31 जुलाई 2026
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पेपर लीक कानून पर खाचरियावास का केंद्र पर हमला: 'राजस्थान का सख्त कानून अपनाए BJP सरकार'

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पेपर लीक कानून पर खाचरियावास का केंद्र पर हमला: 'राजस्थान का सख्त कानून अपनाए BJP सरकार'

सारांश

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने केंद्र के पेपर लीक कानून को 'अधूरा' बताते हुए BJP से राजस्थान का सख्त कानून अपनाने की माँग की। उनका कहना है कि नया कानून लाखों प्रभावित युवाओं के रोज़गार और भविष्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने 31 जुलाई को जयपुर में केंद्र के पेपर लीक कानून को 'अधूरा' करार दिया।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार का पेपर लीक विरोधी कानून केंद्र के कानून से अधिक सख्त और प्रभावी था।
खाचरियावास के अनुसार, केंद्र का कानून लाखों युवाओं के रोज़गार और परीक्षा विश्वसनीयता के मुद्दों का समाधान नहीं करता।
BJP पर आरोप लगाया कि पार्टी हिंदुत्व की राजनीति करते हुए आम हिंदू परिवारों के हितों की अनदेखी करती है।
उन्होंने कहा कि देशहित को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने 31 जुलाई को जयपुर में केंद्र सरकार के नए पेपर लीक कानून को 'अधूरा' करार दिया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उनका कहना था कि यदि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को वास्तव में पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना चाहती है, तो उसे राजस्थान में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए कड़े पेपर लीक विरोधी कानून को आदर्श मानकर चलना चाहिए था।

राजस्थान के कानून से सीख लेने की अपील

खाचरियावास ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक के विरुद्ध जो कानून बनाया गया, उसमें कड़ी आर्थिक सजा और कठोर दंडात्मक प्रावधान शामिल थे। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने उसकी तुलना में एक कमज़ोर व्यवस्था लागू की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल को अच्छे कानून या नीतियाँ अपनाने में प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए — "यदि कांग्रेस ने कोई अच्छा कानून बनाया है तो BJP उसे लागू करे, और यदि BJP की कोई अच्छी नीति हो तो कांग्रेस भी उसे स्वीकार करने में पीछे नहीं रहेगी।" उन्होंने जोर दिया कि देशहित सर्वोपरि होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा।

युवाओं के भविष्य पर केंद्रित चिंता

खाचरियावास ने आरोप लगाया कि केंद्र का नया पेपर लीक कानून केवल अपराध को परिभाषित करने तक सीमित है, लेकिन उन लाखों युवाओं की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं देता जिनका भविष्य इन घटनाओं से प्रभावित होता है। उनके अनुसार, कानून में परीक्षाओं की विश्वसनीयता, रोज़गार की सुरक्षा और प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के रोज़गार और भविष्य की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

हिंदुत्व की राजनीति पर तंज

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि देश में जब भी लाठीचार्ज या गोलीबारी जैसी घटनाएँ होती हैं, उनका सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। उनके अनुसार, देश की बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं की है और ऐसी घटनाओं में प्रभावित होने वाले भी अधिकांश हिंदू परिवारों से होते हैं। पैलेट गन से घायल होने वाले बच्चों में भी अधिकांश हिंदू परिवारों के बच्चे हैं। उन्होंने BJP पर तंज कसते हुए कहा कि एक ओर पार्टी हिंदुत्व की राजनीति करती है, दूसरी ओर आम हिंदू परिवारों को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मुखर नेताओं की चुप्पी पर सवाल

खाचरियावास ने यह भी आरोप लगाया कि जो नेता सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर मुखर रहते हैं, वे युवाओं से जुड़े इस आंदोलन और पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य और रोज़गार के सवाल पर सभी वर्गों को खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।

आगे का परिदृश्य

पेपर लीक का मुद्दा और धर्मेंद्र प्रधान से जुड़ा विवाद राष्ट्रीय राजनीति में गर्म बना हुआ है। विपक्ष के इस दबाव के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार अपने कानून में संशोधन करती है या युवाओं की माँगों पर कोई अन्य ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह माँग तब और वजनदार होती जब वे राजस्थान के अपने कानून के ठोस परिणाम — जैसे दोषसिद्धि दर या परीक्षा पुनर्परीक्षण की संख्या — आँकड़ों के साथ रखते। पेपर लीक का मुद्दा किसी एक दल की विफलता नहीं है; राजस्थान सहित कई राज्यों में, चाहे जो भी सत्ता में रहा हो, परीक्षा घोटाले हुए हैं। असली सवाल यह है कि कोई भी सरकार — केंद्र या राज्य — भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी लाने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रताप सिंह खाचरियावास ने केंद्र के पेपर लीक कानून को अधूरा क्यों बताया?
खाचरियावास का कहना है कि केंद्र का नया पेपर लीक कानून केवल अपराध को परिभाषित करता है, लेकिन प्रभावित युवाओं के रोज़गार, परीक्षाओं की विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों के हितों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं करता। उनके अनुसार, राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार का कानून इस मामले में अधिक व्यापक और सख्त था।
राजस्थान का पेपर लीक कानून केंद्र के कानून से कैसे अलग है?
खाचरियावास के अनुसार, राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए कानून में कड़ी आर्थिक सजा और कठोर दंडात्मक प्रावधान शामिल थे, जबकि केंद्र सरकार ने उससे कमज़ोर व्यवस्था लागू की है। हालाँकि, दोनों कानूनों की विस्तृत तुलना के लिए आधिकारिक दस्तावेज़ देखना आवश्यक होगा।
पेपर लीक विवाद में धर्मेंद्र प्रधान का नाम क्यों आया?
कांग्रेस नेता खाचरियावास ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए BJP पर हमला बोला। यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
पेपर लीक से युवाओं पर क्या असर पड़ता है?
पेपर लीक की घटनाओं से लाखों युवा अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है — परीक्षाएँ रद्द होती हैं, पुनर्परीक्षा का बोझ बढ़ता है और रोज़गार में देरी होती है। खाचरियावास ने कहा कि कानून में इन युवाओं के हितों की रक्षा के लिए ठोस प्रावधान होने चाहिए।
खाचरियावास ने BJP की हिंदुत्व राजनीति पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि BJP हिंदुत्व की राजनीति करती है, लेकिन लाठीचार्ज, गोलीबारी और पैलेट गन जैसी घटनाओं में सबसे अधिक नुकसान आम हिंदू परिवारों को उठाना पड़ता है। उनके अनुसार, यह विरोधाभास BJP की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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