पेपर लीक पर पीएम मोदी के निर्णायक कदमों का जयराम ठाकुर ने किया समर्थन, बिल में ₹10 करोड़ जुर्माना और 10 साल सजा का प्रावधान
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने 27 जुलाई 2026 को शिमला में कहा कि पेपर लीक के मामले में सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाए हैं। उन्होंने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) बिल, 2026' को देश में पेपर लीक के विरुद्ध अब तक का सबसे कठोर कानून बताते हुए संसद के दोनों सदनों से इसे सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।
बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान
जयराम ठाकुर के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन बिल में दोषियों के लिए ₹10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने के साथ-साथ 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्तुत किया जाएगा। ठाकुर ने कहा कि जो दोषी हैं, वे पहले से ही सलाखों के पीछे हैं और अब मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की जरूरत थी, जिसे यह बिल पूरा करता है।
छात्रों के आंदोलन पर ठाकुर का रुख
ठाकुर ने माना कि पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं की भावनाएं आहत हुई हैं और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रकट करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने कुछ छात्रों के व्यवहार पर चिंता जताते हुए कहा कि पोस्टरों पर अभद्र भाषा का प्रयोग और अमर्यादित आचरण समाज को यह सोचने पर विवश करता है कि युवा पीढ़ी किस दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा, 'आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन पोस्टर पर अभद्र शब्दों के प्रयोग से स्लोगन लिखे गए, सचमुच चिंता का विषय है।'
कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा का आंदोलन
जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान न कर पाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हाल ही में हुई बैठक में निर्णय लिया है कि वह कांग्रेस सरकार के विरुद्ध एक चार्जशीट जनता के सामने पेश करेगी। ठाकुर ने कहा, 'कांग्रेस के खिलाफ जनता से काफी जानकारी और सबूत मिल रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने जो जनविरोधी फैसले लिए हैं, उन्हें हम जनता के बीच लेकर जा रहे हैं और आंदोलन होगा।'
संसदीय बहस पर जोर
ठाकुर ने कहा कि जब देश में पेपर लीक को लेकर हालात एक निश्चित दिशा में बढ़ रहे हैं, तो इस पर सदन के भीतर खुली और पारदर्शी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे का लाभ उठाने का प्रयास किया, लेकिन उनका मानना है कि इस तरह की परिस्थितियाँ किसी भी राज्य में उत्पन्न हो सकती हैं। आगे यह देखना होगा कि संसद में यह बिल किस रूप में पारित होता है और इसका क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहता है।