डीआरसी में इबोला से 4,018 मौतें, 8,300 मामलों की पुष्टि; इतिहास का सबसे घातक प्रकोप
सारांश
मुख्य बातें
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में जारी इबोला महामारी ने 2 अक्टूबर 2026 को एक और त्रासद मील का पत्थर पार किया — स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश के सात प्रांतों में 8,300 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 4,018 लोगों की मौत हो गई है। यह डीआरसी के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है, तथा 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप के बाद विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप है।
मुख्य आंकड़े और प्रकोप की स्थिति
स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 2,162 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि इबोला से मृत्यु दर 48.4 प्रतिशत दर्ज की गई है — यानी संक्रमित लगभग हर दूसरे व्यक्ति की जान जा रही है। गौरतलब है कि मई महीने के मध्य में यह प्रकोप केवल तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब यह सात प्रांतों के 63 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक विस्तार पा चुका है।
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) के अधिकारी वेसम मनकौला ने एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन 63 में से 45 स्वास्थ्य क्षेत्रों में अभी भी सक्रिय रूप से संक्रमण फैल रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन मेडेसिन्स सान्स फ्रंटियर्स (MSF) ने गुरुवार को आगाह किया कि वास्तव में प्रभावित होने और जान गंवाने वाले लोगों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है। संगठन ने कहा कि निगरानी तंत्र और मामलों की पहचान में कमियों के चलते वास्तविक संख्या कहीं ज़्यादा होने की आशंका है।
अफ्रीका सीडीसी ने भी गुरुवार को चेतावनी दी कि हाल के सप्ताहों में मामलों की संख्या में आई कमी को संक्रमण पर स्थायी नियंत्रण का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। एजेंसी के अनुसार, यह गिरावट निगरानी व्यवस्था में आई रुकावटों के कारण भी हो सकती है।
सुरक्षा और सामुदायिक विरोध बड़ी बाधा
वेसम मनकौला ने कहा, 'मामलों के ग्राफ में गिरावट का यह मतलब नहीं है कि प्रकोप पूरी तरह नियंत्रण में आ गया है। कई इलाकों में असुरक्षा और स्थानीय समुदायों के विरोध के कारण बीमारी की निगरानी और इससे निपटने की गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं। इससे चिंता बढ़ गई है कि संक्रमण के कुछ मामलों की पहचान नहीं हो पा रही होगी।'
यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी के पूर्वी इलाके पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने में असमर्थ हैं। पिछले चार से पाँच सप्ताह में महामारी के मामलों का ग्राफ काफी हद तक स्थिर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे राहत का संकेत मानने से मना किया है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
यह डीआरसी में दर्ज किया गया अब तक का सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है। इससे पहले 2018-2020 में डीआरसी के उत्तरी किवू प्रांत में फैले प्रकोप में 2,000 से अधिक मौतें हुई थीं। विश्व स्तर पर, सबसे घातक प्रकोप 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका — मुख्यतः लाइबेरिया, सिएरा लियोन और गिनी — में हुआ था, जिसमें 11,000 से अधिक जानें गई थीं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डीआरसी में इबोला की बार-बार वापसी और इस बार के विस्तृत भौगोलिक फैलाव ने वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय सहायता और निगरानी तंत्र की भूमिका निर्णायक होगी।