चतरा में कोयला वाहन से सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण यादव की मौत, 20 घंटे से अधिक सड़क जाम जारी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र में 10 जुलाई 2026 को एक कोयला लदे तेज रफ्तार हाईवा ने सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव (28) को कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के विरोध में स्थानीय लोगों और परिजनों ने चतरा-हजारीबाग एवं चतरा-टंडवा-रांची मुख्य मार्ग पर 20 घंटे से अधिक समय से सड़क जाम कर रखा है।
हादसे का घटनाक्रम
गुरुवार शाम सिमरिया थाना क्षेत्र के देल्हो घाटी के निकट एक तेज रफ्तार कोयला लदा हाईवा बाइक सवार जवान लक्ष्मण कुमार यादव से टकरा गया। गंभीर रूप से घायल जवान को पहले सिमरिया रेफरल अस्पताल, फिर हजारीबाग और अंततः रांची के रिम्स रेफर किया गया, परंतु उपचार के दौरान रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। लक्ष्मण चतरा सदर थाना क्षेत्र के बिराजपुर गाँव के निवासी थे और जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ में कार्यरत थे। हादसे से करीब एक सप्ताह पहले वे एक महीने की छुट्टी पर घर लौटे थे।
हादसे के तुरंत बाद हाईवा चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है और चालक की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
प्रदर्शनकारियों की माँगें
आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने शव के साथ सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी तीन प्रमुख माँगों पर अड़े हैं — मृतक जवान के परिजनों को उचित मुआवजा, हादसे के जिम्मेदार चालक की तत्काल गिरफ्तारी, और चतरा-हजारीबाग सड़क पर कोयला ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों कोयला लदे हाईवा गुजरते हैं और तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग तथा अनियंत्रित परिचालन के चलते लगातार दुर्घटनाएँ हो रही हैं।
नेताओं की प्रतिक्रिया
आंदोलन को समर्थन देने पहुँचे पूर्व श्रम मंत्री एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि हजारीबाग का कोयला चतरा की सड़कों से ढोकर स्थानीय लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और एनटीपीसी चतरा की जनता की सुरक्षा की अनदेखी कर रही हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पूर्व सिमरिया विधानसभा प्रत्याशी मनोज चंद्रा ने चेतावनी दी कि जब तक कोयला ढुलाई पर रोक और सड़क सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन की कोशिशें
जिला प्रशासन की ओर से सिमरिया के बीडीओ चंद्रदेव प्रसाद, अंचलाधिकारी गौरव रॉय और थाना प्रभारी सूर्यप्रताप सिंह आंदोलनकारियों से लगातार वार्ता कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक — शुक्रवार शाम चार बजे — कोई समाधान नहीं निकल सका था और दोनों मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं।
व्यापक सुरक्षा सवाल
प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह पहली ऐसी घटना नहीं है — इससे पहले भी इस मार्ग पर कई लोग कोयला वाहनों की चपेट में आकर जान गँवा चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रशासन, सीसीएल, एनटीपीसी और अन्य संबंधित एजेंसियाँ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब झारखंड के कोयला खनन क्षेत्रों में भारी वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर स्थानीय समुदायों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। फरार चालक की गिरफ्तारी और प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।