झारखंड: सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण यादव की मौत के बाद चतरा में दूसरे दिन भी सड़क जाम, तीन माँगें
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के चतरा जिले में सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद भड़के विरोध-प्रदर्शन ने 10 जुलाई को दूसरे दिन भी रफ्तार नहीं खोई। चतरा-हजारीबाग और चतरा-टांडवा-रांची मुख्य मार्गों पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा और दोनों रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। गुरुवार शाम से शुरू हुआ यह जाम शुक्रवार शाम 4 बजे तक जारी रहा।
हादसे का घटनाक्रम
यह दुर्घटना गुरुवार शाम सिमरिया थाना क्षेत्र के डेलहो घाटी के निकट हुई, जब एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार 28 वर्षीय जवान लक्ष्मण कुमार यादव को टक्कर मार दी। यादव जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में तैनात थे और करीब एक सप्ताह पहले ही एक महीने की छुट्टी पर अपने गाँव बिराजपुर (चतरा सदर थाना क्षेत्र) लौटे थे।
घायल यादव को पहले सिमरिया रेफरल अस्पताल ले जाया गया, फिर हजारीबाग और बाद में रांची रेफर किया गया। रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक जब्त कर लिया है और आरोपी की तलाश में अभियान जारी है।
प्रदर्शनकारियों की माँगें
मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव के साथ सड़क जाम कर तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — जवान के परिवार को उचित मुआवजा, फरार ट्रक चालक की तत्काल गिरफ्तारी, और चतरा-हजारीबाग मार्ग पर कोयले के परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस मार्ग से प्रतिदिन कोयले से लदे सैकड़ों ट्रक गुज़रते हैं और ओवरलोडिंग, तेज़ रफ्तार तथा नियम-कानून की अनदेखी के कारण बार-बार जानलेवा हादसे होते हैं।
नेताओं और समाज की प्रतिक्रिया
विरोध-प्रदर्शन में शामिल पूर्व श्रम मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा की कीमत पर चतरा के रास्ते हजारीबाग से कोयले का परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और एनटीपीसी पर आरोप लगाया कि ये संस्थाएँ सड़क सुरक्षा की चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर रही हैं।
सिमारिया विधानसभा क्षेत्र से जेएनएम के पूर्व उम्मीदवार मनोज चंद्र ने कहा कि जब तक कोयले की ढुलाई बंद नहीं होती और सड़क सुरक्षा के पक्के इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, अतीत में भी कोयला वाहनों से हुई दुर्घटनाओं में कई जानें जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन, सीसीएल और एनटीपीसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रशासन की कोशिशें और मौजूदा स्थिति
गतिरोध को समाप्त करने के लिए सिमारिया के बीडीओ चंद्रदेव प्रसाद, सर्कल ऑफिसर गौरव रॉय और स्टेशन हाउस ऑफिसर सूर्यप्रताप सिंह प्रदर्शनकारियों से बातचीत में जुटे रहे। रिपोर्ट लिखे जाने तक कोई समाधान नहीं निकला था और नाकेबंदी जारी थी। पुलिस ने कहा कि फरार चालक को पकड़ने की कोशिशें चल रही हैं और स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब झारखंड के कोयला खनन क्षेत्रों में भारी वाहनों से होने वाले हादसों को लेकर स्थानीय आबादी में असंतोष लंबे समय से पनप रहा है। कोयला परिवहन मार्गों पर सड़क सुरक्षा का सवाल अब एक बार फिर केंद्र में आ गया है।