23 अगस्त 2026
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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2035 तक ₹40-45 अरब डॉलर के पार, स्टार्टअप संख्या 1 से 440 हुई

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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2035 तक ₹40-45 अरब डॉलर के पार, स्टार्टअप संख्या 1 से 440 हुई

सारांश

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र महज़ एक दशक में 1 स्टार्टअप से 440 तक पहुँचा, निजी निवेश छह गुना बढ़ा और NSIL का राजस्व दस गुना। सरकारी आँकड़े बताते हैं कि 9 अरब डॉलर की यह अर्थव्यवस्था 2035 तक 40-45 अरब डॉलर का रूप ले सकती है — यह सिर्फ संख्याएँ नहीं, एक नई औद्योगिक क्रांति की रूपरेखा है।

मुख्य बातें

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में 9 अरब डॉलर पर है; अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुँचने का सरकारी अनुमान।
पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या 2014 में 1 से बढ़कर अगस्त 2026 तक लगभग 440 हुई।
निजी निवेश वित्त वर्ष 2021-22 के 100.5 मिलियन डॉलर से छह गुना बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर (मार्च 2026 तक)।
52 NGE को 113 ऑथराइजेशन ; 18 स्टार्टअप को उपग्रह, पेलोड और लॉन्च सेवाओं की अनुमति।
NSIL का राजस्व ₹321.77 करोड़ (2021-22) से बढ़कर ₹3,000 करोड़ से अधिक (2024-25)।
IN-SPACe ने 31 जनवरी 2026 तक इसरो की 71 तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण किया।

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में 9 अरब डॉलर तक पहुँच चुकी है और सरकारी आँकड़ों के अनुसार अगले एक दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक विस्तार का अनुमान है। 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर जारी ताज़ा सरकारी डेटा में यह जानकारी सामने आई, जो देश के तेज़ी से बढ़ते अंतरिक्ष इकोसिस्टम की तस्वीर पेश करती है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्फोटक विस्तार

भारत में पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या 2014 में महज़ 1 थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर लगभग 440 हो गई है — यह वृद्धि एक दशक में चार सौ गुना से भी अधिक है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने के बाद से उद्यमिता की एक नई लहर आई है।

निजी निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक है। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश वित्त वर्ष 2021-22 के 100.5 मिलियन डॉलर से लगभग छह गुना बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया जा चुका है।

नियामकीय ढाँचा और प्राधिकरण

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGE) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप शामिल हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति प्रदान की गई है।

गौरतलब है कि भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने इस विस्तार को और गति दी। इस नीति के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) तथा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की भूमिकाओं को स्पष्ट किया गया।

NSIL और IN-SPACe की बढ़ती भूमिका

इसरो की वाणिज्यिक शाखा NSIL लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराती है तथा इसरो की प्रौद्योगिकियों को भारतीय उद्योगों तक पहुँचाती है। NSIL का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 के ₹321.77 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹3,000 करोड़ से अधिक हो गया — लगभग दस गुना की वृद्धि।

IN-SPACe सिंगल-विंडो व्यवस्था के माध्यम से निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में सहायता की।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है — वह तारीख जब 2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी। इस पृष्ठभूमि में जारी आँकड़े भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को एक ठोस आर्थिक आधार देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत निरंतरता बनी रही, तो भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अनुमान तब तक महज़ आकांक्षा है जब तक क्रियान्वयन की गति नीतिगत घोषणाओं के साथ तालमेल न बैठाए। भारत ने 2020 में निजी भागीदारी का द्वार खोला, फिर भी वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है — जबकि अमेरिका और चीन दशकों से इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहे हैं। स्टार्टअप की संख्या बढ़ना उत्साहजनक है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनते हैं और कितने वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा कर पाते हैं। IN-SPACe और NSIL की बढ़ती भूमिका सही दिशा में है, परंतु नियामकीय स्पष्टता और दीर्घकालिक वित्त पोषण के बिना यह उछाल क्षणिक भी हो सकता है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अभी कितनी बड़ी है और भविष्य में कितनी होगी?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में 9 अरब डॉलर की है और अगले एक दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। यह विस्तार मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और नीतिगत सुधारों पर आधारित है।
भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इतनी तेज़ी से कैसे बढ़ी?
2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने और 2023 की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के बाद स्टार्टअप की संख्या 2014 के 1 से बढ़कर अगस्त 2026 तक लगभग 440 हो गई। IN-SPACe की सिंगल-विंडो व्यवस्था और इसरो की तकनीकों के हस्तांतरण ने इस वृद्धि को गति दी।
NSIL क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) इसरो की वाणिज्यिक शाखा है जो लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएँ प्रदान करती है। इसका राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 के ₹321.77 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹3,000 करोड़ से अधिक हो गया।
IN-SPACe का काम क्या है?
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को अनुमति देता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में सहायता की।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त को क्यों मनाया जाता है?
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी, इसलिए इस तारीख को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को रेखांकित करने का अवसर भी बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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