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नीट पेपर लीक: संजय निरुपम बोले — एनटीए को यूपीएससी जैसी पारदर्शिता अपनानी होगी

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नीट पेपर लीक: संजय निरुपम बोले — एनटीए को यूपीएससी जैसी पारदर्शिता अपनानी होगी

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने नीट पेपर लीक को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के उस सुझाव का समर्थन किया जिसमें एनटीए को यूपीएससी से सीखने की बात कही गई। 22 लाख छात्रों के भविष्य का हवाला देते हुए उन्होंने जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में आमूल सुधार की माँग की।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 30 मई को नीट पेपर लीक मामले पर एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
निरुपम ने सर्वोच्च न्यायालय के उस सुझाव का समर्थन किया कि एनटीए को यूपीएससी मॉडल अपनाना चाहिए।
नीट परीक्षा में करीब 22 लाख छात्र शामिल होते हैं; पेपर लीक से उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ता है।
निरुपम ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों के विरुद्ध 'डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट' अभियान का समर्थन किया।
केरल विधानसभा में वंदे मातरम का पूरा गायन न होने पर निरुपम ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया।
डेयरी ब्रांड गोकुल के शाकाहारी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर केंद्र से स्पष्ट नीति बनाने की माँग।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने शनिवार, 30 मई को नीट पेपर लीक विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, क्योंकि इससे देशभर के करीब 22 लाख छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से माँग की कि वह संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कार्यप्रणाली से सबक ले और परीक्षा प्रणाली में वैसी ही सख्ती और पारदर्शिता लागू करे।

मुख्य घटनाक्रम

निरुपम ने सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का स्वागत किया जिसमें पेपर लीक के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं सुझाव दिया है कि एनटीए को यूपीएससी के मॉडल से प्रेरणा लेनी चाहिए।

उनके अनुसार, यूपीएससी कई दशकों से देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित परीक्षाएँ आयोजित करती आ रही है और आज तक उसके प्रश्नपत्र लीक होने की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। निरुपम का कहना है कि नीट सहित अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में भी उसी स्तर की पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

छात्रों के भविष्य पर असर

निरुपम ने ज़ोर देकर कहा कि जब परीक्षा की गोपनीयता ही भंग हो जाए, तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय होता है। उन्होंने माँग की कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

अन्य मुद्दों पर निरुपम का रुख

इसी प्रेस वार्ता में निरुपम ने पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरुद्ध चल रहे अभियान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 'डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट' नीति के तहत अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और उनके लिए अलग होल्डिंग सेंटर बनाने की दिशा में जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे स्वागत योग्य हैं।

केरल विधानसभा में वंदे मातरम विवाद पर उन्होंने आरोप लगाया कि सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगीत का पूरा गायन नहीं कराया गया, जो स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के सम्मान के विरुद्ध है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया।

इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र के डेयरी ब्रांड गोकुल के दूध, दही और मक्खन जैसे शाकाहारी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता पर भी निरुपम ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि निर्यात के नाम पर उत्पादकों पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है और इससे एक बड़ा आर्थिक तंत्र विकसित हो गया है।

सरकार से माँग

निरुपम ने केंद्र सरकार से हलाल सर्टिफिकेशन के मुद्दे पर हस्तक्षेप कर स्पष्ट नीति बनाने की अपील की, ताकि निर्यात और प्रमाणन की प्रक्रिया पारदर्शी और समान हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और परीक्षा प्रणालियों — दोनों को राजनीतिक विवादों से दूर रखना देश के दीर्घकालिक हित में है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नीट पेपर लीक विवाद पर देशभर में छात्र संगठन और विपक्षी दल लगातार आवाज़ उठा रहे हैं और सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'यूपीएससी मॉडल' अपनाने की माँग कितनी व्यावहारिक है जब दोनों संस्थाओं के पैमाने, प्रकृति और परीक्षार्थियों की संख्या में ज़मीन-आसमान का फर्क है। नीट में 22 लाख परीक्षार्थी हैं जबकि यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में यह संख्या कहीं कम होती है — इसलिए तुलना सतही है। जरूरत केवल 'मॉडल की नकल' की नहीं, बल्कि एनटीए की संरचनात्मक स्वायत्तता, तकनीकी सुरक्षा और जवाबदेही तंत्र में बुनियादी सुधार की है, जिस पर अभी तक ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने नीट पेपर लीक पर क्या कहा?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि नीट पेपर लीक बेहद गंभीर मामला है जिससे करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और एनटीए में यूपीएससी जैसी पारदर्शिता लागू करने की माँग की।
सर्वोच्च न्यायालय ने एनटीए को लेकर क्या सुझाव दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कार्यप्रणाली से प्रेरणा लेनी चाहिए। न्यायालय ने पेपर लीक के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की भी बात कही।
यूपीएससी को एनटीए से बेहतर क्यों माना जाता है?
यूपीएससी कई दशकों से देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाएँ आयोजित कर रही है और उसके प्रश्नपत्र लीक होने की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है। निरुपम के अनुसार यूपीएससी की पारदर्शिता और सख्त प्रक्रिया उसे एक विश्वसनीय मॉडल बनाती है।
गोकुल डेयरी हलाल सर्टिफिकेशन विवाद क्या है?
महाराष्ट्र के डेयरी ब्रांड गोकुल के दूध, दही और मक्खन जैसे शाकाहारी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता पर सवाल उठे हैं। निरुपम ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप कर स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने की माँग की है।
केरल विधानसभा में वंदे मातरम विवाद क्या है?
निरुपम ने आरोप लगाया कि केरल विधानसभा सत्र की शुरुआत में वंदे मातरम का पूरा गायन नहीं कराया गया। उन्होंने इसे स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के सम्मान के विरुद्ध बताया और कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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