भूटान दौरे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने PM शेरिंग टोबगे से की लोकतांत्रिक मूल्यों पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 15 सितंबर 2026 को थिम्फू में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे से मुलाकात की और भारत-भूटान के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ आध्यात्मिकता व संस्कृति की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। यह मुलाकात भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम के अवसर पर हुई, जिसमें ज्ञानेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
मुख्य घटनाक्रम
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India / ECI) के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की यह तीन दिवसीय यात्रा भारत-भूटान के संस्थागत चुनावी सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। बैठक में दोनों पक्षों ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने में संस्कृति और आध्यात्मिकता के महत्व पर विशेष जोर दिया।
इससे पहले सोमवार, 15 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ने थिम्फू में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से भी शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात दोनों देशों के उच्चस्तरीय संबंधों को दर्शाती है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस में भागीदारी
पारो स्थित जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस और अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस समारोह में ज्ञानेश कुमार ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। इस अवसर पर उन्होंने भूटान के युवा मतदाताओं को संबोधित किया और उनमें लोकतांत्रिक चेतना जागृत करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो महत्वपूर्ण तकनीकी पहलों — इलेक्शन एंड रिजल्ट्स एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम और ई-लर्निंग कोर्स — का शुभारंभ किया। साथ ही लोकतंत्र रील प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए, जो युवाओं को डिजिटल माध्यम से लोकतंत्र से जोड़ने की एक नवाचारी पहल है।
संस्थागत सहयोग का महत्व
यात्रा से पहले जारी आधिकारिक वक्तव्य में स्पष्ट किया गया था कि यह दौरा भारत निर्वाचन आयोग और भूटान निर्वाचन आयोग के बीच संस्थागत साझेदारी को और गहरा करेगा। गौरतलब है कि भारत निर्वाचन आयोग समय-समय पर विभिन्न लोकतांत्रिक देशों के साथ चुनाव प्रबंधन के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा करता आया है।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने की आवश्यकता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोर दिया जा रहा है। भारत-भूटान का यह चुनावी सहयोग क्षेत्रीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
आगे की राह
इस यात्रा के ज़रिए दोनों देशों के निर्वाचन आयोगों के बीच चल रहे सहयोग को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। भविष्य में चुनाव प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों में द्विपक्षीय समन्वय और घनिष्ठ हो सकता है।