क्या कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्र के जातिगत जनगणना के फैसले का स्वागत किया?
सारांश
Key Takeaways
- जातिगत जनगणना का निर्णय सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगा।
- राज्यों की सलाह लेना आवश्यक होगा।
- इससे ओबीसी, एससी-एसटी के लिए योजनाएं मजबूत होंगी।
- डेटा संग्रहण की गोपनीयता पर ध्यान दिया जाएगा।
- तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही मांग को मान्यता मिलेगी।
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार द्वारा आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के निर्णय का कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे डेटा-आधारित सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के फैसले का स्वागत है। यह डेटा-आधारित सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसकी मांग विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से कर रहे थे। राज्य की नीतियों पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए, केंद्र सरकार को गलतियों और कमियों से बचने के लिए फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने से पहले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सलाह लेनी चाहिए।"
यह फैसला पिछले कई वर्षों से चल रही राजनीतिक बहस का नतीजा माना जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2023 से लगातार जाति जनगणना की मांग की थी और इसे ओबीसी, एससी-एसटी तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाओं को मजबूत बनाने का आधार बताया था।
इसी बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के लिए व्यापक परामर्श की अपील की है। स्टालिन ने सुझाव दिया कि जाति जनगणना के दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने से पहले एक सामूहिक सलाहकार तंत्र बनाया जाए, जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हों।
प्रक्रिया की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पूरी सावधानी बरती जाए। जरूरत पड़ने पर पायलट टेस्टिंग भी की जाए ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद से बचा जा सके। सामाजिक न्याय को मजबूत करने के साथ-साथ डेटा संग्रहण की गोपनीयता और निष्पक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
सीएम स्टालिन ने केंद्र को लिखे पत्र में कहा कि राष्ट्रीय जनगणना के साथ जाति जनगणना को शामिल करने का निर्णय व्यापक और विश्वसनीय डाटा उत्पन्न करने में मदद करेगा। यह सामाजिक असमानताओं को दूर करने और सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि कल्याणकारी योजनाएं अपने लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचें।
उन्होंने इस कदम को तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप बताया और कहा कि राज्य ने विधानसभा में पहले ही प्रस्ताव पारित कर केंद्र से जनसंख्या जनगणना के साथ-साथ जाति आधारित जनगणना कराने का आग्रह किया था।