भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में 440 स्टार्टअप सक्रिय, इसरो प्रमुख ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर गिनाई उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
इसरो के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने 23 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह में घोषणा की कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में अब लगभग 440 स्टार्टअप सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। यह आँकड़ा उस उद्योग में निजी भागीदारी के उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाता है, जिस पर दशकों तक सरकारी संस्थानों का एकाधिकार रहा।
सुधारों के बाद स्टार्टअप क्रांति
डॉ. नारायणन ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में नीतिगत सुधारों के बाद देश में स्टार्टअप की संख्या में तेज़ उछाल आया है। इन सुधारों ने निजी कंपनियों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं, जिससे भारत का अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की महत्वाकांक्षी कोशिशों में जुटा है। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले तक इस क्षेत्र में निजी कंपनियों की उपस्थिति नगण्य थी।
चंद्रयान से गगनयान तक: प्रमुख उपलब्धियाँ
इसरो प्रमुख ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने चंद्रयान-1 द्वारा चंद्रमा पर जल-अणुओं की ऐतिहासिक खोज, चंद्रयान-2 में प्रयुक्त उन्नत कैमरा प्रौद्योगिकी और 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग का विशेष रूप से ज़िक्र किया। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस इसी ऐतिहासिक लैंडिंग की वर्षगाँठ पर मनाया जाता है।
डॉ. नारायणन ने यह भी रेखांकित किया कि 1962 में शुरू हुआ भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब अपने प्रारंभिक चरण से बहुत आगे निकल चुका है और आज यह आम नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाला कार्यक्रम बन गया है।
गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारी
इसरो प्रमुख ने बताया कि भारत गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इसके साथ ही प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को सरकार की मंजूरी मिल चुकी है और 2035 तक इस स्टेशन को स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम का विषय और चर्चाएँ
यह समारोह इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा 'विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा' विषय पर आयोजित किया गया। इसमें युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में करियर के लिए प्रेरित करने, भारत के नए अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और महत्वाकांक्षी सरकारी मिशनों के साथ, भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की राह पर है।