई-डी जिला स्तर पर शैक्षिक प्रदर्शन मापने का ढाँचा है जो 600 अंकों और 70 संकेतकों पर आधारित है, जबकि पीजीआई 2.0 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर 1000 अंकों पर काम करता है। पीजीआई-डी का उद्देश्य यह जाँचना है कि शैक्षिक योजनाओं का वास्तविक असर ज़िला स्तर पर कितना दिख रहा है।
भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था कितनी बड़ी है?
रिपोर्ट के अनुसार देश में 14.67 लाख से अधिक स्कूल हैं, जिनमें 1.03 करोड़ शिक्षक कार्यरत हैं और लगभग 24.72 करोड़ विद्यार्थी पढ़ते हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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