पीएम आवास योजना (ग्रामीण): छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र, छूटे पात्र परिवारों को जोड़ने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 6 जुलाई 2026 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सर्वे प्रक्रिया में छूट गए पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया है। पत्र में दो प्रमुख तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है, जिनके कारण राज्य में बड़ी संख्या में वास्तविक रूप से पात्र परिवार योजना से बाहर रह गए हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन की पृष्ठभूमि
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 28 और 29 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल थी। इस सम्मेलन में देशभर के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक मंच पर आकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में ग्रामीण विकास पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
शर्मा ने पत्र में कहा कि सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने यह आश्वासन दिया था कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी पात्र व्यक्ति प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभ से वंचित नहीं रहेगा। इसी आश्वासन के संदर्भ में उन्होंने छत्तीसगढ़ में सामने आई दो विशिष्ट समस्याओं की जानकारी दी।
मुख्य समस्याएं: सर्वे में क्यों छूटे पात्र परिवार
पत्र के अनुसार, 24 जून 2026 को छत्तीसगढ़ में ग्राम सभाओं का आयोजन कर आवास प्लस 2.0 की सूची ग्राम सभाओं के समक्ष प्रस्तुत की गई। इस प्रक्रिया में दो गंभीर कमियाँ उजागर हुईं।
पहली समस्या यह रही कि सर्वेक्षण के समय कई पात्र परिवारों के सदस्य पलायन या अन्य कारणों से अपने गाँव में उपस्थित नहीं थे, जिससे उनका सर्वे नहीं हो सका और वे पात्रता सूची से बाहर रह गए। दूसरी समस्या यह थी कि कुछ वास्तविक रूप से पात्र परिवारों को तकनीकी या अन्य कारणों से सर्वे के दौरान अपात्र दर्ज कर दिया गया। चूँकि पोर्टल पर केवल पात्र परिवारों की सूची ही उपलब्ध थी, इसलिए ऐसे परिवारों की सूची ग्राम सभा के सामने प्रस्तुत ही नहीं हो सकी।
केंद्र से क्या माँगा गया है
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि भारत सरकार स्तर पर आवश्यक पहल कर इन दोनों समस्याओं का समाधान किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा न होने पर प्रधानमंत्री के 'सभी पात्र परिवारों को आवास' देने के संकल्प को पूरी तरह साकार नहीं किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ एक बड़ी ग्रामीण आबादी वाला राज्य है, जहाँ मौसमी पलायन एक सामान्य सामाजिक-आर्थिक वास्तविकता है। ऐसे में सर्वे-आधारित पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया में इस कारक को न जोड़ना एक संरचनात्मक खामी की ओर संकेत करता है।
आगे क्या होगा
शर्मा ने पत्र के अंत में शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी छत्तीसगढ़ के प्रति इसी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा जताई। अब यह देखना होगा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय इस पत्र पर क्या निर्णय लेता है और क्या आवास प्लस 2.0 की सूची में संशोधन की अनुमति दी जाती है।