24 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सावन के अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ में 60,000+ भक्त, वाराणसी-उज्जैन-पुरी में कड़ी सुरक्षा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सावन के अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ में 60,000+ भक्त, वाराणसी-उज्जैन-पुरी में कड़ी सुरक्षा

सारांश

सावन के अंतिम सोमवार पर देशभर के शिवालय श्रद्धा से गूंज उठे — काशी विश्वनाथ में सुबह 5 बजे तक 60,000 से अधिक दर्शन, उज्जैन में भस्म आरती का जादू, और पुरी से बक्सर तक कांवड़ियों का सैलाब। यह सावन 2026 का सबसे बड़ा एकल धार्मिक जमावड़ा रहा।

मुख्य बातें

24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार पर देशभर के शिवालयों में लाखों श्रद्धालु उमड़े।
काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में सुबह 5 बजे तक 60,000 से अधिक भक्त दर्शन कर चुके थे।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में विशेष भस्म आरती और रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ।
बक्सर में जिला मजिस्ट्रेट साहिला और SP शुभम आर्य ने कांवड़िया मार्ग का स्वयं निरीक्षण किया।
पुरी में हज़ारों कांवड़ियों ने जगन्नाथ दर्शन किए; पारंपरिक 'द्वारा फीता नीति' संपन्न हुई।
एटा, अहमदाबाद, मुज़फ्फरपुर सहित देश के कोने-कोने में विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए गए।

सावन के पावन महीने के अंतिम सोमवार, 24 अगस्त को देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम से लेकर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और ओडिशा के पुरी तक, लाखों भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुखी जीवन की कामना की। भारी भीड़ को देखते हुए सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए।

काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धा का महासैलाब

वाराणसी में सोमवार की सुबह 5 बजे तक ही 60,000 से अधिक भक्त काशी विश्वनाथ के दर्शन कर चुके थे। यह जानकारी वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने दी। देश के कोने-कोने से आए भक्त मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए लंबी कतारों में धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे। मंदिर परिसर को रुद्राक्ष और ताज़े फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।

उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती का विशेष आकर्षण

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक में सम्मिलित होने के लिए सुबह से ही मंदिर पहुँचने लगे। एक श्रद्धालु ने बताया, "सावन का आखिरी सोमवार मेरे लिए बहुत खास है, क्योंकि मुझे सुबह-सुबह महाकाल की भस्म आरती देखने का मौका मिला।" यह ऐसे समय में आया है जब सावन के प्रत्येक सोमवार को महाकालेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है।

अन्य राज्यों में भी भक्तिमय माहौल

उत्तर प्रदेश के एटा स्थित कैलाश मंदिर में भारी भीड़ जुटी और भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। गुजरात के अहमदाबाद में सरदारनगर के एक शिव मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने पवित्र अनुष्ठानों में भाग लिया। बिहार के मुज़फ्फरपुर में बाबा गरीब नाथ धाम में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

बिहार के बक्सर में जिला मजिस्ट्रेट साहिला और पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने रामरेखा घाट से बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर तक कांवड़िया मार्ग पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और स्वयं मंदिर में पूजा-अर्चना की। एक स्थानीय भक्त ने बताया कि बक्सर भर से लोग अपनी मन्नतें लेकर आए और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे।

पुरी में 'द्वारा फीता नीति' के साथ भव्य आयोजन

ओडिशा के पुरी में सावन के अंतिम सोमवार पर हज़ारों कांवड़िया भक्तों ने महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन किए। भक्तिपूर्ण वातावरण में मंदिर के कपाट खुलने की पारंपरिक रस्म 'द्वारा फीता नीति' संपन्न की गई। गौरतलब है कि पुरी में शिव और वैष्णव दोनों परंपराओं का यह अनूठा संगम सावन में विशेष रूप से दर्शनीय होता है।

धार्मिक महत्व और आगे की तैयारी

भगवान शिव के भक्तों के लिए सावन का अंतिम सोमवार विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। देशभर के मंदिरों में मंत्रोच्चार, प्रार्थना और विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। अब सावन समाप्त होने के साथ ही मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन अगले धार्मिक पर्वों की तैयारियों में जुट जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 भक्तों का आँकड़ा बताता है कि धार्मिक पर्यटन और आस्था-आधारित भीड़ प्रबंधन अब प्रशासन के लिए साल-दर-साल बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वाराणसी से पुरी तक जिला मजिस्ट्रेटों का स्वयं मार्ग-निरीक्षण करना यह संकेत देता है कि भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी अब केवल मंदिर प्रशासन पर नहीं, बल्कि सिविल और पुलिस तंत्र पर भी है। हालाँकि, बड़े तीर्थ स्थलों पर बुनियादी ढाँचे — पार्किंग, चिकित्सा सुविधा, पेयजल — की पर्याप्तता पर सवाल हर वर्ष उठते हैं, जिनका दीर्घकालिक समाधान अभी भी प्रतीक्षित है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन का आखिरी सोमवार 2026 में कब है?
सावन का आखिरी सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ा। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में विशेष जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और भस्म आरती का आयोजन किया गया।
काशी विश्वनाथ में सावन के आखिरी सोमवार पर कितने भक्त आए?
वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार के अनुसार, सुबह 5 बजे तक ही 60,000 से अधिक भक्त काशी विश्वनाथ के दर्शन कर चुके थे। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ की पूजा-अर्चना के लिए पहुँचे।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सावन सोमवार पर क्या खास था?
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार पर विशेष भस्म आरती और रुद्राभिषेक समारोह आयोजित किया गया। भक्तों ने सुबह से ही मंदिर में पहुँचकर पवित्र अनुष्ठानों में भाग लिया।
पुरी में सावन के आखिरी सोमवार पर क्या हुआ?
ओडिशा के पुरी में हज़ारों कांवड़िया भक्तों ने महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन किए और मंदिर के कपाट खुलने की पारंपरिक रस्म 'द्वारा फीता नीति' संपन्न की गई। भक्तिपूर्ण माहौल में विशेष पूजा-अर्चना हुई।
सावन के आखिरी सोमवार पर सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
वाराणसी, उज्जैन, बक्सर और पुरी सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए। बक्सर में जिला मजिस्ट्रेट साहिला और पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने स्वयं रामरेखा घाट से बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर तक कांवड़िया मार्ग का निरीक्षण किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले