श्री बूढ़ा अमरनाथ मंदिर, पुंछ: श्रावण में उमड़ी भीड़, दर्शन समय रात 12 बजे तक बढ़ाया
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की मंडी तहसील में स्थित प्राचीन धाम श्री बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में इस श्रावण मास में श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़ उमड़ रही है। जम्मू-कश्मीर सहित देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिदिन हजारों भक्त भगवान शिव के स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं।
दर्शन समय में बदलाव
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन का समय पहले की तुलना में काफी विस्तारित कर दिया है। पहले मंदिर सुबह 5 बजे आरती के लिए खोला जाता था और आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाता था। अब मंदिर सुबह 3 बजे आरती के लिए और सुबह 4 बजे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जा रहा है। शाम 7 बजे की आरती के बाद रात 12 बजे तक भक्त दर्शन-पूजन कर सकते हैं।
मंदिर समिति और पुजारी की बात
मंदिर समिति के महासचिव अनीश मिसरी और मुख्य पुजारी पंडित अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि इस वर्ष यात्रियों की भीड़ पहले से कहीं अधिक है। पंडित अरुण शर्मा ने कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं, हर साल सावन के महीने में यहाँ बुड्ढा अमरनाथ यात्रा शुरू होती है और इस साल भी यह यात्रा चल रही है। मंदिर साल भर खुला रहता है, इसलिए भक्त कभी भी आकर भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि समय विस्तार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी भक्त बिना दर्शन किए वापस न लौटे।
श्रद्धालुओं की संख्या और विशेष जत्थे
महासचिव अनीश मिसरी के अनुसार, सोमवार को विश्व हिंदू परिषद का छठा जत्था दर्शन के लिए पहुँचा। रविवार को 2,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, और स्थानीय निवासी भी बड़ी संख्या में प्रतिदिन मंदिर आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह मंदिर श्रावण मास में विशेष महत्त्व रखता है और इस अवधि में यात्रा का आयोजन वर्षों से चली आ रही परंपरा है।
भंडारा और भक्ति का माहौल
मंदिर प्रांगण में चौबीसों घंटे भंडारा जारी है, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को प्रसाद और भोजन की व्यवस्था मिल रही है। देर रात तक मंदिर खुला रहने के कारण शिव भक्त दर्शन-पूजन के बाद ढोल की थाप पर नृत्य करते और भजन-कीर्तन करते नज़र आते हैं। यह दृश्य मंदिर परिसर को एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र में बदल देता है।
आगे क्या
श्रावण मास की समाप्ति तक यह विशेष दर्शन व्यवस्था जारी रहने की संभावना है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि भीड़ की स्थिति के अनुसार आवश्यक प्रबंध किए जाते रहेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।