चाय ₹15 में, 50 पैसे से शुरू हुई ज़िंदगी: संजय राउत का BJP पर तंज, कंगना और मराठी विवाद पर भी बोले
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 25 अगस्त 2026 को पत्रकारों से बातचीत में चाय की बढ़ती कीमतों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आम आदमी की ज़िंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई थी और आज वही चाय ₹15 में मिल रही है।
चाय की कीमत पर BJP को घेरा
राउत ने कहा, "चाय की कीमत ₹15 हो गई है, जबकि बड़े होटलों में यही चाय ₹200–₹300 में मिलती है। हमारी ज़िंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई है।" उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा, "अब BJP वाले कहेंगे कि चाय मत पियो — चाय पीना अपराध है, देशद्रोह है। राष्ट्रभक्ति के नाम पर कोई आदेश जारी कर देंगे। खुद इथेनॉल पिएंगे। गरीब आदमी को मेहनत करके एक कप चाय नसीब होती है और ये लोग सरकारी चाय पीते हैं।"
राउत ने चाय महंगी होने की वजह भी बताई — उनके अनुसार चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन में जा रहा है, जिससे चीनी और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं।
कंगना रनौत के बयान पर प्रतिक्रिया
अभिनेत्री व BJP सांसद कंगना रनौत द्वारा अभिनेत्रियों कृति सेनन और तापसी पन्नू पर कटाक्ष किए जाने के सवाल पर राउत ने कहा, "आप लोग कंगना रनौत को इतनी गंभीरता से क्यों लेते हैं? उन्हें इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ये अंधभक्त लोग हैं।" उन्होंने सुझाया कि कंगना से यह पूछा जाना चाहिए कि चाय आखिर क्यों महंगी हो गई है।
मराठी भाषा विवाद पर राउत का रुख
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर उठे विवाद पर राउत ने संविधान प्रदत्त अधिकारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "चाहे महाराष्ट्र हो या बंगाल, कॉर्पोरेट जगत में स्थानीय भाषा का प्रयोग होना चाहिए।" साथ ही उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि अगर अंग्रेजी गुलामी का प्रतीक है, तो सर्वोच्च न्यायालय और नौकरशाही को भी हिंदी में काम करना चाहिए।
गौरतलब है कि एक दिन पहले राउत ने समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव के भाषा संबंधी बयान का भी समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अखिलेश ने जो कहा वह सही है — हर राज्य में स्थानीय भाषा का कानून होना चाहिए और वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए, खासकर कॉर्पोरेट और ऊँचे पदों पर बैठे लोगों पर भी।
विपक्ष की व्यापक रणनीति
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल महंगाई को केंद्र सरकार के खिलाफ एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं। चाय जैसी रोज़मर्रा की वस्तु की कीमत को राजनीतिक प्रतीक बनाकर राउत ने आम मतदाता से सीधा संवाद करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में महंगाई और भाषा विवाद दोनों मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं।