पेपर लीक बिल पर BJP सांसद अरविंद धर्मपुरी का कांग्रेस पर वार — तेलंगाना में ₹12,000 करोड़ के वादे का जवाब दो
सारांश
मुख्य बातें
संसद में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अरविंद धर्मपुरी ने 28 जुलाई को विधेयक का खुलकर समर्थन करते हुए कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जो दल संसद में पेपर लीक पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, उसे पहले तेलंगाना में अपने चुनावी वादों का हिसाब देना चाहिए।
एंटी-पेपर लीक बिल का समर्थन
धर्मपुरी ने कहा कि यह विधेयक छात्रों के हितों की रक्षा करने और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस बात पर जोर दे चुके हैं कि परीक्षा तंत्र में ऐसे सुधार किए जाएँ जिससे भविष्य में पेपर लीक की पुनरावृत्ति न हो। नीट परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण में देशभर के लगभग 20 लाख छात्र प्रभावित हुए थे, जिसे धर्मपुरी ने इस कानून की आवश्यकता का सबसे बड़ा प्रमाण बताया।
कांग्रेस पर तेलंगाना के वादों को लेकर निशाना
BJP सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वर्ष 2023 में हैदराबाद आकर तेलंगाना में फीस रीइम्बर्समेंट योजना को प्रभावी ढंग से दोबारा लागू करने का वादा किया था। यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक तथा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अविभाजित आंध्र प्रदेश में लगभग 20 वर्ष पहले शुरू की गई थी। धर्मपुरी के अनुसार, इस प्रतिष्ठित योजना को पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की सरकार के दौरान बंद कर दिया गया था।
₹12,000 करोड़ का बकाया और कॉलेजों का संकट
धर्मपुरी ने दावा किया कि जब यह वादा किया गया था, उस समय फीस रीइम्बर्समेंट योजना के तहत लगभग ₹8,000 करोड़ का बकाया था। उनके अनुसार, कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी यह राशि चुकाई नहीं गई और अब बकाया बढ़कर लगभग ₹12,000 करोड़ तक पहुँच गई है। इस स्थिति में कई कॉलेजों के सामने संचालन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
तेलंगाना के युवाओं का भविष्य दांव पर
BJP सांसद ने कहा कि तेलंगाना में हर वर्ष लगभग 20 लाख युवा स्नातक और इंजीनियरिंग की परीक्षाएँ देते हैं, लेकिन उनके भविष्य के लिए कोई ठोस दिशा नहीं दिखाई दे रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में अब तक कोई नियमित जॉब कैलेंडर लागू नहीं किया गया है। गौरतलब है कि केसीआर सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में अधिकांश समय जॉब कैलेंडर अनुपस्थित रहा और पिछले लगभग 11-12 वर्षों में राज्य में बड़े पैमाने पर सरकारी भर्ती प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हुई।
आगे की माँग
धर्मपुरी ने कांग्रेस सरकार से चुनावी वादों को पूरा करने की स्पष्ट माँग करते हुए कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शी नीति और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद में विपक्ष पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश कर रहा है।