पेपर लीक विरोधी केंद्रीय विधेयक राजस्थान कानून से कमज़ोर: कांग्रेस नेता टीकाराम जूली
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने 30 जुलाई को जयपुर में केंद्र सरकार के पेपर लीक विरोधी विधेयक को राजस्थान के मौजूदा कानून की तुलना में कमज़ोर करार दिया। साथ ही उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक जवाबदेही की माँग की।
दोनों कानूनों की तुलना
जूली ने कहा कि राजस्थान का पेपर लीक विरोधी कानून — जो कांग्रेस के शासनकाल में बनाया गया था — केंद्रीय विधेयक से 'कई गुना मज़बूत' है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के कानून में ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और आजीवन कारावास का प्रावधान है, जबकि केंद्र के विधेयक में अधिकतम 10 साल की सज़ा का उल्लेख है।
यह तुलना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब NEET और UGC-NET परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो चुके हैं। गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवाल अब सीधे कानूनी ढाँचे की पर्याप्तता की बहस में तब्दील हो गए हैं।
सीकर मामला और सीबीआई का हस्तांतरण
जूली ने सीकर के पेपर लीक मामले का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में सख्त कानून होने के कारण वह मुकदमा राज्य में दर्ज नहीं हुआ और इसे सीधे सीबीआई को सौंप दिया गया। उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि केंद्रीय विधेयक तुलनात्मक रूप से कमज़ोर है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का वादा किया, लेकिन पहली सुनवाई की तारीख पर ही सीबीआई का वकील उपस्थित नहीं हुआ — जिसे उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का आधार बताया।
छात्रों पर बल प्रयोग का आरोप
जूली ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने पूछा कि यह आदेश किसने दिया और केंद्रीय गृह मंत्री लोकसभा में जवाब देने क्यों नहीं आए। उनका कहना था, 'क्या गृह मंत्री की ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह बच्चों से माफी माँगें?'
आलोचकों का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जाँच अब तक नहीं हुई है, जो लोकतांत्रिक जवाबदेही की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।
संसद में विपक्ष की आवाज़
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सदन में राहुल गांधी को छात्रों के मुद्दे पर बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश और युवाओं की आवाज़ हैं और सरकार को उनके सवालों का जवाब देना होगा।
यह घटनाक्रम संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ते टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जहाँ परीक्षा घोटाला और छात्र आंदोलन प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बन चुके हैं।
आगे क्या
विपक्ष के दबाव और न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जाँच जारी है। कांग्रेस ने माँग की है कि केंद्र सरकार या तो अपने विधेयक को राजस्थान कानून की तर्ज पर कड़ा करे या राज्य के कानूनी ढाँचे को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए। छात्र संगठनों ने भी संकेत दिए हैं कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।