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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हरदीप पुरी का ऐलान: 10 साल में 460 सैटेलाइट, 100 लॉन्च का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हरदीप पुरी का ऐलान: 10 साल में 460 सैटेलाइट, 100 लॉन्च का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

सारांश

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब सिर्फ सरकारी गौरव नहीं — यह एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है। 10 साल में 460 सैटेलाइट, 100 लॉन्च और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली लैंडिंग के साथ भारत ने साबित किया है कि वह वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में गंभीर दावेदार है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों की जानकारी दी।
पिछले 10 वर्षों में भारत ने 460 से अधिक सैटेलाइट प्रक्षेपित किए; वर्तमान में कक्षा में 548 सैटेलाइट सक्रिय।
भारत ने 100 सफल अंतरिक्ष लॉन्च का ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया।
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट-लैंडिंग कर भारत को यह उपलब्धि हासिल करने वाला विश्व का पहला देश बनाया।
प्रज्ञान रोवर ने पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर एक चंद्र दिवस तक सफलतापूर्वक वैज्ञानिक प्रयोग किए।
निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप और युवा नवोन्मेषक भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई गति दे रहे हैं।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर घोषणा की कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है — पिछले 10 वर्षों में 460 से अधिक सैटेलाइट प्रक्षेपित किए गए हैं और अब कक्षा में कुल 548 सैटेलाइट सक्रिय हैं। 100 सफल लॉन्च के मील के पत्थर के साथ, भारत वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा है।

मुख्य घोषणाएँ और उपलब्धियाँ

मंत्री पुरी ने कहा कि चंद्रयान-1 और मंगलयान से शुरू हुई यह यात्रा चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 तक पहुंचकर भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार की क्षमता को रेखांकित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सफलता किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि देश के प्रतिभाशाली युवाओं, स्पेस स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र के नवोन्मेषकों की सामूहिक उपलब्धि है।

पुरी के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी ने भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई गति दी है और साहसी विचारों को वास्तविक संभावनाओं में परिवर्तित किया है। उन्होंने इसे 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।

चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि

23 अगस्त 2023 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतारा। इस उपलब्धि के साथ भारत, अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि भारत चंद्रमा के ऊबड़-खाबड़ दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना।

चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया था। इस मिशन को तीन प्रमुख क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए डिज़ाइन किया गया था — सुरक्षित सॉफ्ट-लैंडिंग, रोवर का सतह पर संचालन और वैज्ञानिक प्रयोग।

प्रज्ञान रोवर के वैज्ञानिक प्रयोग

लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर, विक्रम लैंडर से बाहर निकला और सतह पर वैज्ञानिक अन्वेषण आरंभ किया। इस अध्ययन में चंद्रमा की सतह का तापमान, भूकंपीय गतिविधियाँ, प्लाज्मा का वातावरण और तत्वों की संरचना जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल थे। इसरो के अनुसार, लैंडर और रोवर ने एक चंद्र दिवस — जो पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर होता है — तक सफलतापूर्वक कार्य किया, जो मिशन का निर्धारित लक्ष्य था।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का महत्व

पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस चंद्रयान-3 की सफलता की पहली वर्षगांठ पर 23 अगस्त 2024 को मनाया गया था। यह दिवस न केवल उस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति का अवसर है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की व्यापक प्रगति को रेखांकित करने का भी मंच है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज़ी से बढ़ रही है और भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग भी तेज़ी से उभर रहा है। आने वाले वर्षों में गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन और चंद्रयान-4 जैसी परियोजनाएँ भारत की इस अंतरिक्ष यात्रा को नई दिशा देंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन उपलब्धियों का आर्थिक लाभांश कब और कैसे आम भारतीय तक पहुंचेगा। वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, और भारत का हिस्सा अभी भी 2% से कम है। निजी क्षेत्र की भागीदारी का उत्साह सही दिशा में है, लेकिन स्पेस स्टार्टअप्स के लिए नियामक ढांचा अभी भी अधूरा है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस जश्न का अवसर है — लेकिन यह जवाबदेही का भी समय है कि 'आत्मनिर्भर भारत' का अंतरिक्ष संस्करण वाणिज्यिक मूल्य में कब तब्दील होगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को मनाया जाता है। यह तारीख चंद्रयान-3 की 23 अगस्त 2023 की ऐतिहासिक सॉफ्ट-लैंडिंग की स्मृति में चुनी गई है, जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला विश्व का पहला देश बना था।
भारत के पास अभी कक्षा में कितने सैटेलाइट हैं?
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, वर्तमान में भारत के 548 सैटेलाइट कक्षा में सक्रिय हैं। पिछले 10 वर्षों में 460 से अधिक सैटेलाइट प्रक्षेपित किए गए हैं और कुल 100 सफल लॉन्च का मील का पत्थर भी पार हो चुका है।
चंद्रयान-3 मिशन में क्या-क्या हासिल किया गया?
चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट-लैंडिंग की। इसके बाद प्रज्ञान रोवर ने सतह का तापमान, भूकंपीय गतिविधियाँ, प्लाज्मा वातावरण और तत्वों की संरचना जैसे प्रयोग किए और पूरे एक चंद्र दिवस (पृथ्वी के लगभग 14 दिन) तक कार्य किया।
चंद्रयान-3 को कब और कहाँ से लॉन्च किया गया था?
चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। यह मिशन सुरक्षित सॉफ्ट-लैंडिंग, रोवर संचालन और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया था।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की क्या भूमिका है?
हरदीप पुरी के अनुसार, स्पेस स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र के नवोन्मेषक भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई गति दे रहे हैं। वे साहसी विचारों को व्यावहारिक संभावनाओं में बदल रहे हैं और 'आत्मनिर्भर भारत' के अंतरिक्ष लक्ष्यों में सहायक बन रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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