30 जुलाई 2026
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पेपर लीक विरोधी केंद्रीय विधेयक राजस्थान कानून से कमज़ोर: कांग्रेस नेता टीकाराम जूली

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पेपर लीक विरोधी केंद्रीय विधेयक राजस्थान कानून से कमज़ोर: कांग्रेस नेता टीकाराम जूली

सारांश

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने केंद्र के पेपर लीक विरोधी विधेयक को राजस्थान के कानून से कमज़ोर बताया — जहाँ आजीवन कारावास और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है, बनाम केंद्र का 10 साल का प्रावधान। साथ ही छात्रों पर पैलेट गन के आरोपों पर गृह मंत्री से जवाब माँगा।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने 30 जुलाई को केंद्र के पेपर लीक विरोधी विधेयक को राजस्थान के कानून से 'कमज़ोर' करार दिया।
राजस्थान कानून में आजीवन कारावास और ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक जुर्माना; केंद्रीय विधेयक में अधिकतम 10 साल की सज़ा।
सीकर पेपर लीक मामला राजस्थान में दर्ज न होकर सीबीआई को सौंपा गया — जूली ने इसे केंद्रीय कानून की कमज़ोरी का प्रमाण बताया।
जूली ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और एके-47 चलाई गई; केंद्रीय गृह मंत्री से लोकसभा में जवाब माँगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सदन में राहुल गांधी को छात्र मुद्दे पर बोलने से रोका जा रहा है।

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने 30 जुलाई को जयपुर में केंद्र सरकार के पेपर लीक विरोधी विधेयक को राजस्थान के मौजूदा कानून की तुलना में कमज़ोर करार दिया। साथ ही उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक जवाबदेही की माँग की।

दोनों कानूनों की तुलना

जूली ने कहा कि राजस्थान का पेपर लीक विरोधी कानून — जो कांग्रेस के शासनकाल में बनाया गया था — केंद्रीय विधेयक से 'कई गुना मज़बूत' है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के कानून में ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और आजीवन कारावास का प्रावधान है, जबकि केंद्र के विधेयक में अधिकतम 10 साल की सज़ा का उल्लेख है।

यह तुलना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब NEET और UGC-NET परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हो चुके हैं। गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवाल अब सीधे कानूनी ढाँचे की पर्याप्तता की बहस में तब्दील हो गए हैं।

सीकर मामला और सीबीआई का हस्तांतरण

जूली ने सीकर के पेपर लीक मामले का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में सख्त कानून होने के कारण वह मुकदमा राज्य में दर्ज नहीं हुआ और इसे सीधे सीबीआई को सौंप दिया गया। उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि केंद्रीय विधेयक तुलनात्मक रूप से कमज़ोर है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का वादा किया, लेकिन पहली सुनवाई की तारीख पर ही सीबीआई का वकील उपस्थित नहीं हुआ — जिसे उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का आधार बताया।

छात्रों पर बल प्रयोग का आरोप

जूली ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने पूछा कि यह आदेश किसने दिया और केंद्रीय गृह मंत्री लोकसभा में जवाब देने क्यों नहीं आए। उनका कहना था, 'क्या गृह मंत्री की ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह बच्चों से माफी माँगें?'

आलोचकों का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जाँच अब तक नहीं हुई है, जो लोकतांत्रिक जवाबदेही की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।

संसद में विपक्ष की आवाज़

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सदन में राहुल गांधी को छात्रों के मुद्दे पर बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश और युवाओं की आवाज़ हैं और सरकार को उनके सवालों का जवाब देना होगा।

यह घटनाक्रम संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ते टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जहाँ परीक्षा घोटाला और छात्र आंदोलन प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बन चुके हैं।

आगे क्या

विपक्ष के दबाव और न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जाँच जारी है। कांग्रेस ने माँग की है कि केंद्र सरकार या तो अपने विधेयक को राजस्थान कानून की तर्ज पर कड़ा करे या राज्य के कानूनी ढाँचे को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए। छात्र संगठनों ने भी संकेत दिए हैं कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सीकर मामले का सीबीआई को हस्तांतरण इस असमानता का व्यावहारिक परिणाम दिखाता है। लेकिन यह बहस केवल सज़ा की मात्रा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — असली सवाल यह है कि किसी भी कानून के तहत अब तक कितने दोष सिद्ध हुए हैं। छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 के आरोप गंभीर हैं और स्वतंत्र जाँच की माँग करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस पहलू को राजनीतिक बयानबाज़ी में दबा देती है। विपक्ष की असली परीक्षा यह होगी कि वह इन आरोपों को संसद में साक्ष्य-सहित उठाए, न कि केवल प्रेस वार्ता तक सीमित रखे।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र का पेपर लीक विरोधी विधेयक राजस्थान के कानून से कैसे अलग है?
केंद्रीय विधेयक में अधिकतम 10 साल के कारावास का प्रावधान है, जबकि राजस्थान के कानून में आजीवन कारावास और ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक के जुर्माने की व्यवस्था है। कांग्रेस नेता टीकाराम जूली के अनुसार यही कारण है कि सीकर पेपर लीक मामला राजस्थान में दर्ज न होकर सीबीआई को सौंपा गया।
टीकाराम जूली ने गृह मंत्री से जवाब क्यों माँगा?
जूली ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल किया गया और इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री लोकसभा में जवाब देने नहीं आए, जो उनकी ज़िम्मेदारी से पलायन है।
सीकर पेपर लीक मामला सीबीआई को क्यों सौंपा गया?
जूली के अनुसार राजस्थान में पेपर लीक के विरुद्ध सख्त कानून होने के कारण वहाँ मुकदमा दर्ज करना कठिन था, इसलिए मामला सीबीआई को हस्तांतरित किया गया। उन्होंने इसे केंद्रीय कानून की तुलनात्मक कमज़ोरी का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया।
क्या केंद्र सरकार ने पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट का वादा किया था?
जूली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का वादा किया था, लेकिन पहली सुनवाई की तारीख पर सीबीआई का वकील अनुपस्थित रहा। उन्होंने इसे सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने का आधार बताया।
राहुल गांधी को संसद में बोलने से क्यों रोका जा रहा है?
कांग्रेस नेता जूली ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को सदन में छात्रों के मुद्दे पर बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश और युवाओं की आवाज़ हैं और सरकार को उनके सवालों का जवाब देना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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