कल्याण अस्पताल में शिवसेना पार्षद की महिला डॉक्टरों पर मारपीट, विपक्ष ने बताया 'गुंडागर्दी'
सारांश
मुख्य बातें
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम क्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल में 6 जुलाई 2025 को शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे और उनके साथियों ने कथित तौर पर महिला डॉक्टरों एवं अस्पताल कर्मचारियों के साथ मारपीट की, जिसके बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आरोपी नगरसेवक की गिरफ्तारी हो चुकी है और मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला के परिजनों को सूचित किया था कि नवजात शिशु को जन्म के बाद एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ सकती है, परंतु अस्पताल के सभी एनआईसीयू बेड पहले से भरे हुए थे। इस पर डॉक्टरों ने परिजनों को किसी अन्य उपयुक्त अस्पताल में जाने की सलाह दी।
इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और सीसीटीवी फुटेज में नगरसेवक रमेश म्हात्रे अपने साथियों के साथ अस्पताल के एक कमरे में घुसते दिखाई देते हैं। फुटेज के अनुसार, यह हमला तीन मिनट से अधिक समय तक चला। एक महिला डॉक्टर जब मोबाइल फोन से किसी को सूचित करने की कोशिश कर रही थीं, तब कथित तौर पर पीछे से उन पर हमला किया गया, जिससे उनका फोन हाथ से गिर गया। इसके बाद अन्य कर्मचारियों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से माँग की कि नगरसेवक म्हात्रे को न केवल गिरफ्तार किया जाए, बल्कि उन्हें नगरसेवक पद से भी अयोग्य घोषित किया जाए। उन्होंने कहा, 'उन्हें कल्याण और डोंबिवली में घुमाया जाए, ताकि लोगों को संदेश मिले कि किसी पर भी हमला नहीं किया जा सकता, खासकर डॉक्टरों और नर्सों पर, चाहे वे महिला हों या पुरुष।'
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने इस घटना को 'गुंडागर्दी' करार देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग ऐसे व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'डॉक्टर ने स्पष्ट बताया था कि अस्पताल में जगह उपलब्ध नहीं है। गर्भवती महिला और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता था, इसलिए डॉक्टर ने परिवार को अस्थायी रूप से किसी निजी अस्पताल में जाने की सलाह दी थी।'
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि भारी बहुमत मिलने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन में अहंकार आ गया है। उन्होंने कहा, 'यह सावित्रीबाई फुले और छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती है, जहाँ महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च माना जाता है।' कांग्रेस नेता असलम शेख ने आरोप लगाया कि सुविधाएँ बढ़ाने के बजाय महिला डॉक्टरों को डराने का काम किया जा रहा है।
सरकार और सत्तारूढ़ दल की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र की मंत्री मेघना बोर्डीकर ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों, इसके लिए कदम उठाए जाएंगे। मंत्री प्रकाशराव अबितकर ने कहा कि सभी को आचार संहिता का पालन करना चाहिए और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। मंत्री योगेश कदम ने भी स्पष्ट किया कि हिंसा किसी भी शिकायत का समाधान नहीं है।
वहीं, शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई वीडियो नहीं देखा जिसमें नगरसेवक म्हात्रे महिला डॉक्टर को मारते दिखाई दे रहे हों। उन्होंने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की नेता सरोज आहिरे ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी महिला पर हाथ उठाना बिल्कुल गलत है और शिकायतों का समाधान कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
चिकित्सा समुदाय और व्यापक प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि डॉक्टरों पर हमले की यह घटना देश में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से जुड़ी लंबी चिंताओं की पृष्ठभूमि में आई है। चिकित्सा समुदाय ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे कर रही है।
आगे क्या होगा
मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार किया जा चुका है। विपक्ष ने नगरसेवक को पद से अयोग्य घोषित करने और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करने की माँग की है। सरकार ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएगा।