कांगो में इबोला प्रकोप: 6,250 मामले, 3,039 मौतें — अफ्रीका सीडीसी ने कहा 'अभी नियंत्रण का दावा जल्दबाजी'
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में फैले इबोला प्रकोप पर अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने 4 सितंबर को स्पष्ट किया कि हालात कुछ हद तक स्थिर होते दिख रहे हैं, परंतु यह घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रकोप पूरी तरह काबू में आ गया है। 1 सितंबर तक देश में 6,250 कन्फर्म मामले और 3,039 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि मृत्यु दर 48.6 प्रतिशत बनी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
अफ्रीका सीडीसी के अधिकारी वेसम मंकौला ने एक ऑनलाइन प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हम पूरे प्रकोप को नियंत्रित करने में सफल हो गए हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले दो हफ्तों में मामलों की संख्या में कमी जरूर दिखी है, लेकिन यह गिरावट स्थायी है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी संभव नहीं।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 1,439 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 31 अगस्त तक 830 मरीज आइसोलेशन या इबोला उपचार केंद्रों में भर्ती थे।
प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति
इस प्रकोप ने डीआरसी के छह प्रांतों — इतुरी, नॉर्थ किवु, हौट-उएले, त्शोपो, साउथ किवु और बास-उएले — के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों को अपनी चपेट में लिया है। इनमें से चार स्वास्थ्य क्षेत्रों में 42 दिनों से अधिक समय से कोई नया मामला सामने नहीं आया है, और पाँच अन्य क्षेत्रों में 21 से 42 दिनों तक संक्रमण रुका हुआ है। हालाँकि, मंकौला के अनुसार 51 स्वास्थ्य क्षेत्रों में संक्रमण अभी भी सक्रिय है।
गौरतलब है कि इतुरी प्रांत इस महामारी का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहाँ देशभर के कुल कन्फर्म मामलों में से 81.9 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए हैं।
सामुदायिक मौतें: गंभीर चिंता
अफ्रीका सीडीसी ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि पिछले सात दिनों में दर्ज हुई मौतों में 60 प्रतिशत से अधिक मौतें अस्पतालों के बाहर, यानी समुदायों के भीतर हुई हैं। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में मरीज समय रहते उपचार केंद्र तक नहीं पहुँच पा रहे। यह स्थिति बीमारी की पहचान में देरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में आने वाली बाधाओं को उजागर करती है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने आगाह किया है कि इबोला वायरस का प्रसार राहत और नियंत्रण प्रयासों की तुलना में तेज़ी से हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब मई में घोषित यह प्रकोप पहले ही कांगो का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला महामारी बन चुका है। वैश्विक स्तर पर यह 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला प्रकोप के बाद दूसरी सबसे बड़ी महामारी है।
आगे क्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सामुदायिक स्तर पर निगरानी को मजबूत करना और उपचार केंद्रों तक पहुँच बढ़ाना अगले चरण की प्राथमिकता होगी। अफ्रीका सीडीसी ने संकेत दिया है कि जब तक सक्रिय स्वास्थ्य क्षेत्रों की संख्या में उल्लेखनीय कमी नहीं आती, प्रकोप को नियंत्रित मानना जोखिमपूर्ण होगा।