राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जेडीयू विधायक श्याम रजक बोले — यह आस्था का मामला, राजनीति से परे
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने 3 जुलाई को पटना में स्पष्ट किया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला किसी राजनीतिक दल के लाभ या हानि का विषय नहीं, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस विवाद को राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं होगा।
मुख्य बयान और आस्था का सवाल
श्याम रजक ने कहा कि राम मंदिर दशकों के लंबे संघर्ष और असीम आस्था की बुनियाद पर खड़ा हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि निर्माण काल से ही मंदिर को लेकर विभिन्न प्रकार के सवाल और विवाद उठते रहे हैं और चढ़ावा चोरी की यह घटना उसी कड़ी में एक दुखद अध्याय है।
रजक ने कहा कि इस घटना ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है और यही कारण है कि इसे राजनीतिक लाभ-हानि के तराज़ू पर तौलना अनुचित है।
जाँच समिति का स्वागत
जेडीयू विधायक ने बताया कि सरकार द्वारा इस मामले में जाँच समिति का गठन किया गया है, जिसे उन्होंने एक सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जाँच एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी होगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उनके अनुसार, त्वरित और निष्पक्ष जाँच से न केवल दोषियों को सज़ा मिलेगी, बल्कि समाज में विश्वास का वातावरण भी पुनः स्थापित होगा।
चिराग पासवान की मुलाकात पर प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा पीड़ित भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर रजक ने कहा कि किसी पीड़ित परिवार के पास जाकर संवेदना व्यक्त करना पूरी तरह मानवीय और उचित कदम है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल राजनीति तक सीमित नहीं होता — समाज के प्रति संवेदनशील रहना भी उसकी ज़िम्मेदारी है।
रजक ने चिराग पासवान की सराहना करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के एक प्रमुख नेता और अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि पासवान बिहार में किसी भी संकट या दुर्घटना के समय संवेदनशीलता के साथ सामने आते हैं — ठीक उसी तरह जैसे उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान किया करते थे।
नवादा दौरे का संकेत
रजक ने यह भी कहा कि चिराग पासवान संभवतः नवादा भी जाएँगे और ऐसा जाना उचित भी है। उन्होंने बताया कि पासवान ने गृह मंत्री से मिलकर दोनों घटनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा भी की है, जो उनकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधों पर व्यापक सवाल उठ रहे हैं। आगे जाँच समिति की रिपोर्ट और उस पर की जाने वाली कार्रवाई ही यह तय करेगी कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की विश्वसनीयता बनी रहती है या नहीं।