गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर पलटवार: 'पहले अपनी पार्टी सँभालो, फिर उपदेश दो'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 5 अगस्त 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें दूसरों को उपदेश देने से पहले अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माँग की थी कि वे 'छात्रों को माफ करने के बजाय छात्रों से माफी माँगें।'
गिरिराज सिंह का सीधा हमला
गिरिराज सिंह ने ग्रामीण बिहार की एक कहावत का हवाला देते हुए कहा, 'अपना ब्याह नहीं, सूरदास के बरतूहारी।' उनका आशय था कि राहुल गांधी खुद अपनी पार्टी को दिशा देने में असमर्थ हैं और दूसरों को राह दिखाने निकले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश को भविष्य में कभी भी विपक्ष का ऐसा 'दुर्भाग्यपूर्ण नेता' न मिले।
विपक्ष की विरासत पर सवाल
गिरिराज सिंह ने कहा, 'भारत ने विपक्ष के कई बेहतरीन नेता देखे हैं, लेकिन इनके जैसा नेता नहीं देखा।' उन्होंने राहुल गांधी को पूर्व नेताओं से सीखने की सलाह दी और आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन में उनकी 'सद्भावना शून्य थी।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस छात्र मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।
महबूबा मुफ्ती पर भी निशाना
इसी प्रेस वार्ता में गिरिराज सिंह ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर भी कड़ी टिप्पणी की। श्रीनगर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ से पहले उनके विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'महबूबा मुफ्ती आतंकवादी समर्थक हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने उन्हें सुधारने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर गठबंधन से अलग हो गई।
अनुच्छेद 370 हटाने को बताया ऐतिहासिक
गिरिराज सिंह ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने को भारत के इतिहास का एक महान दिन करार दिया। उन्होंने कहा, 'जिस तरह हम 15 अगस्त और 26 जनवरी को मनाते हैं, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण दिन है।' उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल के 'एक देश, एक निशान, एक प्रधान, एक विधान' के सपने को साकार किया।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 की वर्षगांठ के इर्द-गिर्द सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज होना एक स्थापित राजनीतिक पैटर्न बन चुका है। इस बार छात्र आंदोलन का मुद्दा भी इसमें जुड़ गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच वाकयुद्ध और तीखा हो गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से जवाबी प्रतिक्रिया की संभावना है।