पेपर लीक विवाद: गहलोत ने CM भजन लाल शर्मा के 'शून्य लीक' दावे को चुनौती दी, गिनाए 4 मामले
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 24 जुलाई को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के उस दावे को सीधे चुनौती दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के पिछले ढाई वर्षों के कार्यकाल में राजस्थान में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। गहलोत ने एक विस्तृत बयान जारी कर कई कथित अनियमितताओं का हवाला दिया और आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय तथ्यों को दबाने में लगी है।
गहलोत ने गिनाए कथित पेपर लीक के मामले
पूर्व मुख्यमंत्री ने कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए मौजूदा सरकार के दावे को खोखला बताया। उनके अनुसार, नवलगढ़ (झुंझुनू) में एक बिना सील वाले लिफाफे में आरएएस परीक्षा का पेपर बरामद हुआ। इसके अलावा, एक लेक्चरर भर्ती परीक्षा का पेपर कथित तौर पर टूटी हुई सील के साथ पहुँचा।
जैसलमेर के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान नकल के आरोप भी गहलोत ने उठाए। साथ ही, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSB) के एक तकनीकी प्रमुख से जुड़े ओएमआर शीट में हेराफेरी के मामले का भी उन्होंने जिक्र किया।
नीट-यूजी विवाद और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल
नीट-यूजी परीक्षा का संदर्भ देते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि लीक से जुड़ी शिकायतों को शुरू में राज्य सरकार और पुलिस ने दबा दिया था। उनके अनुसार, यह मामला तभी सार्वजनिक हुआ जब छात्रों ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से सीधे संपर्क किया। उन्होंने यह भी कहा कि भर्ती परीक्षाओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई की गई।
एसआई भर्ती परीक्षा रद्द करने पर BJP का रुख
गहलोत ने यह भी रेखांकित किया कि BJP सरकार ने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को बाद में रद्द तो किया, लेकिन इससे पहले उसने राजस्थान उच्च न्यायालय में इसे रद्द करने का विरोध किया था। आलोचकों का कहना है कि यह विरोधाभासी रवैया सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस बनाम BJP: पेपर लीक पर तुलनात्मक दावे
पिछली कांग्रेस सरकार और वर्तमान BJP प्रशासन की तुलना करते हुए गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस के कार्यकाल में कथित पेपर लीक माफिया के खिलाफ 400 से अधिक गिरफ्तारियाँ की गईं, आरोपियों की संपत्तियाँ ध्वस्त की गईं और वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने एक सख्त पेपर लीक विरोधी कानून लागू किया, जिसमें आजीवन कारावास, ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान था। गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि BJP सरकार 2013 से 2018 के अपने पिछले कार्यकाल में भी पेपर लीक रोकने में विफल रही थी।
BJP का रुख और आगे की स्थिति
गहलोत के आरोपों पर BJP सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके कार्यकाल में कोई दस्तावेज़ लीक नहीं हुआ है। यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में BJP का जवाब और विपक्ष की रणनीति इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।