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पेपर लीक विरोधी बिल पर सीजेपी का सवाल: सजा नहीं, रोकथाम पर हो चर्चा

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पेपर लीक विरोधी बिल पर सीजेपी का सवाल: सजा नहीं, रोकथाम पर हो चर्चा

सारांश

संसद में पेपर लीक विरोधी बिल पास होते ही सीजेपी ने सवाल दागा — सजा के प्रावधान तो हैं, लेकिन लीक रोकने की व्यवस्था कहाँ है? NTA सुधार, डिजिटल ऑडिटिंग और कोचिंग नियमन की 5 सूत्रीय माँग के साथ पार्टी ने सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 29 जुलाई को संसद में पारित पेपर लीक विरोधी विधेयक की खामियाँ गिनाईं।
रांका का आरोप — बिल केवल लीक के बाद की कार्रवाई पर केंद्रित है, रोकथाम पर कोई ठोस प्रावधान नहीं।
5 सूत्रीय माँग : NTA सुधार, परीक्षा कैलेंडर में पारदर्शिता, पाठ्यक्रम पारदर्शिता, कोचिंग सेंटर नियमन और डिजिटल ऑडिटिंग ।
सरकार से अपील — छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही नीति बनाए।
पेपर लीक की घटनाएँ देशभर में कई वर्षों से जारी हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का परीक्षा तंत्र पर भरोसा कमज़ोर हुआ है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 29 जुलाई को संसद में पारित पेपर लीक विरोधी विधेयक पर तीखे सवाल उठाए और सरकार से माँग की कि केवल दंड और जुर्माने की व्यवस्था तक सीमित न रहकर परीक्षा प्रणाली में लीक को जड़ से रोकने के लिए ठोस संरचनात्मक सुधारों पर संसद में बहस हो। रांका ने कहा कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर है और जल्दबाज़ी में लिए गए फैसले समस्या का स्थायी समाधान नहीं दे सकते।

विधेयक में क्या कमी बताई

रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा, 'संसद में जो बिल पास हुआ है उसमें एक बड़ी कमी है। आप पेपर लीक होने के बाद की सारी बातें कर रहे हैं — चाहे वो फास्ट ट्रैक कोर्ट हों, सजा या जुर्माना हो — लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है, इसके बारे में आज भी कोई बात नहीं हुई।' उनके अनुसार विधेयक की पूरी बुनावट प्रतिक्रियात्मक है, निवारक नहीं।

पाँच सूत्रीय माँग

सीजेपी प्रवक्ता ने 5 सूत्रीय माँग चार्टर का हवाला देते हुए कहा कि जब तक निम्नलिखित बिंदुओं पर काम नहीं होगा, पेपर लीक की घटनाएँ नहीं रुकेंगी:

पहला, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार; दूसरा, परीक्षा शेड्यूल और कैलेंडर में पारदर्शिता; तीसरा, पाठ्यक्रम में पारदर्शिता; चौथा, कोचिंग सेंटरों पर नियमन; और पाँचवाँ, डिजिटल ऑडिटिंग सहित संपूर्ण परीक्षा अवसंरचना की एंड-टू-एंड समीक्षा। उन्होंने कहा कि जब तक इन पाँचों मोर्चों पर ठोस काम नहीं होगा, तब तक पेपर लीक की समस्या का हल संभव नहीं।

विशेषज्ञों से संवाद की अपील

रांका ने सरकार से अपील की कि वह छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों सहित सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श करे। उन्होंने कहा, 'सरकार जल्दबाज़ी में फैसले न ले, क्योंकि यह देश के बच्चों के भविष्य का सवाल है।' उनका तर्क है कि बिना विशेषज्ञ इनपुट के बना कानून परीक्षा तंत्र की जटिल खामियों को दूर नहीं कर सकता।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज है। गौरतलब है कि पेपर लीक की घटनाएँ पिछले कई वर्षों में विभिन्न राज्यों में सामने आती रही हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर डगमगाया है। आलोचकों का कहना है कि महज़ दंडात्मक प्रावधान तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से मज़बूत नहीं किया जाता।

आगे क्या

सीजेपी ने सरकार को अपना पाँच-पॉइंटर माँग चार्टर सौंपने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्षी दलों और विशेषज्ञों की इन आपत्तियों पर संसद के भीतर या बाहर कोई संवाद शुरू करती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सीजेपी की आपत्ति उस बुनियादी खामी की ओर इशारा करती है जो अक्सर भारतीय नीति-निर्माण में दिखती है — दंड को समाधान मान लेना। NTA जैसी संस्था की प्रशासनिक कमज़ोरियाँ और परीक्षा अवसंरचना की तकनीकी खामियाँ वर्षों से उजागर होती रही हैं, फिर भी हर बार प्रतिक्रियात्मक कानून बनाकर काम चलाया गया। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार विशेषज्ञ परामर्श और डिजिटल ऑडिट जैसे निवारक उपायों को कानूनी ढाँचे में शामिल करने की इच्छाशक्ति दिखाती है — वरना यह बिल भी उन नीतियों की सूची में जुड़ जाएगा जो सुर्खियाँ तो बनाती हैं, पर ज़मीन पर बदलाव नहीं लातीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी ने पेपर लीक विरोधी बिल पर क्या आपत्ति जताई?
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि बिल केवल पेपर लीक होने के बाद की कार्रवाई — जैसे फास्ट ट्रैक कोर्ट, सजा और जुर्माना — पर केंद्रित है, जबकि लीक को रोकने के लिए कोई ठोस संरचनात्मक प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि यह दृष्टिकोण समस्या की जड़ पर प्रहार नहीं करता।
सीजेपी की 5 सूत्रीय माँग क्या है?
सीजेपी ने NTA में सुधार, परीक्षा शेड्यूल और पाठ्यक्रम में पारदर्शिता, कोचिंग सेंटरों पर नियमन, डिजिटल ऑडिटिंग और संपूर्ण परीक्षा अवसंरचना की एंड-टू-एंड समीक्षा की माँग की है। पार्टी ने यह माँग चार्टर सरकार को सौंपने की बात कही है।
पेपर लीक रोकने के लिए सरकार से क्या अपील की गई?
रांका ने सरकार से अपील की कि वह छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श करे और जल्दबाज़ी में फैसले न ले। उनका तर्क है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े फैसले सोच-समझकर और विशेषज्ञ राय के आधार पर लिए जाने चाहिए।
NTA सुधार की माँग क्यों उठाई जा रही है?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर NEET सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि NTA की प्रशासनिक और तकनीकी कमज़ोरियाँ पेपर लीक की मूल वजह हैं, इसलिए संस्था में संरचनात्मक बदलाव ज़रूरी हैं।
पेपर लीक विरोधी बिल में क्या प्रावधान हैं?
संसद में पारित इस विधेयक में पेपर लीक के दोषियों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। हालाँकि, विपक्षी दलों का कहना है कि बिल लीक होने के बाद की कार्रवाई पर तो ध्यान देता है, लेकिन लीक रोकने के निवारक उपायों का अभाव है।
राष्ट्र प्रेस
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