नीट पेपर लीक: शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे बोले — छात्र आंदोलन को बदनाम करना बंद करे सरकार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 24 जुलाई को मुंबई में नीट पेपर लीक मामले और देशभर में जारी छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण और छात्रहित में चल रहे इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश बंद करनी चाहिए।
आंदोलन पर दुबे का रुख
दुबे ने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रदर्शन में कोई अनियमितता या देश-विरोधी गतिविधि सामने आए, तो पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने चेताया कि इस बहाने छात्रों के हित में चल रहे जंतर-मंतर जैसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को प्रभावित या कलंकित नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्रव्यापी संकट
दुबे ने रेखांकित किया कि नीट पेपर लीक का मुद्दा महज दिल्ली तक सीमित नहीं है — बिहार, प्रयागराज और महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में छात्र सड़कों पर उतरे हैं। यह लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है और उन्होंने माँग की कि सरकार उनकी चिंताओं को संजीदगी से सुने।
PM मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट मामले पर जारी वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए दुबे ने कहा कि यह प्रतिक्रिया बहुत देर से आई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट का मुद्दा कैबिनेट में उठाने की बात कही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह कदम पहले उठाया जाना चाहिए था।
दुबे ने यह भी कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, परंतु छात्रों की माँग अब भी कायम है — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सरकार से माँग की कि इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और शीघ्र समाधान निकाला जाए।
26 जुलाई का मार्च
दुबे ने घोषणा की कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे 26 जुलाई को शिवतीर्थ से सिद्धिविनायक मंदिर तक मार्च निकालेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रैली किसी एक राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जन आंदोलन है।
आगे की राह
दुबे ने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर जितनी अधिक देरी होगी, उतना ही देश और छात्रों का नुकसान होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से लोकतांत्रिक तरीके से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक की घटनाएँ बार-बार सामने आ रही हैं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।