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पेपर लीक रोकने के लिए मायावती बोलीं: सख्त कानून नहीं, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव जरूरी

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पेपर लीक रोकने के लिए मायावती बोलीं: सख्त कानून नहीं, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव जरूरी

सारांश

लोकसभा में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने के बाद BSP प्रमुख मायावती ने कहा कि सख्त कानून पर्याप्त नहीं — असली जरूरत अपराध को रोकने की है, न कि केवल दंड देने की। उन्होंने शिक्षा ऋण, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और गरीब वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की माँग की।

मुख्य बातें

BSP प्रमुख मायावती ने 29 जुलाई को पेपर लीक विरोधी विधेयक के लोकसभा में पारित होने पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि केवल सख्त दंड का प्रावधान पर्याप्त नहीं — पेपर लीक को घटित होने से पहले रोकने की व्यवस्था जरूरी है।
मायावती ने शिक्षा ऋण को सस्ता बनाने और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की माँग की।
उन्होंने संसदीय बहस में दलगत राजनीति हावी रहने पर चिंता जताई और नए कानून की सार्थकता पर सवाल उठाए।
140 करोड़ भारतीयों की प्रगति के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और ईमानदार प्रयास की जरूरत बताई।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने 29 जुलाई को पेपर लीक विरोधी विधेयक के लोकसभा में पारित होने के बाद स्पष्ट किया कि केवल कठोर दंड का प्रावधान करने से इस गंभीर समस्या का स्थायी हल नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को अपराध घटित होने के बाद दंडित करने की बजाय ऐसी प्रणाली विकसित करनी चाहिए जो पेपर लीक को घटित होने से पहले ही रोके।

मायावती का एक्स पर बयान

BSP प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पेपर लीक के कारण देशभर में युवा छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है और अनेकों ने आत्महत्या जैसे दुखद कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संसद ने एक बार फिर सख्त सजा का प्रावधान करने वाला विधेयक पारित किया है, लेकिन लोगों में यह चिंता बनी हुई है कि क्या केवल इससे समस्या का समाधान होगा। उनके अनुसार, यह कदम जल्दबाजी में उठाया गया एक और प्रयास अधिक लगता है।

अपराध नियंत्रण बनाम दंड का सवाल

मायावती ने कहा कि नया विधेयक भी पेपर लीक होने के बाद सख्त सजा का प्रावधान करता है, जबकि असली आवश्यकता इस अपराध को घटित होने से पहले रोकने की है। उन्होंने तर्क दिया कि अपराध नियंत्रण, दंड की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार पिछले पेपर लीक कानून का निष्प्रभावी रहना इस बात का प्रमाण है कि केवल कानून बनाने से स्थिति नहीं बदलती।

शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग

BSP प्रमुख ने कहा कि पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध की रोकथाम के लिए शिक्षा क्षेत्र में गहरे सुधारों की आवश्यकता है। इनमें शिक्षा ऋण को सस्ता व कल्याणकारी बनाना और सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि ये सुधार इसलिए आवश्यक हैं ताकि गरीब, उपेक्षित और मेहनतकश वर्गों के बच्चे समता व समानता के साथ आगे बढ़ सकें — जो डॉ. भीमराव अम्बेडकर के संविधान का मूल उद्देश्य है।

संसदीय बहस पर चिंता

मायावती ने यह भी कहा कि पेपर लीक विरोधी विधेयक पर संसद में हुई बहस के दौरान अधिकांश दल दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पाए। उनके अनुसार, चर्चा में गंभीरता कम और आरोप-प्रत्यारोप अधिक रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस परिस्थिति में नया कानून वास्तव में सार्थक सिद्ध होगा।

आगे का रास्ता

मायावती ने सरकार से आग्रह किया कि वह कानून के अतिरिक्त अन्य बेहतर उपायों पर भी विचार करे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसके निदान के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति व ईमानदार प्रयास की जरूरत है — तभी 140 करोड़ की आबादी वाला यह देश वास्तविक प्रगति कर पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बीमारी नहीं। पिछले कानून के निष्प्रभावी रहने के बावजूद नया विधेयक उसी ढाँचे पर टिका है, जो दंड को रोकथाम से ऊपर रखता है। गौरतलब है कि शिक्षा में असमानता और परीक्षा प्रणाली की खामियाँ दशकों पुरानी हैं, और इन पर राजनीतिक सहमति का अभाव ही इस समस्या को बार-बार जन्म देता है। बिना संरचनात्मक सुधार के, हर नया कानून उसी चक्र को दोहराएगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने पेपर लीक विरोधी विधेयक पर क्या कहा?
BSP प्रमुख मायावती ने कहा कि केवल सख्त दंड का प्रावधान करने से पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार सरकार को अपराध घटित होने से पहले रोकने की प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
पेपर लीक विरोधी विधेयक लोकसभा में कब पारित हुआ?
यह विधेयक 29 जुलाई को लोकसभा में पारित किया गया। इसमें पेपर लीक के दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
मायावती ने शिक्षा व्यवस्था में किन सुधारों की माँग की?
मायावती ने शिक्षा ऋण को सस्ता व कल्याणकारी बनाने, सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग की। उनका कहना था कि इससे गरीब और उपेक्षित वर्गों के बच्चे भी समान अवसर पा सकेंगे।
BSP प्रमुख ने संसदीय बहस पर क्या आपत्ति जताई?
मायावती ने कहा कि पेपर लीक विधेयक पर बहस के दौरान अधिकांश दल दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पाए और चर्चा में गंभीरता की बजाय आरोप-प्रत्यारोप अधिक रहा। उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त की।
क्या पेपर लीक के लिए पहले भी कानून बना था?
हाँ, मायावती ने स्वयं उल्लेख किया कि पेपर लीक से संबंधित पिछला कानून निष्प्रभावी रहा है। उनके अनुसार यही तथ्य यह साबित करता है कि केवल कानून बनाने से समस्या हल नहीं होती और अन्य उपाय भी जरूरी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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