कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं, सदन में हंगामा सिर्फ राजनीति : किरण चौधरी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी ने 27 जुलाई को चंडीगढ़ में कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है और उसके पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उनका यह बयान उस वक्त आया जब संसद में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किए जाने पर विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा कर सदन की कार्यवाही बाधित की।
किरण चौधरी का कांग्रेस पर सीधा हमला
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत में किरण चौधरी ने कहा, 'कांग्रेस शून्य हो चुकी है। इनके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। वे सिर्फ राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं और सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद कर रहे हैं।' उन्होंने विपक्ष के हंगामे को संसदीय प्रक्रिया की अवमानना करार दिया।
पेपर लीक माफिया पर कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत
किरण चौधरी ने पेपर लीक की समस्या को छात्रों के लिए गंभीर संकट बताया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत के बाद अगर परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है, तो विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है, अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है। उन्होंने इसे एक संगठित माफिया गिरोह का काम बताते हुए कहा कि इसकी जड़ें वर्षों से मज़बूत होती रही हैं और अब तक इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई थी।
नए विधेयक में ₹10 करोड़ जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा
किरण चौधरी ने सरकार द्वारा लाए जा रहे संशोधन विधेयक का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस कानून में ₹10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने और 5 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। साथ ही परीक्षाओं के बेहतर आयोजन की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने बताया कि इस ज़िम्मेदारी को नंदन नीलेकणि को सौंपा गया है और उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में छात्रों को इस तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
सरकार की उपलब्धियों पर ज़ोर
किरण चौधरी ने सरकार की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 370 हटाई जा चुकी है, राम मंदिर का निर्माण हो चुका है और यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) को नए सिरे से बदला गया है ताकि अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई हो सके। संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के कंधों पर टिका है और सरकार इसी को ध्यान में रखकर काम कर रही है।
आगे क्या
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक संसद में पेश हो चुका है और इस पर चर्चा जारी रहने की उम्मीद है। विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार इस विधेयक को शीघ्र पारित कराने के पक्ष में है। नंदन नीलेकणि की अगुआई में परीक्षा प्रणाली में सुधार की रूपरेखा तैयार होने के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी।