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पेपर लीक विधेयक पर अरुण चतुर्वेदी का कांग्रेस को करारा जवाब: 'पहले अपने शासनकाल का हिसाब दो'

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पेपर लीक विधेयक पर अरुण चतुर्वेदी का कांग्रेस को करारा जवाब: 'पहले अपने शासनकाल का हिसाब दो'

सारांश

BJP के वरिष्ठ नेता डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने पेपर लीक विधेयक पर कांग्रेस के विरोध को 'दोहरा रवैया' करार दिया — याद दिलाया कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान रीट और एसआई भर्ती जैसे पेपर लीक में 70 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे। नए विधेयक में 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान है।

मुख्य बातें

अरुण चतुर्वेदी (राजस्थान वित्त आयोग अध्यक्ष, BJP) ने 24 जुलाई को जयपुर में पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रीट और एसआई भर्ती पेपर लीक से करीब 70 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना प्रस्तावित है।
चतुर्वेदी ने राहुल गांधी , अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा से अपने शासनकाल की घटनाओं का जवाब माँगा।
उन्होंने कांग्रेस पर जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान अनुपस्थित रहने और बाद में राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।

राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने 24 जुलाई को जयपुर में पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्तुत नया विधेयक पूरी तरह छात्रों के हित में है और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। उनके अनुसार, कांग्रेस इस संवेदनशील विषय पर दोहरा रवैया अपनाते हुए राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस शासनकाल पर सवाल

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा, "कांग्रेस नेताओं — राहुल गांधी, अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा — को पहले अपने शासनकाल की घटनाओं का जवाब देना चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रीट (राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा) और सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे कथित तौर पर लगभग 70 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय राज्य सरकार ने जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय परीक्षा बोर्ड पर दोष मढ़ने का प्रयास किया था।

संसदीय चर्चा की अपील

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है और यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों के प्रति गंभीर है, तो उसे सदन में सार्थक बहस में भाग लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि "बेबुनियाद माँगें उठाने और संसद की कार्यवाही बाधित करने से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।" उनके अनुसार, विधायी मार्ग ही इस संकट का स्थायी हल है।

जंतर-मंतर आंदोलन और कांग्रेस की भूमिका

BJP नेता ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र धरने के दौरान कांग्रेस नेतृत्व की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब यह आंदोलन चल रहा था, तब कांग्रेस के बड़े नेता वहाँ मौजूद नहीं थे और राहुल गांधी उस समय विदेश में थे। उनका आरोप है कि जब आंदोलन को व्यापक जन-समर्थन मिलने लगा, तभी कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की कोशिश शुरू की।

प्रस्तावित कानून में क्या है

डॉ. चतुर्वेदी ने प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ भी पेपर लीक की घटनाएँ सामने आईं, केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कराई, जाँच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी और पारदर्शी तरीके से पुनः परीक्षा आयोजित कराई।

आगे की राह

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि पेपर लीक पर प्रभावी अंकुश के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार, "छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है।" यह विधेयक परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि प्रस्तावित कानून में स्वतंत्र जाँच तंत्र और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी। कठोर सजा का प्रावधान तभी कारगर होगा जब अभियोजन की दर भी उतनी ही मज़बूत हो।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस से क्या जवाब माँगा?
डॉ. चतुर्वेदी ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा से राजस्थान में उनके शासनकाल के दौरान हुए रीट और एसआई भर्ती पेपर लीक का जवाब माँगा, जिनसे कथित तौर पर 70 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। उनका कहना है कि जो पार्टी खुद इस समस्या की जिम्मेदार रही, वह अब राजनीतिक लाभ के लिए इसे मुद्दा नहीं बना सकती।
पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 10 वर्ष तक की कैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, यह कानून परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
राजस्थान में कांग्रेस के शासनकाल में कौन-कौन से पेपर लीक हुए?
BJP नेता डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान रीट (राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा) और सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। इन घटनाओं से कथित तौर पर लगभग 70 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए बताए जाते हैं।
जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कांग्रेस की क्या भूमिका रही?
डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, जंतर-मंतर पर छात्र धरने के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता वहाँ उपस्थित नहीं थे और राहुल गांधी उस समय विदेश में थे। उनका आरोप है कि जब आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला, तब कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की कोशिश शुरू की।
केंद्र सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं पर अब तक क्या कदम उठाए हैं?
डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, जहाँ भी पेपर लीक की घटनाएँ सामने आईं, केंद्र सरकार ने परीक्षा तत्काल रद्द कराई, जाँच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी और पारदर्शी तरीके से पुनः परीक्षा आयोजित कराई। अब नए विधेयक के ज़रिये इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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