नीट पेपर लीक पर आनंद दुबे का वार: 'PM सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगें'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 23 जुलाई को मुंबई में नीट पेपर लीक विवाद, शरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात, तथा अभिनेता सलमान खान के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। दुबे ने सरकार से माँग की कि सोशल मीडिया पोस्ट की जगह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाए।
शरद पवार-PM मुलाकात पर दुबे का रुख
आनंद दुबे ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने स्वयं स्पष्ट किया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से छात्रों के प्रदर्शन और महाराष्ट्र के किसानों से जुड़े विशेष मुद्दों पर चर्चा की। दुबे ने यह भी स्वीकार किया कि शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी के बीच गुरु-शिष्य जैसा संबंध माना जाता है। उन्होंने कहा, 'राजनीति किस करवट जाएगी, यह किसी को नहीं पता।'
नीट विवाद पर सरकार को सीधी चुनौती
दुबे ने नीट पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट पर तीखी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, जब देश के छात्र किसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हों तो 20 दिन बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
दुबे ने संसद की कार्यवाही ठप होने पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि सदन चार दिनों से नहीं चल पा रहा है और करोड़ों रुपये की सार्वजनिक धनराशि व्यर्थ हो रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पहले दिन ही छात्रों से संवाद होना चाहिए था, क्योंकि हर विवाद का समाधान बातचीत से निकलता है।
सलमान खान के बयान पर दुबे की प्रतिक्रिया
अभिनेता सलमान खान समेत अन्य सेलिब्रिटी के बयानों पर दुबे ने कहा कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज से हर संवेदनशील नागरिक दुखी है — चाहे वह मशहूर क्रिकेटर हो, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता या अभिनेता। उन्होंने कहा, 'यह देश हम सभी का है।'
दुबे ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की भीड़ में कुछ असामाजिक तत्वों के घुसने की बात कही जा रही है, लेकिन यह पुलिस की नाकामी को उजागर करता है क्योंकि वे उन्हें पहचान नहीं सके और रोक नहीं पाए।
संवाद ही समाधान: दुबे का आह्वान
दुबे ने अपनी बात समाप्त करते हुए सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करे और इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाए। उनका मानना है कि जितनी देर होगी, उतना ही संसद का समय और जनता का धन बर्बाद होगा। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों मोर्चों पर केंद्र सरकार के लिए बड़ी परीक्षा बना रहेगा।