सावन के अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ में 60,000+ भक्त, वाराणसी-उज्जैन-पुरी में कड़ी सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
सावन के पावन महीने के अंतिम सोमवार, 24 अगस्त को देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम से लेकर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और ओडिशा के पुरी तक, लाखों भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुखी जीवन की कामना की। भारी भीड़ को देखते हुए सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए।
काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धा का महासैलाब
वाराणसी में सोमवार की सुबह 5 बजे तक ही 60,000 से अधिक भक्त काशी विश्वनाथ के दर्शन कर चुके थे। यह जानकारी वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने दी। देश के कोने-कोने से आए भक्त मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए लंबी कतारों में धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे। मंदिर परिसर को रुद्राक्ष और ताज़े फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती का विशेष आकर्षण
मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक में सम्मिलित होने के लिए सुबह से ही मंदिर पहुँचने लगे। एक श्रद्धालु ने बताया, "सावन का आखिरी सोमवार मेरे लिए बहुत खास है, क्योंकि मुझे सुबह-सुबह महाकाल की भस्म आरती देखने का मौका मिला।" यह ऐसे समय में आया है जब सावन के प्रत्येक सोमवार को महाकालेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है।
अन्य राज्यों में भी भक्तिमय माहौल
उत्तर प्रदेश के एटा स्थित कैलाश मंदिर में भारी भीड़ जुटी और भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। गुजरात के अहमदाबाद में सरदारनगर के एक शिव मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने पवित्र अनुष्ठानों में भाग लिया। बिहार के मुज़फ्फरपुर में बाबा गरीब नाथ धाम में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
बिहार के बक्सर में जिला मजिस्ट्रेट साहिला और पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने रामरेखा घाट से बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर तक कांवड़िया मार्ग पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और स्वयं मंदिर में पूजा-अर्चना की। एक स्थानीय भक्त ने बताया कि बक्सर भर से लोग अपनी मन्नतें लेकर आए और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे।
पुरी में 'द्वारा फीता नीति' के साथ भव्य आयोजन
ओडिशा के पुरी में सावन के अंतिम सोमवार पर हज़ारों कांवड़िया भक्तों ने महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन किए। भक्तिपूर्ण वातावरण में मंदिर के कपाट खुलने की पारंपरिक रस्म 'द्वारा फीता नीति' संपन्न की गई। गौरतलब है कि पुरी में शिव और वैष्णव दोनों परंपराओं का यह अनूठा संगम सावन में विशेष रूप से दर्शनीय होता है।
धार्मिक महत्व और आगे की तैयारी
भगवान शिव के भक्तों के लिए सावन का अंतिम सोमवार विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। देशभर के मंदिरों में मंत्रोच्चार, प्रार्थना और विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। अब सावन समाप्त होने के साथ ही मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन अगले धार्मिक पर्वों की तैयारियों में जुट जाएगा।