संजय राउत का शरद पवार पर हमला: 'गद्दारों को वैधता मत दो', शिंदे चैंबर बैठक पर भड़के
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 9 जुलाई को मुंबई में एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की कड़ी आलोचना की, जब पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विधान भवन स्थित चैंबर में अपनी पार्टी की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। राउत ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता इस कदम से उन लोगों को राजनीतिक मान्यता दे रहे हैं जिन्होंने महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार गिराई थी। इस विवाद ने गठबंधन के भीतर एक नई亀裂 उजागर कर दी है।
विवाद की जड़ क्या है
राउत ने सवाल उठाया कि जब यूबी चव्हाण प्रतिष्ठान जैसे वैकल्पिक स्थान उपलब्ध थे, तब पवार ने बैठक के लिए शिंदे का चैंबर क्यों चुना। उन्होंने कहा, 'एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र को धोखे और भ्रष्टाचार से बर्बाद कर दिया है। पवार साहब ने बैठक के लिए उनका चैंबर क्यों चुना? क्या पूरा विधान भवन खाली था? हमारे वफादार जमीनी कार्यकर्ताओं की यही पक्की राय है।' राउत का यह बयान स्पष्ट करता है कि उनकी नाराजगी प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक सिद्धांतों पर आधारित है।
राउत के तीखे बोल
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने एनसीपी (एसपी) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'हम अपनी पार्टी की बैठकें करने के लिए कभी भी किसी गद्दार के दफ्तर में नहीं जाएंगे। ऐसे समझौतों की वजह से ही एनसीपी (एसपी) जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो देती है।' राउत ने यह भी कहा कि पवार ने अजित पवार के विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटाया था — तो फिर शिंदे को मान्यता देना किस नैतिकता के तहत उचित है? उन्होंने पूछा, 'अजित पवार ने भी गद्दारी की थी। तब आप कोर्ट क्यों गए? हम एकनाथ शिंदे के खिलाफ लगातार लड़ रहे हैं। आप उन्हें मान्यता क्यों दे रहे हैं?'
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा बैठक पर भी सवाल
राउत ने विधान भवन में बुधवार को हुई उस उच्चस्तरीय बैठक के नतीजों पर भी असंतोष जताया, जो कथित तौर पर महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि बैठक में वास्तव में क्या हुआ, यह सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि शिवसेना (यूबीटी) — जो सीमा आंदोलन की एक प्रमुख हिस्सेदार है — को इस बैठक में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया और अगली बैठक की तारीख क्या है।
व्यक्तिगत नहीं, राजनीतिक विरोध
राउत ने स्पष्ट किया कि शरद पवार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध गहरे और आत्मीय हैं। उन्होंने कहा, 'शरद पवार निस्संदेह एक बड़े नेता और बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं। मैं शरद पवार से कभी भी बात कर सकता हूं, लेकिन एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर यह मामला हमारे लिए बहुत गंभीर है।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वरिष्ठ नेता इसी तरह गद्दारों को सम्मान देते रहे, तो अपनी ही पार्टी में हुई बगावत के खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार खो देंगे।
MVA के भीतर दरार का संकेत
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब महाविकास अघाड़ी को 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद खुद को पुनर्गठित करने की जरूरत है। गठबंधन के भीतर इस तरह के सार्वजनिक मतभेद विपक्षी एकता की राह में बाधा बन सकते हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि MVA में रणनीतिक और वैचारिक मतभेद अभी भी सुलझे नहीं हैं, और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है।