पंचायत चुनावों में देरी पर गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, हाईकोर्ट की टिप्पणी को बताया 'शर्मनाक'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 17 जुलाई को भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में हो रही देरी को 'बड़ी प्रशासनिक विफलता' करार दिया। गहलोत ने राजस्थान हाईकोर्ट की उस मौखिक टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें अदालत ने कहा था कि 'अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे।'
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 16 जुलाई को सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया में लंबी देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यदि राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो वह न्यायालय को सूचित करे — जज स्वयं चुनाव कराने की व्यवस्था करेंगे। अदालत की इस असाधारण टिप्पणी को गहलोत ने भाजपा सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाने के लिए आधार बनाया।
गहलोत के आरोप: 'जानबूझकर देरी'
गहलोत ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'राज्य सरकार के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में जानबूझकर देरी के कारण माननीय हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे। यह राजस्थान सरकार की बड़ी प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायती राज विभाग सरकार के दबाव में काम कर रहा है और राज्य सरकार समय पर चुनाव कराने की इच्छुक नहीं है।
आरक्षण डेटा न मिलने का मामला
गहलोत ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत उन तथ्यों का भी उल्लेख किया, जिनके अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित जानकारी के लिए पंचायती राज विभाग को छह पत्र लिखे, लेकिन उसे आवश्यक आँकड़े नहीं मिले। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर कमज़ोर किए जाने का प्रमाण बताया।
न्यायपालिका के सम्मान पर सवाल
गहलोत ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार बार-बार अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रही है, जो संवैधानिक सिद्धांतों और न्यायपालिका का अपमान है। उन्होंने कहा, 'जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान करने में विफल रहती है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बाधा डालती है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदायक है।'
अदालत के निर्देश और आगे की सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों का रोडमैप प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने और 20 जुलाई तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर चुनाव कार्यक्रम की पूरी जानकारी देने का भी निर्देश दिया गया है।