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क्या हिंदू समाज को क्रिसमस नहीं मनाना चाहिए?

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क्या हिंदू समाज को क्रिसमस नहीं मनाना चाहिए?

सारांश

नई दिल्ली, 13 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू समाज से क्रिसमस जैसे धार्मिक उत्सवों का बहिष्कार करने की अपील की है। सुरेंद्र गुप्ता ने सांस्कृतिक सजगता और आत्मसम्मान के साथ अपने धर्म का पालन करने की बात कही है। यह अपील अपने धर्म और परंपरा के संरक्षण के लिए की जा रही है।

मुख्य बातें

सांस्कृतिक सजगता का महत्व आत्मसम्मान का पालन धर्म परंपरा धर्म परिवर्तन के प्रयासों का विरोध व्यापारियों का बहिष्कार

नई दिल्ली, 13 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू समाज के लिए एक आह्वान पत्र जारी किया है। इस पत्र को इंद्रप्रस्थ प्रांत के मंत्री सुरेंद्र गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसमें सांस्कृतिक सजगता, आत्मसंयम और आत्मसम्मान के साथ अपने धार्मिक आचरण को निभाने की अपील की गई है।

प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत की आत्मा सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में समाहित है, जिसे हमारे ऋषि-मुनियों, संतों और पूर्वजों ने सहस्राब्दियों की साधना से सुरक्षित रखा है। यह एक स्थापित तथ्य है कि देश के विभिन्न हिस्सों में संगठित रूप से धर्म परिवर्तन के प्रयास लंबे समय से सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे वातावरण में यदि हिंदू समाज बिना विवेक के अन्य धर्मों से जुड़े धार्मिक उत्सवों को अपनाता है, तो यह अनजाने में उन प्रयासों को सामाजिक स्वीकार्यता और सुविधा प्रदान करता है। इसका दीर्घकालिक प्रभाव सनातन धर्म और हिंदू समाज की सांस्कृतिक निरंतरता पर पड़ सकता है।

सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि इसी संदर्भ में विश्व हिंदू परिषद, हिंदू समाज से यह विनम्र लेकिन स्पष्ट अपील करता है कि किसी भी रूप में क्रिसमस जैसे धार्मिक उत्सवों को न मनाएं। यह किसी व्यक्ति या समुदाय के विरोध का विषय नहीं है, बल्कि अपने धर्म और परंपरा के संरक्षण का प्रश्न है।

इसके साथ ही यह भी अपील की गई है कि ऐसे दुकानदारों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों से खरीदारी न करने पर विचार करें, जो स्वयं हिंदू होते हुए भी केवल व्यावसायिक लाभ के लिए 'हैप्पी क्रिसमस' जैसे बोर्ड लगाते हैं। यह प्रवृत्ति सांस्कृतिक भ्रम और आत्महीनता को बढ़ावा देती है।

सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि हिंदू समाज को अपने पर्व, परंपरा, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों में भी इनके प्रति गौरव और चेतना का निर्माण हो सके।

उन्होंने कहा कि यह अपील किसी से टकराव या वैमनस्य के लिए नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण सांस्कृतिक जागरण, विवेकपूर्ण आचरण और आत्मसम्मान के भाव से की जा रही है।

प्रांत मंत्री ने कहा कि हिंदू समाज को यह स्मरण रखना चाहिए, 'धर्मो रक्षति रक्षितः,' अर्थात् जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।

सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि समय की मांग है कि हिंदू समाज संगठित, सजग और जिम्मेदार नागरिक के रूप में सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति और भारत की सभ्यतागत पहचान की रक्षा हेतु आगे आए। यह पत्र उन दुकानदारों और शॉपिंग मॉल के अधिकारियों को भी दिया जाएगा, जो 25 दिसंबर को अपनी दुकानों या मॉल को 'हैप्पी क्रिसमस' लिखकर सजाते हैं। साथ ही यह उन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी भेजा जाएगा, जहां हिंदू बच्चे पढ़ते हैं और विद्यालय प्रशासन 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इससे हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या क्रिसमस मनाना गलत है?
यह अपील अपने धर्म और परंपरा के संरक्षण के लिए की जा रही है।
हिंदू समाज को क्या करना चाहिए?
हिंदू समाज को अपने पर्व, परंपरा और संस्कारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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