हजारीबाग में NTPC कोयला मार्ग पर हाईवा से युवक की मौत, ग्रामीणों ने ₹15 लाख मुआवजे और नौकरी की मांग पर परिवहन रोका
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव क्षेत्र में एनटीपीसी (NTPC) के कोयला परिवहन मार्ग पर 12 जुलाई को एक कोयला लदे हाईवा की चपेट में आने से नरेश कुमार महतो की मौत हो गई, जिसके बाद सैकड़ों ग्रामीणों ने 13 माइल के निकट परिवहन मार्ग पूरी तरह जाम कर दिया। इस जाम के कारण एनटीपीसी की कोयला ढुलाई ठप हो गई और सड़क के दोनों ओर कोयला लदे हाईवा सहित दर्जनों वाहनों की लंबी कतार लग गई।
हादसा कैसे हुआ
पुलिस के अनुसार, चेपाकला पंचायत निवासी नरेश कुमार महतो लोहा पुल के समीप कोयला लदे एक हाईवा की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। नरेश अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन और ग्रामीण शनिवार देर रात से ही सड़क पर उतर आए। रविवार को प्रदर्शन और तेज हो गया तथा ग्रामीणों ने कोयला परिवहन पूरी तरह ठप कर दिया।
ग्रामीणों की मांगें
चेपाकला पंचायत के मुखिया अनिकेत कुमार नायक के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने तीन प्रमुख माँगें रखीं — मृतक के आश्रित परिवार को ₹15 लाख का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, और हादसे के लिए जिम्मेदार चालक के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक इन माँगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, कोयला ढुलाई पुनः शुरू नहीं होने दी जाएगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार और भारी संख्या में चलने वाले हाईवा वाहनों के कारण दुर्घटनाएँ लगातार हो रही हैं, परन्तु पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जा रहे। उनका कहना है कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान इस मार्ग पर निरंतर जोखिम में है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही बड़कागांव के अंचलाधिकारी मनोज कुमार, थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह और डाड़ीकला ओपी प्रभारी सागेन मुर्मू पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों से वार्ता कर जाम हटाने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई सहमति नहीं बन सकी थी।
बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी घटनास्थल पहुँचीं और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। हालाँकि उनके लौटने के बाद भी ग्रामीण अपनी माँगों पर अडिग रहे।
आगे क्या होगा
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि परिवहन मार्ग पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा तथा रोजगार नहीं मिला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कोयला खनन क्षेत्रों में भारी वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर झारखंड के कई इलाकों में सुरक्षा मानकों पर सवाल उठते रहे हैं।