25 अगस्त 2026
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जयपुर CA अभिषेक जैन पर FIR: ₹23,956 करोड़ के विदेशी लेनदेन में 3,168 फर्जी सर्टिफिकेट का आरोप

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जयपुर CA अभिषेक जैन पर FIR: ₹23,956 करोड़ के विदेशी लेनदेन में 3,168 फर्जी सर्टिफिकेट का आरोप

सारांश

जयपुर के CA अभिषेक जैन पर इनकम टैक्स विभाग की FIR — 3,168 फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट के ज़रिए कथित तौर पर ₹23,956 करोड़ विदेश भेजे गए। 40 संदिग्ध फर्मों और दो व्यक्तियों के नाम पर ₹18,563 करोड़ से अधिक के लेनदेन का ब्यौरा एफआईआर में दर्ज।

मुख्य बातें

इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर के CA अभिषेक जैन के खिलाफ 25 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज कराई।
आरोप है कि 3,168 फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट बिना उचित दस्तावेज़ जाँच के जारी किए गए।
इन सर्टिफिकेट के आधार पर कथित तौर पर ₹23,956 करोड़ वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच विदेश भेजे गए।
कथित लेनदेन में 40 संदिग्ध फर्मों, कंपनियों और ट्रस्टों की भूमिका बताई गई है।
एफआईआर में एक व्यक्ति के नाम ₹8,788 करोड़ और दूसरे के नाम ₹9,775 करोड़ के लेनदेन का उल्लेख।
बीएनएस धारा 318(4), 234, 229 और 35 के तहत मामला दर्ज; जाँच जारी।

इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन के खिलाफ 25 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि जैन ने आवश्यक दस्तावेज़ों की उचित जाँच किए बिना 3,168 फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट जारी किए, जिनके आधार पर कथित तौर पर ₹23,956 करोड़ विदेश भेजे गए। यह मामला वित्तीय वर्षों 2021-22, 2022-23 और 2023-24 से जुड़ा है।

मामला कैसे सामने आया

18 अगस्त को इनकम टैक्स विभाग की जाँच शाखा ने जयपुर के पत्रकार कॉलोनी स्थित सीए अभिषेक जैन के कार्यालय का सर्वे किया। सर्वे के दौरान जब्त दस्तावेज़ों में विदेशी लेनदेन से संबंधित फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट का विस्तृत ब्यौरा मिला, जिसने विभाग की आशंकाओं को बल दिया।

सर्वे के बाद इनकम टैक्स विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मिंटू लाल मीणा ने पत्रकार कॉलोनी थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

आरोपों का ब्यौरा

शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर लगभग 40 फर्मों, कंपनियों और ट्रस्टों के माध्यम से यह विदेशी राशि भेजी गई, जिन्हें विभाग ने संदिग्ध या फर्जी बताया है। इनमें से कुछ संस्थाओं ने इनकम टैक्स रिटर्न तक दाखिल नहीं किया था, और उनकी कोई उल्लेखनीय व्यावसायिक गतिविधि या आय भी नहीं थी।

एफआईआर में विशेष रूप से उल्लेख है कि एक व्यक्ति के नाम पर कथित तौर पर ₹8,788 करोड़ और दूसरे व्यक्ति के नाम पर ₹9,775 करोड़ के लेनदेन हुए। विभाग ने एग्रीमेंट, बैंक खाता दस्तावेज़, टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट और फॉर्म 10एफ के सत्यापन में गंभीर खामियाँ बताई हैं।

फॉर्म 15सीबी क्या होता है

फॉर्म 15सीबी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी किया जाने वाला आधिकारिक प्रमाण पत्र है, जो भारत से विदेश में धन भेजने की प्रक्रिया में टैक्स और टीडीएस की स्थिति को सत्यापित करता है। इसे जारी करने से पहले सीए की यह जिम्मेदारी होती है कि वह लेनदेन से जुड़े सभी वित्तीय दस्तावेज़ों की पूरी जाँच करे। आरोप है कि इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

कानूनी धाराएँ और आगे की जाँच

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 234, 229 और 35 लगाई गई हैं। पुलिस अब बैंक खातों, विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड, फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट और संबंधित कंपनियों के दस्तावेज़ों की विस्तृत जाँच करेगी।

जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाएँगी कि लेनदेन शुरू करने वाले व्यक्तियों और किसी बिचौलिए की इसमें क्या भूमिका थी। यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि ये सभी आरोप अभी शिकायत में दर्ज हैं और जाँच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इनकी पुष्टि हो सकेगी। सीए अभिषेक जैन को एफआईआर में मुख्य आरोपी बनाया गया है और जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

956 करोड़ का यह कथित लेनदेन महज एक सीए की चूक नहीं, बल्कि फॉर्म 15सीबी प्रणाली की संरचनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है — जहाँ एक व्यक्ति हज़ारों सर्टिफिकेट जारी कर सकता है और तंत्र वर्षों तक अनजान रहता है। यह ऐसे समय में आया है जब ED और IT विभाग हवाला और शेल-कंपनी नेटवर्क पर शिकंजा कस रहे हैं, फिर भी पेशेवर सर्टिफिकेशन की निगरानी में स्पष्ट खाली जगह है। असली सवाल यह है कि क्या ICAI के पास ऐसे रियल-टाइम अलर्ट तंत्र हैं जो किसी एक CA द्वारा असामान्य संख्या में सर्टिफिकेट जारी होने पर सक्रिय हों — और यदि नहीं, तो यह मामला नीतिगत बदलाव की माँग करता है, न केवल व्यक्तिगत अभियोजन की।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर CA अभिषेक जैन पर क्या आरोप हैं?
CA अभिषेक जैन पर आरोप है कि उन्होंने आवश्यक दस्तावेज़ों की उचित जाँच किए बिना 3,168 फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट जारी किए, जिनके आधार पर कथित तौर पर ₹23,956 करोड़ विदेश भेजे गए। ये आरोप इनकम टैक्स विभाग की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में हैं और अभी जाँच के अधीन हैं।
फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट क्या होता है और इसका दुरुपयोग कैसे होता है?
फॉर्म 15सीबी एक CA द्वारा जारी प्रमाण पत्र है जो भारत से विदेश धन भेजने पर टैक्स और टीडीएस की स्थिति सत्यापित करता है। इसके दुरुपयोग का आरोप तब लगता है जब सर्टिफिकेट बिना वास्तविक व्यावसायिक आधार या दस्तावेज़ जाँच के जारी किए जाएँ, जिससे संदिग्ध विदेशी लेनदेन को वैध आवरण मिल जाता है।
इस मामले में किन कानूनी धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई है?
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 234, 229 और 35 के तहत दर्ज की गई है। पत्रकार कॉलोनी थाने में इनकम टैक्स विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मिंटू लाल मीणा की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई।
कथित विदेशी लेनदेन किन वित्तीय वर्षों में हुआ?
एफआईआर के अनुसार यह कथित लेनदेन वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान हुआ। इस दौरान 40 से अधिक संदिग्ध फर्मों और संस्थाओं के माध्यम से राशि विदेश भेजी गई बताई गई है।
आगे की जाँच में क्या देखा जाएगा?
पुलिस और जाँच एजेंसियाँ बैंक खातों, विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड, फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट और संबंधित कंपनियों के दस्तावेज़ों की जाँच करेंगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या यह मामला किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा है या केवल सर्टिफिकेट जारी करने तक सीमित था।
राष्ट्र प्रेस
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