9 जुलाई 2026
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संजय राउत का शरद पवार पर हमला: 'गद्दारों को वैधता मत दो', शिंदे चैंबर बैठक पर भड़के

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संजय राउत का शरद पवार पर हमला: 'गद्दारों को वैधता मत दो', शिंदे चैंबर बैठक पर भड़के

सारांश

शरद पवार का एकनाथ शिंदे के चैंबर में बैठक करने का फैसला MVA में नई दरार की वजह बन गया है। संजय राउत ने खुलकर कहा — 'गद्दारों को सम्मान देने से खुद की विश्वसनीयता कमजोर होती है।' यह विवाद 2024 की हार के बाद विपक्षी एकता की असल परीक्षा है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने 9 जुलाई को शरद पवार की आलोचना की, जिन्होंने एकनाथ शिंदे के विधान भवन चैंबर में NCP (SP) की बैठक आयोजित की।
राउत ने कहा कि गद्दारों के दफ्तर में बैठक करने से NCP (SP) की जनता के बीच विश्वसनीयता कमजोर होती है।
राउत ने अजित पवार के खिलाफ कोर्ट जाने और शिंदे को मान्यता देने के बीच नैतिक विरोधाभास उजागर किया।
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के नतीजों पर भी राउत ने सवाल उठाए और शिवसेना (यूबीटी) को न बुलाए जाने पर नाराजगी जताई।
राउत ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध राजनीतिक है, व्यक्तिगत नहीं — पवार के साथ उनके संबंध आत्मीय बने हुए हैं।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 9 जुलाई को मुंबई में एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की कड़ी आलोचना की, जब पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विधान भवन स्थित चैंबर में अपनी पार्टी की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। राउत ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता इस कदम से उन लोगों को राजनीतिक मान्यता दे रहे हैं जिन्होंने महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार गिराई थी। इस विवाद ने गठबंधन के भीतर एक नई亀裂 उजागर कर दी है।

विवाद की जड़ क्या है

राउत ने सवाल उठाया कि जब यूबी चव्हाण प्रतिष्ठान जैसे वैकल्पिक स्थान उपलब्ध थे, तब पवार ने बैठक के लिए शिंदे का चैंबर क्यों चुना। उन्होंने कहा, 'एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र को धोखे और भ्रष्टाचार से बर्बाद कर दिया है। पवार साहब ने बैठक के लिए उनका चैंबर क्यों चुना? क्या पूरा विधान भवन खाली था? हमारे वफादार जमीनी कार्यकर्ताओं की यही पक्की राय है।' राउत का यह बयान स्पष्ट करता है कि उनकी नाराजगी प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक सिद्धांतों पर आधारित है।

राउत के तीखे बोल

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने एनसीपी (एसपी) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'हम अपनी पार्टी की बैठकें करने के लिए कभी भी किसी गद्दार के दफ्तर में नहीं जाएंगे। ऐसे समझौतों की वजह से ही एनसीपी (एसपी) जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो देती है।' राउत ने यह भी कहा कि पवार ने अजित पवार के विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटाया था — तो फिर शिंदे को मान्यता देना किस नैतिकता के तहत उचित है? उन्होंने पूछा, 'अजित पवार ने भी गद्दारी की थी। तब आप कोर्ट क्यों गए? हम एकनाथ शिंदे के खिलाफ लगातार लड़ रहे हैं। आप उन्हें मान्यता क्यों दे रहे हैं?'

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा बैठक पर भी सवाल

राउत ने विधान भवन में बुधवार को हुई उस उच्चस्तरीय बैठक के नतीजों पर भी असंतोष जताया, जो कथित तौर पर महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि बैठक में वास्तव में क्या हुआ, यह सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि शिवसेना (यूबीटी) — जो सीमा आंदोलन की एक प्रमुख हिस्सेदार है — को इस बैठक में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया और अगली बैठक की तारीख क्या है।

व्यक्तिगत नहीं, राजनीतिक विरोध

राउत ने स्पष्ट किया कि शरद पवार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध गहरे और आत्मीय हैं। उन्होंने कहा, 'शरद पवार निस्संदेह एक बड़े नेता और बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं। मैं शरद पवार से कभी भी बात कर सकता हूं, लेकिन एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर यह मामला हमारे लिए बहुत गंभीर है।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वरिष्ठ नेता इसी तरह गद्दारों को सम्मान देते रहे, तो अपनी ही पार्टी में हुई बगावत के खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार खो देंगे।

MVA के भीतर दरार का संकेत

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब महाविकास अघाड़ी को 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद खुद को पुनर्गठित करने की जरूरत है। गठबंधन के भीतर इस तरह के सार्वजनिक मतभेद विपक्षी एकता की राह में बाधा बन सकते हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि MVA में रणनीतिक और वैचारिक मतभेद अभी भी सुलझे नहीं हैं, और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे MVA की गहरी वैचारिक दरार है। 2024 की करारी हार के बाद गठबंधन को एकजुट रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है, और ऐसे में इस तरह का सार्वजनिक टकराव विपक्ष की कमजोरी उजागर करता है। शरद पवार की 'बड़े दिल' वाली राजनीति और राउत की 'सिद्धांतवादी' लाइन के बीच यह टकराव नया नहीं है — लेकिन इसका सार्वजनिक होना दर्शाता है कि MVA के भीतर रणनीतिक सहमति अभी भी नहीं बन पाई है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज 'बयानबाजी' मान रही है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या MVA 2027 के चुनाव से पहले एक साझा राजनीतिक आचार संहिता तय कर पाएगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने शरद पवार की आलोचना क्यों की?
राउत ने आलोचना इसलिए की क्योंकि शरद पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विधान भवन चैंबर में NCP (SP) की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। राउत का कहना है कि शिंदे ने MVA सरकार गिराई थी, इसलिए उनके दफ्तर में बैठक करना उन्हें राजनीतिक मान्यता देना है।
एकनाथ शिंदे के चैंबर में बैठक का विवाद क्या है?
शरद पवार ने अपनी पार्टी NCP (SP) की बैठक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विधान भवन स्थित चैंबर में करने का फैसला किया। राउत ने सवाल उठाया कि जब YB चव्हाण प्रतिष्ठान जैसे वैकल्पिक स्थान उपलब्ध थे, तब शिंदे का ही चैंबर क्यों चुना गया।
क्या इस विवाद से MVA टूट सकती है?
राउत ने कहा कि उनकी नाराजगी राजनीतिक है, व्यक्तिगत नहीं, और शरद पवार के साथ उनके संबंध आत्मीय बने हुए हैं। हालांकि, यह विवाद 2024 की हार के बाद पहले से कमजोर MVA गठबंधन में एक और दरार का संकेत देता है।
संजय राउत ने अजित पवार का जिक्र किस संदर्भ में किया?
राउत ने तर्क दिया कि शरद पवार ने अजित पवार की 'गद्दारी' के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था, तो फिर एकनाथ शिंदे को मान्यता देना नैतिक रूप से विरोधाभासी है। उन्होंने इसे MVA के सिद्धांतों के साथ समझौता बताया।
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद बैठक पर राउत ने क्या कहा?
राउत ने विधान भवन में हुई उस बैठक के नतीजों पर सवाल उठाए जो कथित तौर पर महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) को आमंत्रित नहीं किया गया और बैठक के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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