25 अगस्त 2026
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चाय ₹15 में, 50 पैसे से शुरू हुई ज़िंदगी: संजय राउत का BJP पर तंज, कंगना और मराठी विवाद पर भी बोले

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चाय ₹15 में, 50 पैसे से शुरू हुई ज़िंदगी: संजय राउत का BJP पर तंज, कंगना और मराठी विवाद पर भी बोले

सारांश

50 पैसे की चाय से ज़िंदगी शुरू करने वाली पीढ़ी आज ₹15 में चाय खरीदने को मजबूर है — संजय राउत का यह तंज सिर्फ चाय पर नहीं, बल्कि महंगाई, इथेनॉल नीति और BJP की प्राथमिकताओं पर सीधा प्रहार है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 25 अगस्त को चाय की कीमत ₹15 होने पर BJP पर निशाना साधा।
राउत ने कहा कि गन्ना इथेनॉल उत्पादन में जाने से चीनी और चाय महंगी हुई है।
कंगना रनौत के कृति सेनन व तापसी पन्नू पर कटाक्ष को राउत ने 'अंधभक्ति' करार दिया और उन्हें गंभीरता से न लेने की सलाह दी।
मराठी भाषा विवाद पर राउत ने कॉर्पोरेट जगत में स्थानीय भाषा अनिवार्य करने और सर्वोच्च न्यायालय व नौकरशाही में हिंदी को बढ़ावा देने की वकालत की।
अखिलेश यादव के भाषा संबंधी बयान का राउत ने समर्थन किया और कहा कि यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 25 अगस्त 2026 को पत्रकारों से बातचीत में चाय की बढ़ती कीमतों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आम आदमी की ज़िंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई थी और आज वही चाय ₹15 में मिल रही है।

चाय की कीमत पर BJP को घेरा

राउत ने कहा, "चाय की कीमत ₹15 हो गई है, जबकि बड़े होटलों में यही चाय ₹200–₹300 में मिलती है। हमारी ज़िंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई है।" उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा, "अब BJP वाले कहेंगे कि चाय मत पियो — चाय पीना अपराध है, देशद्रोह है। राष्ट्रभक्ति के नाम पर कोई आदेश जारी कर देंगे। खुद इथेनॉल पिएंगे। गरीब आदमी को मेहनत करके एक कप चाय नसीब होती है और ये लोग सरकारी चाय पीते हैं।"

राउत ने चाय महंगी होने की वजह भी बताई — उनके अनुसार चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन में जा रहा है, जिससे चीनी और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं।

कंगना रनौत के बयान पर प्रतिक्रिया

अभिनेत्री व BJP सांसद कंगना रनौत द्वारा अभिनेत्रियों कृति सेनन और तापसी पन्नू पर कटाक्ष किए जाने के सवाल पर राउत ने कहा, "आप लोग कंगना रनौत को इतनी गंभीरता से क्यों लेते हैं? उन्हें इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ये अंधभक्त लोग हैं।" उन्होंने सुझाया कि कंगना से यह पूछा जाना चाहिए कि चाय आखिर क्यों महंगी हो गई है।

मराठी भाषा विवाद पर राउत का रुख

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर उठे विवाद पर राउत ने संविधान प्रदत्त अधिकारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "चाहे महाराष्ट्र हो या बंगाल, कॉर्पोरेट जगत में स्थानीय भाषा का प्रयोग होना चाहिए।" साथ ही उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि अगर अंग्रेजी गुलामी का प्रतीक है, तो सर्वोच्च न्यायालय और नौकरशाही को भी हिंदी में काम करना चाहिए।

गौरतलब है कि एक दिन पहले राउत ने समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव के भाषा संबंधी बयान का भी समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अखिलेश ने जो कहा वह सही है — हर राज्य में स्थानीय भाषा का कानून होना चाहिए और वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए, खासकर कॉर्पोरेट और ऊँचे पदों पर बैठे लोगों पर भी।

विपक्ष की व्यापक रणनीति

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल महंगाई को केंद्र सरकार के खिलाफ एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं। चाय जैसी रोज़मर्रा की वस्तु की कीमत को राजनीतिक प्रतीक बनाकर राउत ने आम मतदाता से सीधा संवाद करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में महंगाई और भाषा विवाद दोनों मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक ठोस नीतिगत सवाल है — क्या इथेनॉल सम्मिश्रण नीति ने खाद्य महंगाई को बढ़ावा दिया है? यह सवाल अर्थशास्त्रियों के बीच भी बहस का विषय रहा है और सरकार ने अभी तक इस ट्रेड-ऑफ का पारदर्शी हिसाब नहीं दिया है। मराठी-हिंदी भाषा विवाद पर राउत का रुख दिलचस्प विरोधाभास दर्शाता है — एक ओर वे स्थानीय भाषा की पैरवी करते हैं, दूसरी ओर हिंदी को राष्ट्रीय एकता का माध्यम बताते हैं, जो उनकी पार्टी की पारंपरिक क्षेत्रीय पहचान की राजनीति से अलग सुर है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने चाय की कीमत पर क्या कहा?
संजय राउत ने कहा कि चाय की कीमत बढ़कर ₹15 हो गई है, जबकि उनकी पीढ़ी की ज़िंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई थी। उन्होंने इसके लिए गन्ने को इथेनॉल उत्पादन में लगाए जाने की नीति को ज़िम्मेदार ठहराया।
राउत ने कंगना रनौत के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
राउत ने कहा कि कंगना रनौत को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए और उन्हें 'अंधभक्त' करार दिया। उन्होंने सुझाया कि कंगना से यह पूछा जाए कि चाय आखिर क्यों महंगी हुई।
मराठी भाषा विवाद पर राउत का क्या रुख है?
राउत ने कहा कि कॉर्पोरेट जगत और ऊँचे पदों पर काम करने वालों को भी स्थानीय भाषा बोलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और नौकरशाही में हिंदी के प्रयोग की वकालत की।
राउत ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन क्यों किया?
राउत ने कहा कि अखिलेश यादव ने स्थानीय भाषा के अधिकार की बात कही, जो एक कानूनी प्रावधान है। उनके अनुसार यह नियम केवल आम नागरिकों पर नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट और सरकारी उच्च पदों पर बैठे सभी लोगों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
इथेनॉल नीति और चाय की महंगाई का क्या संबंध है?
राउत के अनुसार चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन में लगाया जा रहा है, जिससे चीनी की उपलब्धता घटी और कीमतें बढ़ीं। इसका असर चाय जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ा है।
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