क्या मोदी सरकार का जातिगत जनगणना का फैसला ऐतिहासिक है? जगदंबिका पाल का बयान

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क्या मोदी सरकार का जातिगत जनगणना का फैसला ऐतिहासिक है? जगदंबिका पाल का बयान

सारांश

क्या मोदी सरकार का जातिगत जनगणना का फैसला सच में ऐतिहासिक है? जगदंबिका पाल ने कांग्रेस और सपा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जानें इस विवाद और जनगणना के महत्व के बारे में।

मुख्य बातें

जातिगत जनगणना का ऐतिहासिक फैसला मोदी सरकार द्वारा लिया गया।
34 लाख कर्मचारी घर-घर जाकर जनगणना करेंगे।
कांग्रेस और सपा पर गुमराह करने का आरोप लगाया गया।
जनगणना 1 अक्टूबर 2026 तक पहाड़ी क्षेत्रों में होगी।
मोदी सरकार ने वैश्विक मंचों पर शांति की बात की है।

लखनऊ, 17 जून (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला किया।

उन्होंने कहा कि यह फैसला वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है, जिसे कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया।

जगदंबिका पाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जातिगत जनगणना का ऐतिहासिक फैसला लिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने न केवल इसकी घोषणा की, बल्कि 16 जून को अधिसूचना जारी कर पूरी समय-सारिणी भी दे दी। पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना 1 अक्टूबर 2026 तक और पूरे देश की जनगणना के आंकड़े 1 मार्च 2027 तक उपलब्ध होंगे।"

उन्होंने कहा कि 34 लाख कर्मचारी घर-घर जाकर जनगणना करेंगे, जिसमें जातिगत जानकारी भी शामिल होगी।

पाल ने कांग्रेस और सपा पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने कभी इस मांग पर फैसला नहीं लिया। अब जब मोदी सरकार ने कदम उठाया, तो वे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भ्रम फैला रहे हैं। अखिलेश को लगता है कि उनकी पिछड़ा वर्ग की राजनीति कमजोर हो जाएगी।"

उन्होंने लोकसभा चुनाव में सपा द्वारा संविधान और आरक्षण खत्म होने का डर दिखाने की बात को भी खारिज किया और कहा, "यह उनकी बौखलाहट है। जनगणना संवैधानिक प्रक्रिया है और इसमें सभी राज्यों के कर्मचारी शामिल होंगे।"

कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए पाल ने कहा, "कांग्रेस एक तरफ ईरान का समर्थन करती है, दूसरी तरफ इजरायल पर हमला बोलती है। यह उनकी दोहरी नीति है।"

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार वैश्विक मंचों पर शांति की बात करती है। पीएम मोदी कहते हैं कि दुनिया युद्ध दे रही है, लेकिन हमने गौतम बुद्ध का शांति का संदेश दिया है। आज पूरी दुनिया भारत की शांति पहल की सराहना कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी है। जातिगत जनगणना का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझना है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है जो सभी पक्षों को अपने विचार रखने का अवसर देती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जातिगत जनगणना का महत्व क्या है?
जातिगत जनगणना से विभिन्न जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता चलता है, जो नीतियों को निर्धारित करने में मदद करता है।
कौन-कौन से कर्मचारी जनगणना में शामिल होंगे?
लगभग 34 लाख कर्मचारी घर-घर जाकर जनगणना करेंगे, जिसमें जातिगत जानकारी भी शामिल होगी।
कांग्रेस और सपा ने जनगणना पर क्या कहा है?
कांग्रेस और सपा ने मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक लाभ के लिए किया गया बताया है।
जनगणना कब तक पूरी होगी?
पहाड़ी क्षेत्रों की जनगणना 1 अक्टूबर 2026 तक और पूरे देश की जनगणना के आंकड़े 1 मार्च 2027 तक उपलब्ध होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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