कर्नाटक मंत्री रायरेड्डी का बचाव: 'इस्लाम में नेक विचार हैं, किसी धर्म को कमतर नहीं कहा'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी ने सोमवार, 31 अगस्त को अपने पहले के उस बयान का बचाव किया, जिसमें उन्होंने इस्लाम को 'महान धर्म' बताया था। रायरेड्डी ने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया और उन्होंने कभी नहीं कहा कि दूसरे धर्म कमतर हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
मूल विवाद तब शुरू हुआ जब रायरेड्डी ने कुकानूर में मुस्लिम समुदाय द्वारा आयोजित एक निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह में बोलते हुए कहा था कि इस्लाम एक महान धर्म है और हर धर्म से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने मक्का जाने की इच्छा भी जताई थी, जिसे लेकर भी सवाल उठे।
मंत्री की सफाई
पत्रकारों से बातचीत में रायरेड्डी ने कहा, 'मेरे बयान में क्या गलत है? मैंने कहा कि इस्लाम में नेक विचार हैं। मैंने यह नहीं कहा कि दूसरे धर्म कमतर हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अगर मैं कहूं कि यह आदमी अच्छा है और आप समझें कि आप बुरे हैं, तो मैं क्या करूं?'
मक्का जाने के बयान पर सफाई देते हुए रायरेड्डी ने कहा कि उनका हज यात्रा पर जाने का कोई इरादा नहीं था। 'मैंने यह नहीं कहा कि मैं हज के लिए जाऊंगा। मैं हज पर नहीं जा सकता। मैं पढ़ाई के मकसद से मक्का जाना चाहता हूं।'
धार्मिक अध्ययन का दावा
रायरेड्डी ने अपनी धार्मिक जिज्ञासा को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि वे अलग-अलग धर्मों और दर्शनों का अध्ययन करने के लिए कई देशों और तीर्थस्थलों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे काशी और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए गए, यहूदी धर्म के अध्ययन के लिए इजरायल की यात्रा की, और कन्फ्यूशियस, लाओ तथा बौद्ध धर्म को समझने के लिए चीन भी गए।
उन्होंने कहा, 'मैं किसी धर्म या जाति से नहीं जुड़ा हूं। हम मानव धर्म के हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि वे इस्लाम या ईसाई धर्म नहीं अपनाएंगे, बल्कि सभी धर्मों की अच्छी बातों को मिलाकर एक नया धर्म शुरू करने की सोच रखते हैं।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य सीटी रवि ने रायरेड्डी के बयान की कड़ी आलोचना की। रवि ने कहा, 'उन्हें अपने बयान पर शर्म आनी चाहिए।' उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित हो सकता है।
आगे क्या
यह विवाद कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती बन सकता है, जो पहले से ही धार्मिक मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है। रायरेड्डी के बयान और उनकी सफाई पर आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।