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चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिण भारत में जन्म दर में कमी को लेकर चिंता जताई, पीएम मोदी के कार्यशैली की सराहना की

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चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिण भारत में जन्म दर में कमी को लेकर चिंता जताई, पीएम मोदी के कार्यशैली की सराहना की

सारांश

आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने रायसीना डायलॉग 2026 में भारत की सहिष्णुता और संवाद पर जोर दिया और दक्षिण में घटती जन्म दर पर चिंता व्यक्त की।

मुख्य बातें

सहिष्णुता और संवाद की परंपरा भारत के विकास में महत्वपूर्ण हैं।
दक्षिण भारत में जन्म दर 1.5 है, जो चिंताजनक है।
राज्य सरकार ने जनसंख्या प्रबंधन नीति शुरू की है।
मातृत्व अवकाश और पिता की छुट्टी की व्यवस्था की गई है।
स्थिर नीतियां और सहयोग टिकाऊ विकास के लिए आवश्यक हैं।

नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को रायसीना डायलॉग 2026 में भारत की सहिष्णुता, संवाद और सहयोग की अद्भुत परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मूल्य आज भी देश की प्रगति का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “भारत में सहिष्णुता और संवाद की एक महान परंपरा है। आज राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर सहकारी संघवाद के माध्यम से कार्य कर रही हैं।”

सीएम नायडू ने कहा कि इस सहयोग के कारण भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया, “भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही सात प्रतिशत से अधिक की दर से आगे बढ़ रही है और भविष्य में इसके दस प्रतिशत से अधिक बढ़ने की संभावना है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए शासन में सहमति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने पर ध्यान देते हैं। नीतियों में स्थिरता और सहमति लंबे समय के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।”

अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए सीएम नायडू ने कहा कि स्थिर नीतियां और आपसी सहयोग ही टिकाऊ विकास और वैश्विक शांति के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा, “यह केवल अपने हितधारकों को संतुष्ट करने की बात नहीं है। पूरी दुनिया को भी विश्वास और खुशी महसूस करनी चाहिए।”

इसी कार्यक्रम के दौरान सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिण भारत में घटती जन्म दर पर चिंता व्यक्त की और आंध्र प्रदेश की नई जनसंख्या प्रबंधन नीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “दुनिया के कई देश पहले से ही बुजुर्ग आबादी की समस्या का सामना कर रहे हैं। भारत के पास अभी जनसंख्या लाभ (डेमोग्राफिक डिविडेंड) का फायदा है, जो 2047 तक रहेगा।

उन्होंने बताया कि भारत में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए औसत जन्म दर 2.1 होनी चाहिए और वर्तमान में यह लगभग 2.2 है, लेकिन दक्षिण भारत में यह केवल 1.5 है, जो बहुत कम है।”

सीएम नायडू ने कहा, “यह पहली बार है जब किसी राज्य सरकार ने जनसंख्या प्रबंधन नीति शुरू की है। यदि किसी परिवार में दूसरा बच्चा होता है, तो राज्य सरकार बच्चे के जन्म के समय 25,000 रुपए की मदद देगी। तीसरे बच्चे के लिए पांच साल तक हर महीने 1,000 रुपए दिए जाएंगे, ताकि पोषण और बच्चे के विकास में सहायता मिल सके।”

उन्होंने माता-पिता को मिलने वाली सुविधाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हम एक साल की मातृत्व अवकाश दे रहे हैं। पुरुषों को भी बच्चे की देखभाल के लिए एक या दो महीने की छुट्टी मिलेगी। बच्चों की परवरिश दोनों का कार्य है। पति और पत्नी को इसे समान रूप से निभाना चाहिए।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्होंने दक्षिण भारत में घटती जन्म दर के विषय में भी गंभीर चिंता प्रकट की है। यह स्थिति न केवल राज्य, बल्कि देश के लिए भी चिंता का विषय है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रबाबू नायडू ने किस कार्यक्रम में भाग लिया?
चंद्रबाबू नायडू ने रायसीना डायलॉग 2026 में भाग लिया।
दक्षिण भारत में जन्म दर कितनी है?
दक्षिण भारत में जन्म दर लगभग 1.5 है।
भारत की औसत जन्म दर क्या होनी चाहिए?
भारत की औसत जन्म दर 2.1 होनी चाहिए।
चंद्रबाबू नायडू ने पीएम मोदी की कार्यशैली पर क्या कहा?
उन्होंने पीएम मोदी की कार्यशैली की सराहना की और शासन में सहमति बनाने के महत्व पर जोर दिया।
राज्य सरकार द्वारा माता-पिता को कौन सी सुविधाएँ दी जा रही हैं?
राज्य सरकार एक साल की मातृत्व अवकाश और पुरुषों को बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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