पिपरवार में हाईवा से कुचलकर मौत: 30 घंटे बाद भी शव के साथ धरने पर डटे ग्रामीण, 20 लाख मुआवजे की मांग
सारांश
Key Takeaways
- उरेश लोहार उर्फ सुरेश लोहरा की 23 अप्रैल को टंडवा-पिपरवार मार्ग पर कोयला हाईवा की चपेट में आने से मौत हो गई।
- हादसे के 30 घंटे बाद भी ग्रामीण शव के साथ धरने पर डटे हैं और सड़क जाम जारी है।
- प्रदर्शनकारियों ने ₹20 लाख मुआवजा, नो-एंट्री लागू करने और ओवरलोडिंग बंद करने की मांग की है।
- सांसद प्रतिनिधि दिलीप कुमार अम्बष्ट धरना स्थल पर पहुंचे लेकिन कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया।
- सड़क जाम से विवाह सीजन में यातायात बुरी तरह प्रभावित, लोग वैकल्पिक रास्ते लेने को मजबूर।
- ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
झारखंड के चतरा जिले में टंडवा-पिपरवार मुख्य मार्ग पर बुधवार, 23 अप्रैल को कोयला ढुलाई में लगे एक अनियंत्रित हाईवा की चपेट में आने से उरेश लोहार उर्फ सुरेश लोहरा की मौके पर ही मृत्यु हो गई। हादसे के 30 घंटे से अधिक समय बाद भी आक्रोशित ग्रामीण शव के साथ धरने पर डटे हैं और मुआवजे सहित सड़क सुरक्षा की कई अहम मांगें लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। प्रशासन की निष्क्रियता से तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
पिपरवार थाना क्षेत्र के कारो गांव के समीप बुधवार को हुए इस दुर्घटना में चिरैयाटांड़ टांड़ निवासी उरेश लोहार की जान चली गई। कोयला खदानों से ढुलाई करने वाले भारी वाहन इस मार्ग पर बेरोकटोक चलते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों की जान हमेशा खतरे में रहती है। घटना की सूचना मिलते ही गांव के सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए और सड़क जाम कर धरना शुरू कर दिया।
पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद शव को धरना स्थल पर ही रखा गया है और परिजन व ग्रामीण तब तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कह रहे हैं जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं। यह प्रदर्शन अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट शर्तें रखी हैं। उनकी मांगों में मृतक के परिजनों को ₹20 लाख का मुआवजा, मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री लागू करना, वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था और कोयला ढुलाई वाहनों पर ओवरलोडिंग पर सख्त रोक शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है — इस मार्ग पर बेलगाम हाईवा पहले भी कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन चुके हैं, लेकिन हर बार प्रशासन ने आश्वासन देकर मामला ठंडा कर दिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सांसद प्रतिनिधि पहुंचे, प्रशासन अनुपस्थित
चतरा संसदीय क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि दिलीप कुमार अम्बष्ट धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने प्रशासन से वार्ता कर समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक न तो कोई वरिष्ठ जिला प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा था और न ही परिवहन विभाग या खनन कंपनी से जुड़े किसी जिम्मेदार पक्ष ने कोई पहल की थी।
यह प्रशासनिक उदासीनता ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार दुर्घटना के बाद नेता आते हैं, आश्वासन देते हैं और चले जाते हैं — लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता।
यातायात ठप, आम जनता परेशान
सड़क जाम के कारण टंडवा-पिपरवार मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। विशेष रूप से विवाह सीजन में यातायात का दबाव बढ़ने से आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग घंटों इंतजार के बाद वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं।
इस क्षेत्र में कोयला खदानों की वजह से भारी वाहनों का आवागमन वर्षों से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। झारखंड के खनन क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं का यह पैटर्न बताता है कि कोयला माफिया और परिवहन लॉबी के दबाव में नियम-कानून ताक पर रख दिए जाते हैं, जबकि आम नागरिक की जान की कोई कीमत नहीं समझी जाती।
व्यापक संदर्भ: खनन क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा की अनदेखी
झारखंड के चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जैसे कोयला बहुल जिलों में ओवरलोडेड हाईवा से होने वाली मौतें एक दीर्घकालिक समस्या है। आंकड़ों के अनुसार, इन क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में भारी वाहनों की भूमिका सबसे अधिक रहती है। सवाल यह है कि जब खनन कंपनियों को सड़क उपयोग का लाभ मिलता है, तो सड़क सुरक्षा और पीड़ित परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना और आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि चतरा जिला प्रशासन और झारखंड सरकार इस मामले में कितनी जल्दी और कितने प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करती है।