11 अगस्त 2026
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सावन शिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 'हर-हर महादेव' से गूंजी काशी

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सावन शिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 'हर-हर महादेव' से गूंजी काशी

सारांश

सावन शिवरात्रि पर वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में आस्था का सैलाब उमड़ा — मंगला आरती से दर्शन तक 'हर-हर महादेव' की गूंज। मुंबई के बाबुलनाथ और पटना के शिव मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़; प्रशासन ने ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग से व्यवस्था संभाली।

मुख्य बातें

11 अगस्त 2026 को सावन मास की शिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी।
मंगला आरती से ही कतारें लगनी शुरू हो गईं; भक्तों ने जल, दूध, दही और बेलपत्र से बाबा का जलाभिषेक किया।
प्रशासन ने ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग के जरिए भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया।
मुंबई के श्री बाबुलनाथ मंदिर और पटना के शिव मंदिरों में भी सावन शिवरात्रि पर भक्तों का जमावड़ा रहा।
पुजारियों के अनुसार मंगलवार को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का धार्मिक महत्व और अधिक माना जाता है।

वाराणसी में 11 अगस्त 2026 को सावन मास की शिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। मंगला आरती के साथ ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया और कपाट खुलते ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लग गईं। पूरा धाम 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा।

मंदिर की भव्य सजावट और व्यवस्था

इस पवित्र अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम को रंग-बिरंगे फूलों और विशेष विद्युत सज्जा से सजाया गया। मान्यता के अनुसार, सावन मास की शिवरात्रि पर बाबा को जल, दूध, दही और बेलपत्र अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ देश के दूर-दूर के कोनों से आए श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर जलाभिषेक का इंतजार करते रहे।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

बाबा के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु कमलेश कुमार ने कहा, 'शिवरात्रि के पवित्र मौके पर यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। इंतज़ाम अच्छे हैं। हम यहां आकर बहुत खुश हैं।' वहीं, श्रद्धालु अरुण कुमार झा ने सावन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'सोमवार हो, मंगलवार हो, बुधवार हो — पूरे सावन बाबा के जलाभिषेक का बहुत महत्व है। यहां की व्यवस्थाएं अच्छी हैं, कहीं से कोई शिकवा-शिकायत नहीं।'

एक अन्य श्रद्धालु प्रथा अवस्थी ने कहा, 'सावन की शिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दिन बाबा को जल अर्पित करते हैं। यहां काफी भीड़ है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बढ़िया है।'

प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था

भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए। ड्रोन से भीड़ की निगरानी की गई और बैरिकेडिंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। यह ऐसे समय में आया है जब सावन के हर सोमवार और विशेष पर्वों पर काशी विश्वनाथ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

देशभर के शिवालयों में उत्सव का माहौल

मुंबई के श्री बाबुलनाथ मंदिर में भी सावन शिवरात्रि पर भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वहां के एक पुजारी ने बताया, 'श्रावण का महीना बहुत शुभ माना जाता है और इस महीने में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है, खासकर तब जब यह मंगलवार को पड़ती है।' इसी प्रकार बिहार की राजधानी पटना में भी सुबह से शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जहाँ भक्त जलाभिषेक कर भगवान महादेव से कृपा-दृष्टि बनाए रखने की प्रार्थना करते रहे।

आगे की स्थिति

सावन मास के शेष सोमवारों और आगामी पर्वों पर भी काशी विश्वनाथ धाम सहित देशभर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2021 में नवनिर्मित कॉरिडोर के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या में आई संरचनात्मक वृद्धि का प्रमाण भी है। गौरतलब है कि प्रशासन की ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग व्यवस्था की श्रद्धालुओं ने सराहना की — यह उन आलोचनाओं के विपरीत है जो पहले भीड़ प्रबंधन की कमियों को लेकर उठती थीं। हालांकि, बड़े पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचे और आपातकालीन प्रबंधन पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक रहेगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन शिवरात्रि का क्या महत्व है?
सावन मास की शिवरात्रि को भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जल, दूध, दही और बेलपत्र से जलाभिषेक करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। जब यह पर्व मंगलवार को पड़ता है, तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
काशी विश्वनाथ धाम में सावन शिवरात्रि पर क्या विशेष व्यवस्था की गई?
वाराणसी प्रशासन ने भारी भीड़ के मद्देनजर ड्रोन से निगरानी और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की। मंदिर को फूलों और विशेष विद्युत सज्जा से सजाया गया और श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराए गए।
11 अगस्त 2026 को काशी विश्वनाथ में कितनी भीड़ रही?
मंगला आरती से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया और कपाट खुलते ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लग गईं। सटीक संख्या आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई, लेकिन प्रशासन को ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग का सहारा लेना पड़ा।
देश के अन्य शिव मंदिरों में सावन शिवरात्रि कैसे मनाई गई?
मुंबई के श्री बाबुलनाथ मंदिर और बिहार की राजधानी पटना के शिव मंदिरों में भी सुबह से भक्तों की भारी भीड़ रही। भक्तों ने जलाभिषेक कर भगवान महादेव से आशीर्वाद की प्रार्थना की।
काशी विश्वनाथ में जलाभिषेक के लिए क्या चढ़ाया जाता है?
मान्यता के अनुसार सावन शिवरात्रि पर बाबा को जल, दूध, दही और बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है। ये सभी सामग्री भगवान शिव को प्रिय मानी जाती हैं और इन्हें चढ़ाने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
राष्ट्र प्रेस
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