पेपर लीक विधेयक पर सीजेपी का सवाल: सजा नहीं, रोकथाम पर ध्यान दे सरकार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 29 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संसद में पारित पेपर लीक विरोधी विधेयक पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि यह कानून लीक होने के बाद की कार्रवाई पर केंद्रित है, जबकि लीक को पहले ही रोकने के उपायों पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर सरकार से पाँच-सूत्रीय सुधार एजेंडे पर विचार करने की माँग की।
विधेयक में क्या कमी है
रांका के अनुसार, संसद में पारित विधेयक में फास्ट ट्रैक कोर्ट, सजा और जुर्माने का प्रावधान तो है, लेकिन परीक्षा प्रणाली की जड़ में जो खामियाँ हैं, उन्हें दूर करने का कोई रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा, 'आप पेपर लीक होने के बाद की सारी बातें कर रही हैं... लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है, इसके बारे में आज भी कोई बात नहीं हुई।'
पाँच-सूत्रीय माँग
सीजेपी प्रवक्ता ने परीक्षा सुधार के लिए पाँच प्रमुख बिंदु रखे। पहला, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में संरचनात्मक सुधार। दूसरा, परीक्षा कैलेंडर और पाठ्यक्रम में पारदर्शिता। तीसरा, कोचिंग सेंटरों के नियमन पर स्पष्ट नीति। चौथा, डिजिटल ऑडिटिंग के ज़रिये पूरे परीक्षा तंत्र की एंड-टू-एंड जाँच। पाँचवाँ, परीक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना।
विशेषज्ञों से संवाद की अपील
रांका ने सरकार से आग्रह किया कि वह जल्दबाज़ी में निर्णय लेने की बजाय छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से व्यापक विमर्श करे। उन्होंने कहा, 'यह देश के बच्चों के भविष्य का सवाल है।' उनका तर्क है कि जब तक परीक्षा व्यवस्था की जड़ में बदलाव नहीं होंगे, लीक की घटनाएँ नहीं रुकेंगी।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में NEET, UGC-NET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर देशव्यापी बहस छिड़ी हुई है। आलोचकों का कहना है कि महज दंडात्मक प्रावधान तब तक पर्याप्त नहीं होंगे, जब तक प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक की पूरी शृंखला को सुरक्षित नहीं बनाया जाता।
आगे क्या
सीजेपी ने सरकार से अपना पाँच-पॉइंटर डिमांड चार्टर देखने और उस पर विचार करने की माँग की है। यदि सरकार इन सुझावों पर ध्यान देती है, तो भविष्य में परीक्षा सुधार की दिशा में एक ठोस नीतिगत ढाँचा तैयार हो सकता है।