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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी पर CM चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण ने PM मोदी की सराहना की

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी पर CM चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण ने PM मोदी की सराहना की

सारांश

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल समापन के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने PM मोदी की प्रशंसा की। ब्रिक्स देश वैश्विक आबादी के 50% और जीडीपी के 40% का प्रतिनिधित्व करते हैं — भारत की बढ़ती कूटनीतिक धाक का यह आयोजन बड़ा प्रमाण बना।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने PM मोदी को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी पर बधाई दी।
दोनों नेताओं ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा कीं, जिसमें नई दिल्ली घोषणापत्र को ऐतिहासिक बताया।
ब्रिक्स देश विश्व की लगभग 50% आबादी और 40% वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सम्मेलन की थीम — 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' — के तहत भारत ने ब्रिक्स अध्यक्षता का संचालन किया।
शिखर सम्मेलन में AI , ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास, जलवायु कार्रवाई और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ को मज़बूती देने पर सहमति बनी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है। दोनों नेताओं ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा करते हुए इस आयोजन को भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण बताया।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'मुझे खुशी है कि भारत ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की और दुनिया की कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को ऐसे समय में एक साथ लाया जब दुनिया में बड़े बदलाव हो रहे हैं।' उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में मजबूत बहुपक्षीय संस्थाओं, सप्लाई चेन, इनोवेशन, टिकाऊ विकास और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग पर दिया गया जोर आने वाले दशकों की वैश्विक समृद्धि की दिशा तय करेगा।

नायडू ने आगे कहा, 'आज भारत एक भरोसेमंद मंच के तौर पर उभरा है, जहाँ अलग-अलग नज़रिए वाले देश एक साथ आ सकते हैं, रचनात्मक बातचीत कर सकते हैं और आम सहमति बना सकते हैं।' उनके अनुसार, विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाते हुए आम सहमति बनाने की यह क्षमता वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक ताकत और बढ़ते रुतबे को दर्शाती है।

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का बयान

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने एक दिन पहले, रविवार को, एक्स पर जारी बयान में इस आयोजन को 'भारत के लिए गर्व का ब्रिक्स 2026' बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग 50 फीसदी आबादी और 40 फीसदी वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे इस समूह की भूमिका वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

पवन कल्याण ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' की थीम के अंतर्गत ब्रिक्स की अध्यक्षता का सफलतापूर्वक संचालन किया। उन्होंने विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के राजनयिकों, अधिकारियों और सभी समर्पित टीमों को हार्दिक बधाई दी।

शिखर सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे

पवन कल्याण ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन ने आर्थिक व वित्तीय सहयोग, व्यापार, निवेश, मजबूत सप्लाई चेन और विकास वित्त के एजेंडे को मज़बूत किया। इसके अलावा, AI, नवाचार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को भी आगे बढ़ाया गया। शांति और सुरक्षा, आतंकवाद से निपटने, जलवायु कार्रवाई, सतत विकास और 'ग्लोबल साउथ' की सामूहिक आवाज के लिए भी इस सम्मेलन में ठोस प्रयास हुए।

नई दिल्ली घोषणापत्र का महत्व

उपमुख्यमंत्री ने नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाने को साझा प्राथमिकताओं को 'सार्थक सहयोग और कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम' बताया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और विकासशील देश वैश्विक शासन में अधिक भागीदारी की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समापन था, जिसके दौरान देश ने बहुपक्षीय कूटनीति में अपनी केंद्रीय भूमिका को पुनः स्थापित किया।

आगे चलकर, नई दिल्ली घोषणापत्र में तय प्राथमिकताओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करना भारत सहित सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए अगली बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सिर्फ इस नज़रिए से देखना अधूरा होगा। 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब पश्चिम के साथ भारत के संबंध जटिल हैं और 'ग्लोबल साउथ' की एकजुटता को नए सिरे से परखा जा रहा है। असली सवाल यह है कि नई दिल्ली घोषणापत्र में दर्ज प्रतिबद्धताएँ — चाहे वह सप्लाई चेन हो, AI हो या जलवायु कार्रवाई — क्रियान्वयन के स्तर पर कितनी मज़बूत साबित होती हैं। ब्रिक्स की अंदरूनी विविधता, खासकर चीन और रूस जैसे सदस्यों की मौजूदगी में, 'आम सहमति' की राजनीति की सीमाएँ भी साफ़ दिखती हैं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कहाँ और कब हुआ?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसकी सफल मेजबानी के बाद 14 सितंबर 2026 को आंध्र प्रदेश के नेताओं ने PM मोदी की प्रशंसा की। इस आयोजन में नई दिल्ली घोषणापत्र को औपचारिक रूप से अपनाया गया।
चंद्रबाबू नायडू ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि भारत आज एक भरोसेमंद मंच के रूप में उभरा है, जहाँ अलग-अलग नज़रिए वाले देश रचनात्मक बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने नई दिल्ली घोषणापत्र में बहुपक्षीय संस्थाओं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग पर दिए गए जोर को बेहद महत्वपूर्ण बताया।
पवन कल्याण ने ब्रिक्स 2026 को लेकर क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को 'भारत के लिए गर्व का क्षण' बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक आबादी के 50% और वैश्विक जीडीपी के 40% का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए यह समूह वैश्विक परिदृश्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में किन विषयों पर जोर दिया गया?
नई दिल्ली घोषणापत्र में मजबूत बहुपक्षीय संस्थाओं, सप्लाई चेन, AI, नवाचार, ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास, जलवायु कार्रवाई और 'ग्लोबल साउथ' की सामूहिक आवाज़ को मज़बूती देने पर सहमति जताई गई। इसे सदस्य देशों के बीच साझा प्राथमिकताओं को कार्रवाई में बदलने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की थीम क्या थी?
भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की थीम 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रही। PM मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस थीम के अंतर्गत ब्रिक्स अध्यक्षता का संचालन किया और शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के साथ इसका समापन हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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