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अशोक गहलोत का CM भजनलाल को अर्जेंट पत्र: राजस्थान में बकाया भुगतान रुकने से लाखों प्रभावित

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अशोक गहलोत का CM भजनलाल को अर्जेंट पत्र: राजस्थान में बकाया भुगतान रुकने से लाखों प्रभावित

सारांश

राजस्थान में भुगतान संकट अब राजनीतिक मोर्चे पर आ गया है। गहलोत ने CM भजनलाल को अर्जेंट पत्र लिखकर कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, अस्पतालों और ठेकेदारों का करोड़ों रुपए का बकाया रुकने पर तत्काल कार्रवाई माँगी है — और इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय कुप्रबंधन बताया है।

मुख्य बातें

अशोक गहलोत ने 2 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को 'अति आवश्यक' पत्र लिखकर राजस्थान में बकाया भुगतान संकट पर तत्काल कार्रवाई माँगी।
राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपए का भुगतान कई महीनों से लंबित है।
मुख्यमंत्री चिरंजीवी/आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के तहत ₹5 लाख की मंजूरी मिलने के बावजूद सैकड़ों परिवारों को भुगतान नहीं मिला।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने भुगतान संकट को मानवाधिकार मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और सामाजिक सुरक्षा पेंशन भुगतान में भी महीनों की देरी का आरोप।
गहलोत ने इसे 'राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व वित्तीय कुप्रबंधन' करार दिया।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक 'अति आवश्यक' (अर्जेंट) पत्र लिखकर राज्य में बकाया भुगतान रुकने की गंभीर स्थिति पर तत्काल कार्रवाई की माँग की। गहलोत के अनुसार, यह संकट कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, दुर्घटना पीड़ितों के परिवारों, अस्पतालों, दवा आपूर्तिकर्ताओं और छोटे ठेकेदारों — यानी समाज के लगभग हर वर्ग — को प्रभावित कर रहा है।

पत्र में क्या उठाए गए मुद्दे

गहलोत ने अपने पत्र में कहा कि राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपए का भुगतान कई महीनों से लंबित है। उन्होंने चेताया कि कई अस्पतालों ने इस योजना के तहत सेवाएं घटाने या समझौतों से पीछे हटने की धमकी दी है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे मानवाधिकारों से जुड़ा मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया।

गहलोत ने कहा कि कैशलेस इलाज के वादे के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है और रिइम्बर्समेंट में अनिश्चित काल तक देरी हो रही है।

दुर्घटना बीमा और सेवानिवृत्त कर्मचारी

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री चिरंजीवी/आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में हो रही देरी का विशेष उल्लेख किया। इस योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर पात्र परिवारों को ₹5 लाख मिलते हैं, किंतु उनके अनुसार सैकड़ों मामलों में मंजूरी मिलने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है, जिससे शोकाकुल परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के जीपीएफ, ग्रुप इंश्योरेंस, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे वाजिब बकाये रिटायरमेंट के बाद महीनों तक नहीं मिल रहे। गहलोत ने कहा कि यह कर्मचारियों का अधिकार है और इसमें देरी अस्वीकार्य है।

सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे पर असर

गहलोत के अनुसार, कई जिलों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी हुई है, जिससे बुजुर्ग नागरिक, विधवाएँ और दिव्यांग लाभार्थी सीधे प्रभावित हो रहे हैं। ट्रेजरी से मंजूर हो चुके बिलों के भुगतान में देरी के कारण सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति और अन्य सार्वजनिक निर्माण परियोजनाएँ भी ठप हो रही हैं। छोटे ठेकेदारों को अपने बकाये की ओर ध्यान दिलाने के लिए सार्वजनिक विज्ञापन तक देने पर मजबूर होना पड़ा है।

गहलोत का सीधा आरोप

गहलोत ने इस पूरी स्थिति को 'वित्तीय कुप्रबंधन' करार देते हुए कहा, 'राज्य के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा गया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकट केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राज्य के लाखों परिवारों की गरिमा और आजीविका का सवाल है।

आगे क्या होगा

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया है कि वे भुगतान प्रणाली को तत्काल बहाल करें और सभी विभागों व योजनाओं में बकाया राशि का समय पर निपटान सुनिश्चित करें। यह पत्र राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री शर्मा इस पत्र का जवाब देते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें उठाए गए मुद्दे — मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान और अस्पतालों की सेवाएं घटाने की धमकी — महज़ आरोप नहीं, सत्यापन योग्य तथ्य हैं। असली सवाल यह है कि BJP सरकार इन दावों का खंडन करती है या चुप रहती है — दोनों ही स्थितियाँ राजनीतिक रूप से महँगी पड़ सकती हैं। राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद वित्तीय प्रबंधन पर यह पहला बड़ा टकराव है, और यदि भुगतान संकट वास्तविक है, तो इसकी कीमत आम नागरिक चुका रहे हैं — न कि राजनेता।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने CM भजनलाल शर्मा को पत्र क्यों लिखा?
गहलोत ने 2 जुलाई 2026 को राजस्थान में बकाया भुगतान रुकने की गंभीर स्थिति पर तत्काल कार्रवाई माँगते हुए यह पत्र लिखा। उनके अनुसार कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, अस्पतालों और ठेकेदारों का करोड़ों रुपए का बकाया महीनों से लंबित है।
राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना में भुगतान क्यों रुका है?
गहलोत के आरोपों के अनुसार, राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपए का भुगतान कई महीनों से अटका हुआ है। इसके कारण कई अस्पतालों ने सेवाएं घटाने या समझौते तोड़ने की धमकी दी है।
चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना में क्या समस्या है?
मुख्यमंत्री चिरंजीवी/आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर पात्र परिवारों को ₹5 लाख मिलते हैं, लेकिन गहलोत के अनुसार सैकड़ों मामलों में मंजूरी मिलने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में क्या किया?
राज्य मानवाधिकार आयोग ने भुगतान संकट को मानवाधिकारों से जुड़ा मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। यह इस बात का संकेत है कि स्थिति प्रशासनिक से आगे बढ़कर नागरिक अधिकारों के स्तर पर पहुँच गई है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर इस संकट का क्या असर पड़ा है?
गहलोत के अनुसार, जीपीएफ, ग्रुप इंश्योरेंस, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे बकाये रिटायरमेंट के बाद महीनों तक नहीं मिल रहे। इसके अलावा कई जिलों में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन में भी देरी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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