भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र 10 साल में 100 लॉन्च और 548 सैटेलाइट्स के साथ नई बुलंदियों पर: हरदीप पुरी
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र 100 सफल लॉन्च और कक्षा में 548 सैटेलाइट्स के ऐतिहासिक मील के पत्थर के साथ नई ऊँचाइयों को छू रहा है। उन्होंने इसे पिछले एक दशक की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रमाण बताया।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री पुरी ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह में कहा कि चंद्रयान-1 और मंगलयान से लेकर चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 तक की यात्रा भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षा और नवाचार की भावना को रेखांकित करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्पेस स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र के नवाचारकर्ता अब भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई संभावनाओं में बदल रहे हैं।
पुरी ने कहा, 'जैसे-जैसे हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत' की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम एक तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर राष्ट्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।'
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि
23 अगस्त 2023 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 अंतरिक्षयान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतारा। इस उपलब्धि के साथ भारत, अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया। इससे भी उल्लेखनीय यह है कि भारत चंद्रमा के ऊबड़-खाबड़ दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुँचने वाला पहला देश बना।
चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के ज़रिये प्रक्षेपित किया गया था। इसे तीन प्रमुख क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया था: चंद्रमा पर सुरक्षित सॉफ्ट-लैंडिंग, सतह पर रोवर का संचालन और वैज्ञानिक प्रयोग।
प्रज्ञान रोवर के प्रयोग
लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर ने विक्रम लैंडर से बाहर निकलकर चंद्रमा की सतह पर अन्वेषण शुरू किया। इस अभियान में चंद्रमा की सतह का तापमान, भूकंपीय गतिविधियाँ, प्लाज़्मा का वातावरण और तत्वों की संरचना जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया गया। इसरो के अनुसार, लैंडर और रोवर दोनों एक चंद्र दिवस — जो पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर होता है — तक सफलतापूर्वक काम करते रहे।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का महत्व
पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस चंद्रयान-3 की सफलता के ठीक एक वर्ष बाद, 23 अगस्त 2024 को मनाया गया। इसका उद्देश्य न केवल उस ऐतिहासिक लैंडिंग को स्मरण करना था, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की व्यापक उपलब्धियों का उत्सव मनाना भी था। गौरतलब है कि यह दिवस अब प्रतिवर्ष मनाया जाता है, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक राष्ट्रीय प्रेरणा के रूप में स्थापित करता है।
आगे की राह
मंत्री पुरी के अनुसार, भारत के प्रतिभाशाली युवा और उभरते स्पेस स्टार्टअप इस यात्रा को और गति देंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेज़ी से विस्तार पा रही है और भारत उसमें एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभर रहा है।