18 जुलाई 2026
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पंचायत चुनावों में देरी पर गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, हाईकोर्ट की टिप्पणी को बताया 'शर्मनाक'

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पंचायत चुनावों में देरी पर गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, हाईकोर्ट की टिप्पणी को बताया 'शर्मनाक'

सारांश

राजस्थान हाईकोर्ट की वह टिप्पणी कि 'जज चुनाव करवा देंगे' — अब कांग्रेस के लिए भजनलाल सरकार पर सबसे तीखा राजनीतिक हथियार बन गई है। गहलोत ने इसे प्रशासनिक विफलता का प्रमाण बताते हुए सरकार पर जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 17 जुलाई को भजनलाल शर्मा सरकार पर पंचायत चुनावों में 'जानबूझकर देरी' का आरोप लगाया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 जुलाई की सुनवाई में कहा — 'अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे।' राज्य निर्वाचन आयोग ने आरक्षण डेटा के लिए पंचायती राज विभाग को छह पत्र लिखे, लेकिन जानकारी नहीं मिली।
हाईकोर्ट ने सरकार को 20 जुलाई तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने और चुनाव रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया।
गहलोत ने कहा — न्यायपालिका का सम्मान न करने वाली सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 17 जुलाई को भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में हो रही देरी को 'बड़ी प्रशासनिक विफलता' करार दिया। गहलोत ने राजस्थान हाईकोर्ट की उस मौखिक टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें अदालत ने कहा था कि 'अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे।'

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और राजनीतिक प्रतिक्रिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 16 जुलाई को सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया में लंबी देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यदि राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो वह न्यायालय को सूचित करे — जज स्वयं चुनाव कराने की व्यवस्था करेंगे। अदालत की इस असाधारण टिप्पणी को गहलोत ने भाजपा सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाने के लिए आधार बनाया।

गहलोत के आरोप: 'जानबूझकर देरी'

गहलोत ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'राज्य सरकार के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में जानबूझकर देरी के कारण माननीय हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे। यह राजस्थान सरकार की बड़ी प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायती राज विभाग सरकार के दबाव में काम कर रहा है और राज्य सरकार समय पर चुनाव कराने की इच्छुक नहीं है।

आरक्षण डेटा न मिलने का मामला

गहलोत ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत उन तथ्यों का भी उल्लेख किया, जिनके अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित जानकारी के लिए पंचायती राज विभाग को छह पत्र लिखे, लेकिन उसे आवश्यक आँकड़े नहीं मिले। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे संवैधानिक संस्थाओं को जानबूझकर कमज़ोर किए जाने का प्रमाण बताया।

न्यायपालिका के सम्मान पर सवाल

गहलोत ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार बार-बार अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रही है, जो संवैधानिक सिद्धांतों और न्यायपालिका का अपमान है। उन्होंने कहा, 'जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान करने में विफल रहती है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बाधा डालती है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदायक है।'

अदालत के निर्देश और आगे की सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों का रोडमैप प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने और 20 जुलाई तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर चुनाव कार्यक्रम की पूरी जानकारी देने का भी निर्देश दिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित हो, तो यह प्रशासनिक लापरवाही से आगे की बात है। गहलोत का हमला राजनीतिक है, लेकिन अदालत की नाराज़गी तथ्यात्मक है — और वही इस विवाद को विशेष वज़न देती है। असली सवाल यह है कि 20 जुलाई की समयसीमा के बाद अदालत क्या कदम उठाती है, क्योंकि वही भजनलाल सरकार की जवाबदेही की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान पंचायत चुनावों में देरी पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 जुलाई की सुनवाई में कड़ी नाराज़गी जताते हुए मौखिक रूप से कहा कि अगर राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो अदालत को बताए — जज स्वयं चुनाव कराने की व्यवस्था करेंगे। अदालत ने सरकार को 20 जुलाई तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने और चुनाव रोडमैप पेश करने का निर्देश भी दिया।
अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर क्या आरोप लगाए?
गहलोत ने आरोप लगाया कि पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में जानबूझकर देरी की जा रही है और पंचायती राज विभाग सरकार के दबाव में आरक्षण डेटा देने से बच रहा है। उन्होंने इसे संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और न्यायपालिका की अवमानना करार दिया।
राजस्थान में पंचायत चुनावों में देरी की वजह क्या बताई जा रही है?
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, उसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और महिला आरक्षण से जुड़ा डेटा पंचायती राज विभाग से नहीं मिला, जिसके लिए आयोग ने छह पत्र लिखे। इस डेटा के बिना आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती और चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने 20 जुलाई की समयसीमा क्यों दी?
अदालत ने सरकार को 20 जुलाई तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया, ताकि चुनाव रोडमैप तैयार किया जा सके। अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जानकारी देनी होगी।
क्या राजस्थान सरकार ने गहलोत के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भजनलाल शर्मा सरकार की ओर से गहलोत के आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार का पक्ष अदालत की अगली सुनवाई में स्पष्ट होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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