डीआरसी में इबोला: 5,290 कन्फर्म केस, 2,516 मौतें — इतिहास का सबसे तेज़ फैलने वाला प्रकोप
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप खतरनाक रफ्तार से फैल रहा है। अफ्रीका सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त 2026 तक देश में 5,290 कन्फर्म मामले और 2,516 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यदि संक्रमण की मौजूदा रफ्तार नहीं थमी, तो यह 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका इबोला संकट को पीछे छोड़कर इतिहास का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है।
संक्रमण की रफ्तार: इतिहास में अभूतपूर्व
अफ्रीका सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार, प्रकोप के 13वें सप्ताह तक वर्तमान संक्रमण संख्या 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप की इसी अवधि की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है, जबकि मौतें करीब 7 गुना अधिक हैं। उस महामारी में 28,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 11,000 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी। इस आधार पर WHO ने इसे अब तक का सबसे तेज़ी से फैलने वाला इबोला प्रकोप घोषित किया है।
अधिकारियों का अनुमान है कि वास्तविक संक्रमितों की संख्या दर्ज आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि फिलहाल केवल 30 से 40 प्रतिशत मामलों का ही पता चल पा रहा है।
बुंडीबुग्यो वायरस: न टीका, न इलाज
यह प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस के कारण हो रहा है, जिसके विरुद्ध फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। इस वायरस के लक्षण कुछ अन्य इबोला प्रकारों की तुलना में अपेक्षाकृत हल्के हो सकते हैं, जिसके कारण संक्रमित लोग शुरुआती चरण में अस्पताल या स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करने में देर कर रहे हैं — और यही देरी संक्रमण की चेन को तोड़ने में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
नियंत्रण में भारी चुनौतियाँ
संक्रमण अब छह प्रांतों के 56 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है। हाल ही में बास-उएले प्रांत में भी दो नए मामले सामने आए हैं, जहाँ पहले यह संक्रमण नहीं पहुँचा था। कांगो के पूर्वी हिस्से में जारी सशस्त्र संघर्ष, बड़े पैमाने पर विस्थापन, लगातार जनसंचार और स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रति गहरा अविश्वास — इन सभी कारणों ने बीमारी पर काबू पाना बेहद कठिन कर दिया है।
सबसे चिंताजनक पहलू संपर्क-अनुरेखण (contact tracing) की विफलता है। वर्तमान में केवल 10 प्रतिशत से भी कम नए मामले उन लोगों में मिल रहे हैं जो पहले से निगरानी में थे। किसी प्रकोप को नियंत्रण में मानने के लिए यह अनुपात सामान्यतः 90-95 प्रतिशत होना चाहिए।
अस्पताल के बाहर हो रही हैं अधिकांश मौतें
17 अगस्त को दर्ज मौतों में 97 प्रतिशत मौतें समुदाय स्तर पर हुईं, यानी संक्रमित लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई। यह आंकड़ा स्वास्थ्य तंत्र की पहुँच और क्षमता की गहरी कमी को उजागर करता है।
WHO की चेतावनी और आगे की राह
WHO का आकलन है कि यदि संक्रमण की मौजूदा रफ्तार पर प्रभावी ढंग से रोक नहीं लगाई गई, तो यह प्रकोप 2014-16 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला संकट को पीछे छोड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय पहले से ही संसाधनों की कमी और अन्य मानवीय संकटों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि बुंडीबुग्यो वायरस के लिए किसी भी स्वीकृत वैक्सीन की अनुपस्थिति इस प्रकोप को और अधिक जटिल बनाती है — और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह तत्काल संसाधन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराए।