रीट पेपर लीक: मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अमित शाह को पत्र लिखकर CBI-ED जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार में मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 28 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राजस्थान में 2021 रीट पेपर लीक सहित कथित परीक्षा घोटालों की CBI और ED से तत्काल जांच कराने की मांग की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म है।
पत्र में किन पर लगे आरोप
मंत्री मीणा ने अपने पत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अधिकारियों, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व अधिकारियों और राजीव गांधी स्टडी सर्कल से जुड़े व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मीणा का आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकार के पाँच वर्षीय कार्यकाल में आयोजित 18 बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से 17 के प्रश्नपत्र कथित तौर पर सुनियोजित ढंग से लीक हुए। उन्होंने इसे बेरोज़गार युवाओं के भविष्य के साथ 'संस्थागत छेड़छाड़' (इंस्टीट्यूशनल मैनिपुलेशन) करार दिया।
₹40 करोड़ और सीकर कनेक्शन का दावा
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि एक अनाम पूर्व कांग्रेस मंत्री ने कथित पेपर लीक सिंडिकेट के ज़रिये लगभग ₹40 करोड़ अर्जित किए, जिनका उपयोग कथित तौर पर सीकर में उनके पुत्र की राजनीतिक और व्यक्तिगत परियोजनाओं को वित्तपोषित करने में किया गया। हालाँकि, पत्र में उस पूर्व मंत्री का नाम उजागर नहीं किया गया है।
प्रिंटिंग प्रेस और प्रक्रिया उल्लंघन के आरोप
मीणा ने रीट-2021 परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री, RPSC अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में कोलकाता की सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को प्रश्नपत्र मुद्रण का ठेका देते समय निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया। उनका दावा है कि यह प्रिंटिंग प्रेस इतने गोपनीय कार्य के लिए अधिकृत नहीं थी, फिर भी नियमों को दरकिनार कर उसे लगातार दूसरी बार अनुबंध दिया गया।
राजीव गांधी स्टडी सर्कल पर आरोप
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि राजीव गांधी स्टडी सर्कल की स्थापना कथित तौर पर सोनिया गांधी के निर्देश पर हुई थी और इसके वरिष्ठ पदाधिकारियों के कांग्रेस नेतृत्व से सीधे संबंध थे। मीणा का आरोप है कि रीट-2021 सहित अनेक पेपर लीक मामलों की जड़ें इस संगठन से जुड़े व्यक्तियों तक पहुँचती हैं। गौरतलब है कि ये आरोप मंत्री मीणा की ओर से लगाए गए हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
ED जांच और आगे की माँग
मीणा ने पत्र में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया, जबकि उनके अनुसार पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि वे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले पर मिल चुके हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश के बाद ही मामला ED को सौंपा गया था। अब उन्होंने गृह मंत्री शाह से ED और CBI को कथित पेपर लीक सिंडिकेट के मास्टरमाइंड की तत्काल जांच के निर्देश देने की अपील की है। दस्तावेज़, फोटोग्राफ और अन्य साक्ष्यों वाला एक डोज़ियर केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपा जा चुका है।