30 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र में पेपर लीक और घोटालों से शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त: शिवसेना (यूबीटी) का सामना में हमला

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महाराष्ट्र में पेपर लीक और घोटालों से शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त: शिवसेना (यूबीटी) का सामना में हमला

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना ने महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है — एक माह में 10 से अधिक पेपर लीक, ₹160 करोड़ का शलार्थ घोटाला और पाठ्यक्रम में वैचारिक हस्तक्षेप। पार्टी का कहना है कि बिना ढाँचागत सुधार के सिर्फ SIT बनाना समस्या का हल नहीं।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 30 जुलाई को सामना संपादकीय में भारत और महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था को 'पूरी तरह चरमराई हुई' बताया।
महाराष्ट्र में एक माह के भीतर 10 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिनमें महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट भी शामिल है।
BJP नेता संजय गरुड़ को ₹160 करोड़ के 'शलार्थ आईडी' घोटाले में गिरफ्तार किया गया।
परभणी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पर करोड़ों के वित्तीय घोटाले का आरोप।
संपादकीय में इसरो जैसे संस्थानों से वैज्ञानिकों के पलायन और पाठ्यपुस्तकों में वैचारिक बदलाव पर भी चिंता जताई गई।

शिवसेना (यूबीटी) ने 30 जुलाई को आरोप लगाया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पेपर लीक, अवैध नियुक्तियों और वित्तीय घोटालों के कारण पूरी तरह चरमरा गई है, और महाराष्ट्र इस व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का सर्वाधिक शिकार राज्य बन चुका है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में राज्य और केंद्र दोनों की शैक्षिक नीतियों पर तीखा प्रहार किया गया।

पेपर लीक का सिलसिला

संपादकीय में बताया गया कि महाराष्ट्र में एक महीने के भीतर दस से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिसके बाद महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के पेपर भी लीक हो गए। संपादकीय में चेतावनी दी गई: 'दिन-दहाड़े खुलेआम पेपर लीक और ग्रेड की चोरी हो रही है। शिक्षा समाज की नींव है, और अगर यह व्यवस्था चरमरा गई, तो समाज भी इसके साथ ही ढह जाएगा।'

संपादकीय के अनुसार, पुणे — जो कभी शिक्षा और ज्ञान का केंद्र माना जाता था — अब पेपर लीक के गढ़ के रूप में बदनाम हो चुका है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार ढाँचागत सुधार करने के बजाय बार-बार विशेष जाँच दल गठित करती रहती है, जिससे समस्या की जड़ पर कोई असर नहीं पड़ता।

वित्तीय घोटाले और अवैध नियुक्तियाँ

सामना संपादकीय में भ्रष्टाचार के ठोस मामलों का उल्लेख किया गया। इनमें परभणी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति से जुड़ा करोड़ों रुपये का वित्तीय घोटाला प्रमुख है। इसके अलावा, जलगाँव से भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता संजय गरुड़ की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया गया, जो कथित तौर पर ₹160 करोड़ के 'शलार्थ आईडी' घोटाले से जुड़े बताए गए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियाँ योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पक्षपातपूर्ण एजेंडे के तहत की जा रही हैं।

केंद्र पर पाठ्यक्रम बदलाव का आरोप

संपादकीय में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया कि उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा के अनुरूप इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में परिवर्तन किए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस, वामपंथियों और समाजवादियों के योगदान को पाठ्यक्रम से हटा दिया। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि अवैज्ञानिक विचारधाराओं को थोपे जाने के दबाव के कारण शोधकर्ता और वैज्ञानिक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों को छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।

वर्ग-विभाजन और असमानता

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय में वंचित छात्रों और संपन्न उम्मीदवारों के बीच गहरी खाई को उजागर किया। पार्टी के अनुसार, मध्यम वर्गीय परिवार महंगी कोचिंग कक्षाओं के लिए कर्ज लेने को विवश हैं, जबकि धनाढ्य वर्ग लीक हुए पेपर खरीदकर और परीक्षा केंद्रों में हेरफेर कर परीक्षाएँ पास करता है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर व्यापक विरोध हो रहा है। शिवसेना (यूबीटी) ने माँग की है कि राज्य और केंद्र सरकार तत्काल ढाँचागत सुधार करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें उठाए गए तथ्य — एक माह में दस से अधिक पेपर लीक और ₹160 करोड़ का घोटाला — सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए असहज करने वाले हैं। असली सवाल यह है कि बार-बार SIT बनाने के बावजूद न तो दोषियों को कड़ी सज़ा मिलती है, न ही परीक्षा तंत्र में कोई संरचनात्मक बदलाव आता है। पाठ्यक्रम में बदलाव और इसरो से वैज्ञानिकों के पलायन के आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए — केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इन मुद्दों का समाधान नहीं होगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था पर क्या आरोप लगाए हैं?
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में एक माह के भीतर 10 से अधिक पेपर लीक हुए, कुलपतियों की अवैध नियुक्तियाँ हुईं और करोड़ों के वित्तीय घोटाले सामने आए। पार्टी का कहना है कि इन सबने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म कर दिया है।
शलार्थ आईडी घोटाला क्या है और इसमें कौन गिरफ्तार हुआ?
शलार्थ आईडी घोटाला ₹160 करोड़ का कथित वित्तीय घोटाला है जिसमें जलगाँव से BJP नेता संजय गरुड़ को गिरफ्तार किया गया है। सामना संपादकीय में इसे शिक्षा तंत्र में व्यापक भ्रष्टाचार के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया गया।
महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट का पेपर लीक कब हुआ?
सामना संपादकीय के अनुसार, महाराष्ट्र में एक माह के भीतर दस से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिसके बाद महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट का पेपर भी लीक हो गया। संपादकीय में 30 जुलाई 2026 को यह जानकारी दी गई।
शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार पर पाठ्यक्रम को लेकर क्या आरोप लगाए?
सामना संपादकीय में आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ने RSS की विचारधारा के अनुरूप इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किए और स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस, वामपंथियों व समाजवादियों के योगदान को हटाया। साथ ही यह भी कहा गया कि अवैज्ञानिक विचारधाराओं के दबाव से वैज्ञानिक इसरो जैसे संस्थान छोड़ रहे हैं।
पेपर लीक से महाराष्ट्र के छात्रों पर क्या असर पड़ रहा है?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, पेपर लीक से शिक्षा में वर्ग-विभाजन गहरा हो रहा है — मध्यम वर्गीय परिवार महंगी कोचिंग के लिए कर्ज लेते हैं, जबकि धनाढ्य वर्ग लीक पेपर खरीदकर परीक्षाएँ पास करता है। पुणे जैसे शिक्षा केंद्र अब पेपर लीक के गढ़ के रूप में बदनाम हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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