इंडिया गठबंधन को पीएम चेहरा तय करना होगा, वरना जनता को जवाब कैसे देंगे: संजय राउत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोमवार, 15 जून को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि इंडिया गठबंधन को जनता के बीच जाने से पहले प्रधानमंत्री पद के लिए एक चेहरा तय करना अनिवार्य है, अन्यथा मतदाताओं के सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं होगा। उन्होंने साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुए हालिया बिखराव पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी।
इंडिया गठबंधन और पीएम चेहरे की ज़रूरत
राउत ने कहा कि यदि विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं, तो पहले प्रधानमंत्री के चेहरे पर सहमति बनानी होगी। उनके शब्दों में, 'अगर हम लोगों के बीच जाएंगे, तो वे पूछेंगे कि तुम्हारा पीएम कौन है — तब हम क्या जवाब देंगे?' यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर एकराय अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
TMC बिखराव पर राउत का रुख
राउत ने ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस को ही 'असली टीएमसी' करार दिया और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण एक महीने से अधिक पुराना हो चुका है और अब इस पर बहस प्रासंगिक नहीं रही। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोला, उन्हें जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'असली सच्चाई' का अहसास होगा।
त्रिपुरा की छोटी पार्टी से गठजोड़ पर सवाल
राउत ने यह भी कहा कि TMC से अलग हुए नेताओं ने त्रिपुरा की एक ऐसी पार्टी का दामन थामा है, जो स्वयं राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने बताया कि हाल के चुनाव में उस पार्टी को महज 800 वोट मिले। राउत के अनुसार, कथित तौर पर गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के तहत इन नेताओं को ऐसी पार्टी में धकेला गया जिसका कोई जनाधार नहीं है।
महाराष्ट्र पर भी राउत का इशारा
राउत ने यह भी स्पष्ट किया कि TMC में जो स्थिति बनी है, वैसी ही स्थिति महाराष्ट्र में भी आने वाले दिनों में लागू होती है — अर्थात जो लोग मूल पार्टी से अलग हुए हैं, उन्हें भी जनता और राजनीतिक परिस्थितियाँ आईना दिखाएंगी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के दो धड़े पहले से ही 'असली पार्टी' के दावे को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं।
आगे क्या
राउत के इस बयान ने इंडिया गठबंधन के भीतर नेतृत्व की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। गठबंधन के घटक दलों के बीच पीएम चेहरे पर सहमति बनना आगामी चुनावी रणनीति की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, और राउत का यह बयान उस दिशा में दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।