25 अगस्त 2026
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जाति जनगणना: राहुल गांधी और खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, 'ओपन-एंडेड' प्रश्नावली रद्द करने की माँग

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जाति जनगणना: राहुल गांधी और खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, 'ओपन-एंडेड' प्रश्नावली रद्द करने की माँग

सारांश

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और राहुल गांधी ने PM मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की 'ओपन-एंडेड' पद्धति को दोषपूर्ण बताया — चेतावनी दी कि इससे एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और ओबीसी व वंचित समुदायों का डेटा बेकार हो जाएगा। तेलंगाना-बिहार मॉडल की तर्ज पर प्रमाणित ड्रॉप-डाउन सूची की माँग की।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने 25 अगस्त 2026 को PM मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा पद्धति पर आपत्ति जताई।
दोनों नेताओं ने 'ओपन-एंडेड' प्रश्नावली को भ्रामक बताया — कहा कि एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और डेटा अनुपयोगी हो जाएगा।
मौजूदा प्रश्नावली में 'पिछड़ा वर्ग' शब्द तक शामिल नहीं, जिससे ओबीसी आबादी का सटीक आकलन असंभव।
कांग्रेस ने ड्रॉप-डाउन जाति सूची अपनाने का सुझाव दिया — तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों को मॉडल बताया।
माँग: मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो; राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से परामर्श कर नई प्रश्नावली बने।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 25 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। दोनों नेताओं ने माँग की है कि सरकार मौजूदा 'ओपन-एंडेड' प्रश्नावली को रद्द कर जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करे।

मुख्य आपत्ति: 'ओपन-एंडेड' प्रश्न से डेटा बिखरेगा

पत्र में दोनों नेताओं ने लिखा कि केंद्र सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए खुला-समाप्त (ओपन-एंडेड) प्रश्न का तरीका चुना है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा। उनके अनुसार, भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं और उपजातियों के नामों से जानी जाती है, जिससे एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और पूरा डेटा अनुपयोगी हो जाएगा।

पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि मौजूदा प्रश्नावली में 'पिछड़ा वर्ग' शब्द तक शामिल नहीं है, जिससे देश में ओबीसी की वास्तविक आबादी का आकलन ही संभव नहीं होगा।

खड़गे का एक्स पोस्ट: 'जाति जनगणना सही भी होनी चाहिए'

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'जाति जनगणना सिर्फ होनी नहीं चाहिए, सही भी होनी चाहिए।'

कांग्रेस का व्यावहारिक विकल्प: ड्रॉप-डाउन सूची

पत्र में कांग्रेस नेताओं ने एक ठोस विकल्प भी सुझाया। उनके अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में पहले से ड्रॉप-डाउन सूची का तरीका अपनाया जाता है, और जाति जनगणना में भी यही पद्धति लागू की जानी चाहिए। यह सूची सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग सूची और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की जा सकती है। संदर्भ के तौर पर तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों की जाति सूचियाँ पत्र के साथ संलग्न की गई हैं, जहाँ यही पद्धति सफलतापूर्वक अपनाई गई थी।

वंचित समुदायों पर असर

दोनों नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जातियों की सही गिनती नहीं हुई, तो शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े नीतिगत फैसले प्रभावित होंगे। पत्र में कहा गया, 'भारत में सामाजिक न्याय की नीतियाँ सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं।'

माँग और आगे का रास्ता

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस तरीके से की जा रही जाति जनगणना को स्वीकार नहीं करती। पार्टी की माँग है कि सरकार मौजूदा प्रश्नावली रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक परामर्श के बाद नई प्रश्नावली तैयार करे, ताकि हर जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आए। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब जाति जनगणना को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है और विभिन्न दल इसकी पद्धति पर अपनी राय सामने रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और तेलंगाना व बिहार के अनुभव यह साबित करते हैं कि प्रमाणित सूची से बेहतर डेटा मिलता है। लेकिन यह पत्र राजनीतिक शून्य में नहीं आया — जाति जनगणना की माँग खुद कांग्रेस के लिए चुनावी मुद्दा रही है, इसलिए पद्धति-आलोचना और राजनीतिक स्थिति-निर्माण के बीच की रेखा धुंधली है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस तकनीकी आपत्ति को गंभीरता से लेगी या इसे विपक्षी अवरोध के रूप में खारिज करेगी — क्योंकि प्रश्नावली की पद्धति अभी भी बदली जा सकती है, और देरी का नुकसान अंततः उन्हीं समुदायों को होगा जिनके लिए यह जनगणना की जा रही है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जाति जनगणना में 'ओपन-एंडेड' प्रश्न से क्या समस्या है?
'ओपन-एंडेड' पद्धति में जनगणनाकर्मी व्यक्ति द्वारा बताया गया जाति-नाम ज्यों का त्यों दर्ज करता है। चूँकि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं में अलग नामों से जानी जाती है, इससे एक जाति हजारों नामों में बंट सकती है और पूरा डेटा अनुपयोगी हो जाता है।
कांग्रेस ने जाति जनगणना के लिए क्या विकल्प सुझाया है?
कांग्रेस ने 'ड्रॉप-डाउन जाति सूची' पद्धति अपनाने की माँग की है, जिसमें पहले से प्रमाणित जातियों की सूची तैयार की जाए और उसी के आधार पर गणना हो। यह तरीका अनुसूचित जाति-जनजाति की गणना में पहले से इस्तेमाल होता है और तेलंगाना व बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी सफलतापूर्वक अपनाया गया था।
इस विवाद से ओबीसी और वंचित समुदायों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि जातियों की सही गिनती नहीं हुई, तो ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों की वास्तविक आबादी का पता नहीं चलेगा। इससे शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े नीतिगत फैसले गलत आँकड़ों पर आधारित होंगे।
तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षण को मॉडल क्यों बताया जा रहा है?
तेलंगाना और बिहार ने अपने जाति सर्वेक्षणों में पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना की थी, जिससे डेटा अधिक सटीक और उपयोगी रहा। कांग्रेस ने इन दोनों सर्वेक्षणों की जाति सूचियाँ PM मोदी को भेजे पत्र के साथ संलग्न की हैं।
राहुल गांधी और खड़गे ने PM मोदी से क्या माँगें रखी हैं?
दोनों नेताओं ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: मौजूदा 'ओपन-एंडेड' प्रश्नावली रद्द की जाए; जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बनाई जाए; और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व आम जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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