शुभांगी अत्रे की पर्यावरण पर चेतावनी: ‘प्रदूषण नहीं रुका तो दुनिया खो देगी अपनी खूबसूरती’
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री शुभांगी अत्रे ने विश्व पर्यावरण दिवस से पहले मुंबई में राष्ट्र प्रेस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में चेताया कि यदि इंसानों ने अपनी आदतों में बदलाव नहीं किया तो प्रकृति का संतुलन गंभीर रूप से बिगड़ सकता है और दुनिया अपनी ‘प्राकृतिक शांति और खूबसूरती’ खो देगी। ‘भाबीजी घर पर हैं’ फेम अभिनेत्री ने प्लास्टिक प्रदूषण, घटते जंगलों और बदलते मौसम चक्र को लेकर खुलकर अपनी चिंता जाहिर की।
प्रकृति से टूटता सामंजस्य
शुभांगी ने कहा, ‘‘आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि इंसान प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना भूल गया है। पहले लोग प्रकृति का उपयोग अपनी जरूरतों के अनुसार करते थे, लेकिन अब प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका असर धरती के हर हिस्से पर दिखाई देने लगा है।’’
उन्होंने जोड़ा कि इंसान अब सिर्फ संसाधनों का उपयोग नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें तेजी से खत्म भी कर रहा है। उनके अनुसार जंगल लगातार कम होते जा रहे हैं, जिसके चलते जानवरों का प्राकृतिक आवास छिन रहा है और कई प्रजातियाँ संकट में हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण ‘धीमा जहर’
अभिनेत्री ने प्लास्टिक प्रदूषण को सबसे गंभीर खतरा बताते हुए कहा, ‘‘प्लास्टिक ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे पूरी प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा है। यह धरती और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है, और इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन जीव-जंतुओं को होता है जो यह समझ ही नहीं पाते कि यह उनके लिए कितना खतरनाक है।’’
उन्होंने आगे कहा कि कई बार जानवर प्लास्टिक को भोजन समझकर खा लेते हैं, जिससे उनकी जान तक चली जाती है। उनके मुताबिक इसे कम करने के लिए लोगों को रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाना होगा।
बिगड़ता मौसम चक्र
शुभांगी ने बदलते मौसम पर भी चिंता जताते हुए कहा कि ‘कभी अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो कभी अचानक भारी बारिश हो जाती है — यह सब प्रकृति के असंतुलन का संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’ गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्से असामान्य मौसमी घटनाओं से जूझ रहे हैं।
छोटे प्रयासों की बड़ी भूमिका
अभिनेत्री ने कहा, ‘‘पर्यावरण की रक्षा रोजाना छोटे-छोटे प्रयासों से की जा सकती है। जब कोई व्यक्ति प्रकृति से जुड़ा रहता है, तो वह जीवनशैली के प्रति ज्यादा जिम्मेदार होता है।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति केवल पेड़-पौधों या नदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई है।
आगे क्या
5 जून को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस से पहले शुभांगी ने लोगों से अपील की कि वे अपनी तेज रफ्तार जिंदगी में कुछ समय प्रकृति को समझने और उसके महत्व को महसूस करने के लिए निकालें। उनके अनुसार, ‘‘अगर हम धरती, पेड़-पौधों, नदियों और जीव-जंतुओं की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति भी हमें सुरक्षित और संतुलित जीवन देती रहेगी।’’