18 अगस्त 2026
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पुंछ के बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में श्रावण यात्रा: श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़, बोले — 'भय का माहौल अब नहीं'

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पुंछ के बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में श्रावण यात्रा: श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़, बोले — 'भय का माहौल अब नहीं'

सारांश

पुंछ के बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में इस श्रावण मास यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष से दोगुनी हो गई। 2005 में बजरंग दल द्वारा पुनर्जीवित की गई इस यात्रा परंपरा में अब निर्भीक श्रद्धालु उमड़ रहे हैं — और यह पुंछ में बदलते माहौल की साफ तस्वीर है।

मुख्य बातें

पुंछ के बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में 18 अगस्त को श्रावण यात्रा के दौरान असाधारण भीड़ उमड़ी।
श्रद्धालुओं के अनुसार इस वर्ष यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी हो गई है।
यात्रा की परंपरा 2005 में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद द्वारा पुनः स्थापित की गई थी।
स्थानीय प्रशासन, उपराज्यपाल कार्यालय और सुरक्षा बल मिलकर यात्रा की सफलता सुनिश्चित कर रहे हैं।
जयपुर प्रांत नियोजक रामेश्वर गुर्जर ने कहा — क्षेत्र में बिल्कुल भी डर का माहौल नहीं है।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की मंडी तहसील के राजपुरा गाँव में स्थित प्राचीन बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में इस वर्ष श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़ उमड़ी। 18 अगस्त को देश के विभिन्न कोनों से पहुँचे तीर्थयात्रियों ने कहा कि यात्रा निर्बाध रही और क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भय या असुरक्षा का भाव नहीं है। श्रद्धालुओं के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई है।

मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर को स्वयंभू शिवलिंग का स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यह स्थल सृष्टि की उत्पत्ति से भी पूर्व का है। यह मंदिर कश्मीर के उन प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है जो दशकों तक आतंकवाद की छाया में रहा, किंतु अब धीरे-धीरे पुनर्जीवित हो रहा है।

2005 से चली आ रही यात्रा परंपरा

मंदिर में उपस्थित एक श्रद्धालु ने बताया कि 2005 के आसपास जब इस क्षेत्र में आतंकवाद का प्रसार चरम पर था, तब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता पूरे भारत से यहाँ पहुँचे और यात्रा की परंपरा को पुनः स्थापित किया। उन्होंने कहा, 2016 की इस ऐतिहासिक यात्रा के पहले जत्थे ने आज यहाँ दर्शन किए हैं। उनके अनुसार, 2005 से चली आ रही यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।

श्रद्धालु ने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन, उपराज्यपाल कार्यालय और बजरंग दल कंधे से कंधा मिलाकर इस यात्रा की सफलता के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके शब्दों में, 2005 में लिया गया संकल्प अब सिद्धि की दिशा में अग्रसर है और आपसी सौहार्द में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यात्रियों की संख्या दोगुनी, भय का माहौल खत्म

जयपुर प्रांत नियोजक रामेश्वर गुर्जर ने बताया कि 2005 में जब यह धारणा फैल रही थी कि आतंकवादियों ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है और अमरनाथ यात्रा संभव नहीं, तब बजरंग दल ने देशभर के हिंदुओं तक यह संदेश पहुँचाया कि बाबा के दरबार में जाना और जलाभिषेक करना उनका अधिकार है। उनके अनुसार, यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी हो गई है।

गुर्जर ने आगे कहा कि सुरक्षा बलों की सक्रियता के चलते अब क्षेत्र में डर का कोई माहौल नहीं है और श्रद्धालु निर्भीक होकर यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में लाखों की संख्या में तीर्थयात्री यहाँ आएँगे।

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था

यात्रा के सुचारु संचालन में स्थानीय प्रशासन की भूमिका को श्रद्धालुओं ने सराहा। सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासनिक समन्वय के चलते यात्रा मार्ग पर किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। गौरतलब है कि पुंछ जिला सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण पहले संवेदनशील माना जाता था, किंतु हाल के वर्षों में यहाँ धार्मिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं।

आगे की राह

श्रद्धालुओं और आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि श्रावण मास के शेष सप्ताहों में भी तीर्थयात्रियों का आगमन इसी प्रकार जारी रहेगा। बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर की यह यात्रा क्षेत्र में सामान्य स्थिति की वापसी का प्रतीक बनती जा रही है — और यह संकेत देती है कि पुंछ में धार्मिक पर्यटन एक नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु यह ध्यान देना ज़रूरी है कि श्रद्धालुओं के बयान स्वाभाविक रूप से भावनात्मक हैं — और 'दोगुनी संख्या' का दावा अभी तक प्रशासनिक आँकड़ों से सत्यापित नहीं हुआ है। पुंछ जैसे सीमावर्ती जिले में धार्मिक पर्यटन की वापसी सामाजिक सामान्यीकरण का सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे स्थायी शांति का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि ऐसी यात्राओं की निरंतरता स्थानीय समुदायों के साथ दीर्घकालिक संवाद पर भी निर्भर करती है — केवल सुरक्षा बल और धार्मिक संगठनों के समन्वय पर नहीं।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की मंडी तहसील के राजपुरा गाँव में स्थित है। इसे स्वयंभू शिवलिंग का स्वरूप माना जाता है और यह क्षेत्र के प्राचीनतम तीर्थस्थलों में से एक है।
इस वर्ष श्रावण यात्रा में भीड़ क्यों बढ़ी?
श्रद्धालुओं और आयोजकों के अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और भय का माहौल खत्म होने से यात्रियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। इस वर्ष यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी बताई जा रही है।
बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा की परंपरा कब से शुरू हुई?
यात्रा की परंपरा 2005 में पुनः स्थापित की गई थी, जब बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता देशभर से यहाँ पहुँचे और आतंकवाद के माहौल के बावजूद यात्रा को जारी रखा। तब से यह परंपरा हर वर्ष जारी है।
यात्रा में स्थानीय प्रशासन की क्या भूमिका है?
स्थानीय प्रशासन, उपराज्यपाल कार्यालय और बजरंग दल मिलकर यात्रा के आयोजन और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा मार्ग पर पूरी तरह सुरक्षित माहौल है।
क्या पुंछ में तीर्थयात्रा अब पूरी तरह सुरक्षित है?
श्रद्धालुओं और आयोजकों ने यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बताया है। जयपुर प्रांत नियोजक रामेश्वर गुर्जर के अनुसार, क्षेत्र में बिल्कुल भी डर का माहौल नहीं है और तीर्थयात्री निर्भीक होकर दर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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